यौन-उत्पीडऩ सहना पड़ता है कामकाजी युवतियों को

यौन-उत्पीडऩ सहना पड़ता है कामकाजी युवतियों को

आज जिस तेजी से कामकाजी युवतियों की संख्या बढ़ी है उसी दर से छेड़छाड़ और यौन उत्पीडऩ के मामले भी बढ़ रहे हैं। घर की चारदीवारी में ही जब स्त्री सुरक्षित नहीं रही तो बाहर तो वह और भी ज्यादा असुरक्षित हो गई है।
पहले यौन उत्पीडऩ का शिकार स्टेनो और नर्से ही ज्यादा हुआ करती थी क्योंकि उनका कार्य ही कुछ ऐसा था जहां पुरूषों को उनके साथ छेड़छाड़ का मौका आसानी से मिल जाता था लेकिन आज तो एक महिला पुलिसकर्मी, महिला डॉक्टर, आई. ए. एस. महिला तक यौन उत्पीडऩ की चपेट में आ जाती हैं।
आखिर किस तरह से होता है यौन उत्पीडऩ? इसमें शामिल हैं अश्लील फिकरेबाजी, द्विअर्थीसंवाद, शारीरिक स्पर्श, कभी चूमाचाटी तक करना। इन सबसे एक संस्कारशील युवती को जिस मानसिक यातना से गुजरना पड़ता है वह वही जानती है। क्रोध से वह मन ही मन उबलती है लेकिन पुरूष-वर्चस्व समाज में कुछ कर नहीं पाती। कभी-कभी स्थिति असहनीय हो जाने पर वह नौकरी तक छोड़ देती है लेकिन दूसरी जगह की भी कोई गारंटी नहीं होती कि वहां उससे अभद्र व्यवहार न होगा।
कुछ अत्याधुनिक युवतियां जो स्वयं फ्लर्ट होती हैं, इन बातों का बुरा नहीं मानती। देखा जाए तो कई बार वे स्वयं उन्हें छेडख़ानी के लिए उकसाती हैं।
घर से बाहर निकलने वाली नारी को अत्यधिक संवेदनशील नहीं होना चाहिए क्योंकि ऐसे में उनका स्वयं का जीवन दूभर हो सकता है। न ही उसे 'टच मी नॉट' रवैय्या अपनाना चाहिए। कई बार वह इस रौ में पुरूष द्वारा अपनापन प्रदर्शित करने को भी गलत समझ उसे बेवजह तूल देकर पुरूष को बदनाम कर उसका कैरियर चौपट कर सकती है।
स्त्री को अपना यह नया रोल अत्यंत समझदारी से निभाना होगा। पुरूष की प्रकृति को समझते हुए ही उसे अपना आचार व्यवहार रखना चाहिए। एक जरूरी बात यह है कि फैशन की अंधी दौड़ में सैक्सी दिखने के चक्कर में ऑफिस या और कहीं भी कार्य पर ऊल-जलूल शरीर प्रदर्शन करने वाले कपड़े पहनकर न जाए। शालीन और गरिमामयी युवती को तुलनात्मक रूप में पुरूष कम ही छेडऩे की हिम्मत करेगा।
युवतियां कई बार महज समाज के डर से चुपचाप उत्पीडऩ सहती रहती हैं जो सरासर गलत है। जब बाहर कार्य करने निकलती हैं तो उन्हें दिलेर बनना चाहिए, दब्बू नहीं। गलत बातों को सहना गलती करने से कम नहीं। कामकाजी युवतियों को यह नहीं भूलना चाहिए कि अब अपनी रक्षा, अपनी देखभाल उन्हें स्वयं करनी है। बाप, भाई, पति, पुत्र सिर्फ एक हद तक ही उन्हें सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं। उनका बॉडीगार्ड बनकर सदा उनके साथ हर जगह मौजूद रहना संभव नहीं। नारी शक्ति का अजस्त्र स्रोत है। अपना मनोबल बढ़ाएं। याद रखें कि गलत कार्य करने वाला भीतर से बेहद डरपोक व कायर होता है।
- उषा जैन शीरीं

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