दांपत्य में निकटता भी जरूरी है

दांपत्य में निकटता भी जरूरी है

यौन संबंधों का दांपत्य जीवन में महत्त्वपूर्ण स्थान है। इसके अभाव में दांपत्य जीवन दुखमय बन जाता हैं। इन्हें दांपत्य जीवन का प्राण कहा जाय तो अतिशयोक्ति नहीं होगी क्योंकि इनके अभाव में दांपत्य जीवन नीरस और कटु हो जाता है। सैक्स दांपत्य जीवन के लिए वह मजबूत डोर है जो उसे मजबूती से बांधे रखता है। यौन संबंध में कमी आने से दांपत्य जीवन में कटुता आने लगती है, परिवार का माहौल बिगड़ जाता है। पति पति छोटी-छोटी बातों पर लडऩे झगडऩे लगते हैं। आज ऐसे अनेकों दंपति हैं जो शारीरिक रूप से स्वस्थ और पूर्ण यौन सक्षम होते हुए भी नासमझी और अहम् के टकराव के कारण दुखमय जीवन व्यतीत कर रहे हैं। पति-पत्नी दोनों एक दूसरे से असंतुष्ट हैं। असंतुष्ट रहनेवाली महिलाएं अनेकों बीमारियों का शिकार हो जाती हैं।
पति-पत्नी को हमेशा प्रयास करना चाहिए कि दोनों के बीच अहम पैदा न हो। कभी-कभी नासमझी के कारण दांपत्य जीवन में कटुता आ जाती है। ऐसे में पति-पत्नी चाहें तो आपस में खुलकर बातचीत करके गलतफहमी को दूर कर दांपत्य जीवन को पुन: मधुर बना सकते हैं। नीचे कुछ टिप्स प्रस्तुत हैं जिनपर अमल किया जाय तो कटु दांपत्य जीवन को आसानी से मधुर बनाया जा सकता है:-
खुलकर बातचीत
पति-पत्नी के मध्य मधुर संबंध कायम रखने के लिए दोनों के बीच खुलकर बातें होना जरूरी होता है। इससे मन की गुत्थियां सुलझ जाती हैं। पति-पत्नी के बीच खुलकर बातचीत न होने का मुख्य कारण है विश्वास की कमी। विश्वास दांपत्य जीवन का प्राण है। पति-पत्नी में इतना विश्वास होना चाहिए कि दोनों का जीवन एक-दूसरे के लिए खुली किताब सा हो अर्थात दोनों के बीच छिपानेवाली कोई बात ही न हो लेकिन दोनों के बीच जब विश्वास की कमी होती है तब मन में कई संदेह पलने लगते हैं। विश्वास के अभाव में पति-पत्नी मन की बातें कह नहीं पाते और दूरी धीरे-धीरे बढ़ती ही जाती है जो दांपत्य जीवन के लिए हानिकारक होता है।
बातचीत के समय आक्रामक या तुनकमिजाजी होने से बचना चाहिए। यदि ऐसा अवसर कभी आ भी जाय तो ऐसे सुविधाजनक तथा व्यवहारिक तरीके अपनाने चाहिए ताकि इनके बाद भी आपस में प्रेम के दो बोल बोल सकें। किसी भी हालत में दोनों के बीच संवादहीनता नहीं पैदा होनी चाहिए अन्यथा दांपत्य जीवन की खुशहाली खत्म हो जायेगी।
मानसिक दबाव
मानसिक दबाव पारिवारिक जीवन का शत्रु है जो गलत जीवन शैली के कारण पैदा होता है। आज पुरूष ऐश्वर्यपूर्ण जीवन के लिए साधन जुटाने में लगा है तो महिलाएं किसी पार्टी या क्लब में जाकर अपना समय बिताती हैं। इससे अक्सर पति-पत्नी में मतभेद पैदा होने लगता है जिसके कारण दोनों में एक दूसरे की निंदा, बहस तथा एक-दूसरे को हीन बतलाने की प्रवृत्ति पैदा होती है जो मानसिक तनाव को जन्म देता है। दोनों मानसिक तनाव से ग्रसित हो जाते हैं और परिवार की शांति नष्ट हो जाती है। यदि पति-पत्नी आपस में तालमेल बिठाकर काम करेंगे तो दोनों एक दूसरे से खुश रहेंगे। अपने परिवार के सदस्यों के मध्य समय बिता कर उन्हें सामंजस्य बिठाने में सहूलियत भी होगी। घर-परिवार का वातावरण बेहतर होगा और आज के टूटते परिवारों को जोडऩे में सहायक भी होगा।
समझौता:- दांपत्य जीवन को तनावग्रस्त होने से बचाने के लिए आवश्यक है कि दोनों में क्षमा भावना हो तथा दोनों एक दूसरे को स्वीकार करें। बहुत ज्यादा भावुक होना ठीक नहीं होता, इसलिए इससे बचने के लिए अपने को सदा व्यस्त रखें। यदि आपका जीवन संगी आपको महत्त्व नहीं देता तो आप अपने को उससे तटस्थ रखें तथा अपनी परेशानी प्रकट न करें। आपस में प्रेम बढ़ाने के लिए अपने जीवनसंगी को जन्मदिन की शुभ कामनाएं दें। शादी की सालगिरह भी मनाएं। उस विशेष दिन को हमेशा याद रखें। शुभ कामनाएं देना और लेना जीवन के परिवेश को बदल देता है।
पति-पत्नी को ऐसा आचरण करना चाहिए कि दोनों में किसी तरह का विवाद पैदा न हो, यदि कोई विवाद उठ खड़ा हो तो उन्हें आपस में समझौता करके सुलझा लेना चाहिए। यह दांपत्य जीवन को मधुर बनाये रखने का उत्तम तरीका है। आपसी रिश्ते में ईमानदारी बरतनी चाहिए क्योंकि परिवार व समाज में रहने के नाते उसके दायित्वों का पालन करना भी आपका कर्तव्य है। यह स्वस्थ सामाजिक व पारिवारिक वातावरण के लिए आवश्यक होता है। यदि आप कहीं अन्यत्र चोरी-छिपे संबंध कायम करेंगे तो उसका भांडा फूटने पर आपकी बेइज्जती होगी क्योंकि अवैध संबंध को समाज स्वीकार नहीं करता। अत: ऐसे संबंधों से सदैव बचें।
पति-पत्नी में प्रेम की भावना नहीं होने पर यौन जीवन भी प्रभावित होता है। दोनों में यौन भावना कम हो जाती है जिस के कारण पुरूष नपुंसकता की ओर बढऩे लगता है। आज की भागमभाग वाली जीवन शैली के कारण पति-पत्नी भावनात्मक रूप से एक दूसरे से दूर होते जा रहे हैं। उनके पास यौन संबंधों के लिए भी समय नहीं है। ऐसे में पति-पत्नी को जागरूक होकर दांपत्य जीवन की आवश्यकताओं को समझना होगा अन्यथा जीवन में यौन शून्यता आ सकती है। हर स्थिति में 'आज नहीं' 'मूड नहीं है' न कहें। इससे दोनों में दूरी पैदा होगी जो दांपत्य जीवन के लिए काफी नुकसानदेह होती है।
पति-पत्नी के मध्य प्रेमाकर्षण बने रहने से दोनों के स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। पत्नी के शरीर में एस्ट्रोजन नामक हारमोन का अधिक स्राव होता है जिससे उसकी सेहत बेहतर होती है। प्रेमाकर्षण से पति के शरीर में क्षारीय पदार्थ की वृद्धि होती है जो उसके मानसिक और शारीरिक शक्ति में वृद्धि करने के लिए हितकर होता है। प्रेमपूर्ण समागम से दोनों के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता की वृद्धि होती है। यदि आप उपरोक्त बातों को ध्यान में रखकर आचरण करेगें तो दांपत्य जीवन में सदा मधुरता बनी रहेगी और परिवार का वातावरण सदा सुखकर रहेगा।
- गोविंद कृष्ण गुप्ता

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