क्यों आवश्यक है विवाह?

क्यों आवश्यक है विवाह?

हर मां बाप का सपना होता है कि वे अपने बच्चों का विवाह सही समय पर कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लें। वैसे तो गृहस्थ आश्रम में जिम्मेदारियां समाप्त नहीं होती पर 'स्टेप बॉय स्टेप' जिम्मेदारियों को पूरा करना उन्हें अपना धर्म लगता है।
आधुनिक समय में कैरियर में उलझी लड़कियां विवाह को प्राथमिकता न देकर अपने कैरियर के उद्देश्य को पूरा करने में अधिक खुशी मानती हैं।
वहीं दूसरी तरफ कुछ महत्त्वाकांक्षी लड़कियां और कुछ माता-पिता विवाह को बिना वजह टालते रहते हैं जिसका परिणाम यह होता है कि सही उम्र निकल जाने के बाद माता-पिता और लड़कियों को कई मुसीबतों का सामना करना पड़ता है।
कुछ प्रतिशत लड़कियां पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित होकर विवाह बंधन में बिलकुल भी पडऩा नहीं चाहती जबकि सेक्स विशेषज्ञों और मनोचिकित्सकों की राय में ये लक्षण हैल्दी नहीं हैं। लड़कियों के लेट उम्र तक विवाह न करने के क्या कारण हैं, आइए जानें:-
पिता की असामयिक मृत्यु के कारण कभी कभी घर को चलाने का बोझ घर की बड़ी लड़की पर आ जाता है। वो उसे अपनी जिम्मेदारी मानते हुए उसे प्राथमिकता देती है कि जब तक छोटे बहन भाई सेटल न हो जाएं। इसी सब में उसकी विवाह की उम्र निकल जाती हैं।
कुछ कैरियर मांइडेड लड़कियां जब तक अपने लक्ष्य को पा न लें, तब तक विवाह की चर्चा करना भी पसंद नहीं करती। जब वे अपने लक्ष्य को पा लेती हैं या लक्ष्य की उपलब्धि को नहीं पा सकती, तब तक उनके विवाह की उम्र काफी आगे बढ़ जाती है।
कुछ लड़कियों के अपने नखरे और कुछ के माता पिता के नखरे इतने ऊंचे होते हैं कि उन्हें कोई रिश्ता पसंद नहीं आता और वे कोई न कोई कमी निकाल कर सही वर को तलाश नहीं कर पाते।
भारतीय समाज में दहेज भी एक बड़ी रूकावट है विवाह में। कम सुंदर, कम पढ़ी लिखी, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की लड़कियों का विवाह इन्हीं कारणों से टलता रहता है।
उच्च शिक्षा प्राप्त लड़कियां, उच्च पदों पर आसीन और अपना व्यवसाय करने वाली लड़कियों को अपने स्तर के योग्य साथी आसानी से नहीं मिलते। इस कारण उनकी विवाह की उम्र निकल जाती है।
कुछ लड़कियां बार-बार रिजेक्ट हो जाती हैं। इस कारण वे निराश हो जाती हैं और विवाह करने में उनकी रूचि समाप्त हो जाती है।
कई बार बेटी की कमाई छिन जाने के डर से माता पिता जानबूझ कर बेटी का विवाह टालते रहते हैं। अगर वो हिम्मत कर किसी लड़के से विवाह करना चाहती है तो धर्म, जाति, समाज का डर दिखाकर उसे निरूत्साहित करते हैं।
आजकल की कुछ प्राइवेट नौकरियां भी लड़कियों को विवाह के लिए निरूत्साहित करती हैं क्योंकि उनकी छुट्टी का कोई निश्चित समय नहीं होता। कई बार उन्हें ऑफिस के काम के लिए बाहर भी जाना पड़ता है। वेे इस डर से विवाह नहीं करती कि शादी के बाद कौन बहू को इन सबके लिए छूट देगा और वे गृहस्थ आश्रम को निभाने में स्वयं को असमर्थ मानती हैं।
क्यों आवश्यक है विवाह ?
सेक्सोलोजिस्ट, मनोचिकित्सकों, और समाजशास्त्रियों की नजर में सही उम्र में विवाह क्यों जरूरी है और उनके क्या लाभ हैं:-
- विवाह करने के बाद लड़की को एक विश्वसनीय साथी मिल जाता है और एक परिवार भी जहां वो उनके साथ अपने सुख दु:ख मिलकर बांट सकती है और जिम्मेदारियों की भरपाई भी मिलकर कर सकती है?
- पुरूष मित्र एक भंवरे के समान होते हैं जो फूल का रस तब तक चूसते हैं जब तक वो रस से भरा हो। रस समाप्त होते ही वो और फूलों की तरफ आसानी से मुड़ जाते हैं, इसलिए पुरूषमित्रों पर आप जीवन भर विश्वास कर नहीं चल सकते।
- विवाह के पश्चात् आप अपने पार्टनर के साथ सुरक्षित और निश्चित यौन सुख प्राप्त कर सकते हैं।
- संकट की घड़ी में अपने पति के कंधे पर सिर रखकर अधिकारपूर्ण मदद मांग सकती हैं पर पुरूष से आप ऐसा नहीं कर सकती।
- पति के साथ विवाहोपरांत ऐसा रिश्ता होता है जो आपको अपना होने का अहसास देता है, बीमारी में, बुढ़ापे में आपकी देखभाल करता है। आप इसकी उम्मीद पुरूष मित्र और भाई से नहीं रख सकते।
- बुढ़ापे में जब सभी संबंधी, अपने बहन भाई अपने परिवारों के साथ मस्त होते हैं तब अकेलापन काटने को दौड़ता है।
- अविवाहित स्त्री को यौनसुख तो शायद पुरूष मित्र से मिल जाएगा पर मातृत्व का सुख वो अपने पति से ही प्राप्त कर सकती है।
- अकेलापन बड़ी आयु में औरतों के दिल दिमाग पर विपरीत प्रभाव डालता है। वे स्वयं को असुरक्षित महसूस करती हैं और स्वभाव में चिड़चिड़ापन और सनकीपन आ जाता है।
- हमारे समाज में अकेली स्त्री का अस्तित्व खतरे में रहता है। सभी की भूखी निगाहें उस पर रहती हैं। अवसर पाते ही वे लाभ उठाने से नहीं चूकते।
एक मनोचिकित्सक की दृष्टि में महिलाओं के लिए विवाह करना अनिवार्य है। उनका कहना है कि विवाह की उम्र मु_ी में रेत के समान होती है जो सरकती जाती है। जब मु_ी खाली हो जाती है तो महिलाएं हीनभावना की शिकार हो जाती हैं।
सेक्स एक नैसर्गिक जरूरत है। अगर विवाह नहीं करेंगी तो वो कामोत्तेजना के आवेग में किसी पुरूष मित्र की सहानुभूति मिलते ही अपना सब कुछ न्यौछावर कर देती हैं और फिर अपराध बोध में जीती रहती हैं। इसलिए विवाह एक जरूरत है सामाजिक, शारीरिक और मानसिक रूप से निश्चित रहने के लिए।
कोई भी व्यक्ति सर्वगुणसंपन्न नहीं होता। कुछ खूबियों और कमियों के साथ अगर दूरगामी सुखद परिणामों को दिमाग में रखकर विवाह करेंगी तो अंत अच्छा ही होगा और कई नये रिश्तों के साथ समाज का हिस्सा बनाकर रहने में अच्छा लगेगा।
- नीतू गुप्ता

Share it
Top