गर्भावस्था के नौ महीने

गर्भावस्था के नौ महीने

जब महिला पहली बार मां बनती है तो वह उसके लिए बहुत खुशी का क्षण होता है। यह खबर उसके लिए और परिवार के लिए अच्छी होती है पर गर्भावस्था के साथ जुड़े नौ माह गर्भिणी के लिए कुछ सुखद और कष्टदायक भी होते हैं। गर्भ धारण करने के बाद हर महिला को उन क्षणों का पूरा आनंद लेना चाहिए।
सबसे आवश्यक होता है उचित एवं पौष्टिक आहार। पहले आप अपनी इच्छानुसार कुछ भी, कभी भी खा पी लेते थे पर अब आपको उन्हें रोकना होगा। अब आपको प्लेट में किन चीजों को स्थान देना है और किन्हें नहीं, इस बात का ध्यान रखना होगा।
क्या लें
-अपने आहार में विटामिन्स और मिनरल्स की मात्रा बढ़ा लें (जैसे फोलिक एसिड और आयरन) और कुछ कैलोरीज की मात्रा भी गर्भावस्था में बढ़ा लें। जंक फूड की मात्रा बहुत कम कर दें। जंक फूड कैलोरीज़ के अलावा कुछ भी पौष्टिकता नहीं देते। अधिकतर लोग आपको यह कहेंगे कि खूब खाओ। आपको दो लोगों के लिए खाना है पर यह डाक्टरों की निगाह में ठीक नहीं है।
पहले छ: माह तक अधिक अतिरिक्त कैलोरी की आवश्यकता नहीं होती। अपनी आवश्यकतानुसार भूख लगने पर ही खाएं। आपको पौष्टिकता पर पूरा ध्यान देना है इसलिए बैलेंस्ड डाइट लें। ऊर्जा के लिए कार्बोहाइडे्रट्स, शरीर को स्वस्थ रखने के लिए प्रोटीन्स, शरीर की सुरक्षा के लिए खनिज और रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने के लिए विटामिन्स लें।
क्या न लें
-कच्चा या अधपका अंडा न खाएं। इसी प्रकार कच्चा दूध, कच्ची सब्जियां और अध पका मीट न खाएं। इनके सेवन से आपके शरीर में नुक्सान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया प्रवेश कर सकते हैं।
-शराब पीने से बच्चा शारीरिक रूप से विकलांग पैदा हो सकता है, इसलिए शराब का सेवन बिलकुल न करें।
-धूम्रपान करने वाली माताओं के बच्चे मनोरोगी पैदा हो सकते हैं। धूम्रपान मनोरोग को बढ़ावा देता है इसलिए इससे दूरी रखें।
-अधिक कैफीन के सेवन से गर्भपात का खतरा बढ़ सकता है या बच्चे का वजन जन्म के समय काफी कम हो सकता है। शोधकर्ताओं के अनुसार दिन भर में 300 मि.ग्रा. कैफीन से ज्यादा मात्र लेना आने वाले बच्चे को नुकसान पहुंचाती है।
गर्भावस्था के दौरान समस्याएं
गर्भावस्था के दौरान कुछ समस्याएं ऐसी होती है जिनसे लगभग सभी महिलाओं को जूझना पड़ता है।
मार्निंग सिकनेस
सुबह उठते समय ऐसा महसूस होता है जैसे उल्टी आ रही हो। सिर का भारी रहना, चक्कर आना आदि भी आम बातें हैं। इनसे निबटने के लिए प्रात: बेड से बाहर आने से पहले फल या बिस्कुट ले लें और एक-दम बिस्तर से बाहर न निकलें। रात्रि को बहुत पेट भर न खाएं। अगर रात्रि में भूख लगने लगे तो फल या बिस्कुट ले लें। प्राय: यह समस्या प्रारंभ के तीन-चार माह तक रहती है।
कब्ज
गर्भावस्था के दौरान कब्ज की शिकायत एक आम शिकायत है। इसके लिए खूब पानी पिएं, सूखे मेवों का सेवन करें, ताजे फल खाएं, और रेशेदार सब्जियां लें। इन सबके सेवन से कब्ज नहीं होती।
पीठ दर्द
अधिकतर महिलाओं को लोअर बैक पेन रहती है और टांगों के निचले भाग में भी दर्द रहता है। इनसे छुटकारा पाने के लिए पीठ पर हलके हाथों से मालिश करवाएं दबवाएं, कुछ बैक स्टे्रचिंग व्यायाम करें पर पहले अपने डाक्टर से परामर्श कर लें।
सीने में जलन
पेट में से अम्ल आहार नली में जब वापिस जाता है तो एसिडिटी की शिकायत होती है और सीने में जलन महसूस होती है। इसके लिए थोड़ी-थोड़ी देर में थोड़ा-थोड़ा खाते रहें और अपने डाक्टर से अम्ल रोधी दवा के बारे में जानकारी लें।
मसूड़ों से खून आना
हार्मोनल बदलाव के कारण मसूढ़ों से अक्सर खून आना इस अवस्था में प्रारंभ हो जाता है। इसके लिए दांतों की सफाई पर विशेष ध्यान दें। दिन में दो बार बु्रश से दांत साफ करें और डेन्टल फ्लास का प्रयोग करें ताकि खाना दांतों में जमा न रहे।
स्टे्रच माक्र्स
जब भू्रण का विकास होता है तो पेट, हिप्स और जांघों पर लाल लाइनें पड़ जाती है। बाद में उन पर पपड़ी जम जाती है। पपड़ी उतरने के बाद उन स्थानों पर निशान पड़ जाते हैं। डिलीवरी के बाद भीर्य निशान बने रहते हैं। गर्भावस्था के दौरान लाल लाइनें पडऩी प्रारंभ हों तो कोई अच्छी क्रीम या लोशन उन पर लगाएं। इनके प्रयोग से निशान काफी हल्के हो जाएंगे।
-नीतू गुप्ता

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