सास बहू का झगड़ा

सास बहू का झगड़ा

सास बहू का झगड़ा आज से नहीं, सदियों से चलता आया है। यदि गौर से देखें तो एक परंपरा ही बन गई है। इसका मुख्य कारण उन दोनों में तालमेल की कमी है।
एक अच्छी सास बहू का आपस में तालमेल होना जरूरी है। जब बहू घर में है तो उसे चाहिए कि हर काम सास से पूछ कर करे तो सास उससे प्रसन्न होगी और समझेगी कि उसने सास की कद्र की। बुजुर्ग अक्सर खाने-पीने के शौकीन नहीं देखे गए हैं परन्तु वे आदर पाने के शौकीन होते हैं, अत: उनसे मधुर और नम्र तरीके से बात करें।
घर में सास का रोल मां और घर के मुखिया का होता है। वह जैसे चाहे, वैसे घर चलाएगी परंतु यदि बहू बुद्धिमान है और उसके खानपान तथा स्वभाव से परिचित है तो उसके स्वभाव को देखकर बर्ताव कर सकती है। सास ही है जो अपने बेटे यानी आपके पति, अपने पति यानी आपके ससुर, आपकी ननद, देवर, जेठ-जेठानी पर पूरा अधिकार रखती है इसलिए बहू को पूरी नम्रता से घर में व्यवहार करना चाहिए जिससे किसी को किसी प्रकार की तकलीफ न हो।
सास को यह नहीं भूलना चाहिए कि वह भी कभी बहू थी। बहू घर में प्रवेश करती है तो सास के तेवर बदल जाते हैं। सास ऐसा क्यों नहीं सोचती कि वह भी तो कभी बेगाने घर से बहू बनकर इस घर में आई थी। बहू के खाने से जलन, पहनने से जलन, बहू के बोलने से जलन और धीरे-धीरे बहू के हर काम से उसे जलन होने लगती है जिससे घर में झगड़ा, तनाव और कई बार अच्छे-खासे घर टूटते देखे गए हैं।
आज आधुनिक जमाना है। आज की बहुएं ज्यादातर आधुनिक तरीके से जीना चाहती हैं और उन्हें जीने का हक है भी। उनका, खाना पीना सब कुछ आधुनिक हो गया है। अगर घर में सभी आधुनिक सुविधाएं हैं तो बहू को पूरा हक है कि वो उन सुविधाओं का इस्तेमाल करे परंतु कभी-कभी इसके विपरीत देखने में आता है।
सास को चाहिए कि वह बहू को उन सभी सुविधाओं को इस्तेमाल करने दें तथा बहू को प्यार दे परंतु उसे भी आदर की आवश्यकता है। सास एक आदर्श नारी का प्रदर्शन बहू के सामने करे तो घर नरक से स्वर्ग बन सकता है और इससे पूरे घर का वातावरण बदल सकता है।
- ओ.पी. भाटिया

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