जरूरी है विचारों का भी उचित प्रबंधन

जरूरी है विचारों का भी उचित प्रबंधन

कई बार हमारी अपेक्षाएँ अथवा हमारे सपने बहुत बड़े होते हैं और हम उन्हें पूर्ण भी कर लेते हैं लेकिन फिर भी जीवन में संतुष्टि नहीं मिल पाती अथवा हम उस सफलता से लाभांवित नहीं हो पाते। इसका अर्थ यही है कि हमने समय का भरपूर इस्तेमाल तो किया लेकिन प्राप्त उपलब्धियों में संतुलन का अभाव रहा और इस असंतुलन के मूल में है इच्छाओं, अपेक्षाओं अथवा विचारों के सही प्रबंधन का अभाव। जब तक विचारों का सही प्रबंधन नहीं होता प्राप्त उपलब्धियों में संतुलन हो ही नहीं सकता।
यदि हमारी इच्छा ख़ूब धन पाने की है तो जब तक धन को सही तरीक़े से कमाने व प्राप्त धन के सही तरीक़े से उपयोग की इच्छा अथवा अपेक्षा नहीं करेंगे, वह धन हमारे लिए जी का जंजाल बनकर रह जाता है। उसके दुरुपयोग की संभावना बढ़ जाती है। वो धन स्वर्णनिर्मित उन कर्णफूलों के समान हो जाता है जो कानों को काटते हैं। इस स्थिति से बचने के लिए विचारों का उत्तम प्रबंधन अनिवार्य है।
कई बार हम बहुत कुछ चाहते हैं लेकिन हमें ये पता नहीं होता कि हम क्या चाहते हैं? हम क्या चाहते हैं? यही नहीं, हम क्यों चाहते हैं और हम कैसे चाहते हैं? ये विचार भी अत्यंत स्पष्ट होने चाहिएँ। हमारी अपेक्षाओं, उनके उचित उपयोग व उन्हें पाने के तरीक़े के विषय में पूर्ण रूप से स्पष्टता होनी चाहिए। जीवन में समृद्धि की कामना बुरी बात नहीं है। जीवन में बड़े सपने देखने अथवा अधिक की कामना करने पर भी जब हमारी कामनाएँ पूर्ण होने की पूरी संभावना होती है तो ऐसी अवस्था में अधिकाधिक समृद्धि की कामना न करना कोई समझदारी की बात तो है नहीं।
अपनी समृद्धि से आप न केवल स्वयं भौतिक जगत की सुख-सुविधाओं का आनंद उठाएँ अपितु दूसरों को भी आगे बढऩे व सुख-सुविधाओं का आनंद लेने में सहायता करें। इसी के लिए ज़रूरी है इच्छाओं का सही प्रबंधन।
हमारी इच्छाएँ चाहे जितनी बड़ी हों पर हों उदात्त व सात्विक। हम किसी भी सूरत में कोई ग़लत उद्देश्य रखकर कोई इच्छा न करें। हम अपनी इच्छाओं की पूर्ति के तरीक़े के बारे में भी स्पष्ट हों। हम किसी भी क़ीमत पर दूषित साधन या माध्यम से सफलता पाने के बारे में न सोचें। ग़लत साधनों या माध्यमों से प्राप्त सफलता जीवन में कभी प्रसन्नता नहीं प्रदान कर सकती। मज़े की बात यही है कि यदि हम अधिक की कामना करते हैं तो वह भी संभव है और शुद्ध साधनों अथवा माध्यमों के द्वारा अधिक की कामना करते हैं तो वह भी संभव है और इसी के लिए इच्छाओं में संतुलन अथवा विचारों के सही प्रबंधन की भी ज़रूरत है। विचारों के सही प्रबंधन द्वारा ही हम सफल, समृद्ध व ऐश्वर्यशाली बन सकते हैं, इन्हें ईमानदारी से हासिल कर सकते हैं और प्राप्त सफलता, समृद्धि व ऐश्वर्य का सदुपयोग भी कर सकते हैं।
- सीताराम गुप्ता

Share it
Top