भोजन परोसना भी एक कला है

भोजन परोसना भी एक कला है

पिछलों दिनों सुरूचि के घर कुछ मेहमान आए तो उसने तरह-तरह के लजीज पकवान बनाए। भोजन बनाने में खर्च भी उसने हैसियत से अधिक कर दिया था।
उसे व उसके पति को पूर्ण आशा थी कि उनके मेहमान खाने की तारीफ किए बिना नहीं रह पायेंगे मगर उस समय सुरूचि का मन आहत हो गया, जब मेहमानों की तरफ से खाने की प्रशंसा तो क्या अपितु दबी जुबान से टिप्पणियां ही सुनने को मिलीं।
इसका मुख्य कारण था कि सुरूचि को खाना परोसने का ढंग बिलकुल नहीं था। उसने अव्यवस्थित ढंग से खाना परोसा था। मेहमानों को हर चीज मांगनी पड़ रही थी, कभी पानी, कभी अचार तो कभी नमक-मिर्च। वैसे आप चाहे खाना कितना भी बढिय़ा क्यों न बना लें मगर आपको खाना परोसने की कला का ज्ञान होना आवश्यक है। अगर आप सलाद को बेढंगे तरीके से पेश करेंगी तो यह देखने वाले के मन पर अच्छा प्रभाव नहीं डालेगा। खाना परोसना भी एक कला है। आइए, आपको बताएं इस बारे में कुछ खास बातें।
- सर्वप्रथम खाना खाने के लिए बर्तनों को धो-पोंछकर पहले से ही तैयार रखें। यह न हो कि खाना परोसते समय आपको कोई बर्तन ढूंढना या धोना पड़े।
- सलाद को सुन्दर ढंग से प्लेट में इस तरह सजायें कि सभी सब्जियां अथवा फल एक-दूसरे के ऊपर-नीचे न आएं।
- खाना परोसते वक्त देख लें कि कहीं वह ठण्डा तो नहीं।
- मेज पर आवश्यक चीजें जैसे पानी का जग, अचार की शीशी, नमक-मिर्च, चम्मच, कांटे, छुरियां आदि पहले से ही रख दें।
- जब मेहमान खा रहे हों तो यह ध्यान रखें कि किस व्यक्ति के पास क्या चीज खत्म हो गई है और खुद ही वह वस्तु उसे दें। यह न हो कि मेहमान को खुद ही आपसे किसी वस्तु की मांग करनी पड़े।
- संभव हो सके तो खुद भी उनके साथ खाना खाने बैठें।
- खाना परोसते समय यह सदैव ध्यान रखें कि सब बर्तन एक जैसे हों। यह न हो कि कोई बर्तन कांच का हो व कोई स्टील का। इससे खाने की शोभा घट जाती है।
- प्रसन्नचित होकर खाना परोसें व बीच-बीच में मेहमान को प्यार से खाने के लिए भी कहती रहें। इससे मेहमान पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा।
- भाषणा बांसल

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