यौन शोषण में कौन शोषित? कौन शोषक?

यौन शोषण में कौन शोषित? कौन शोषक?

आए दिन हमारे संचार माध्यमों में देश के विविध भागों में हो रहे यौन शोषण की सनसनीदार खबरों को खंडश: प्रकाशित-प्रसारित करने में होड़ सी लग गई है। इस के पीछे उन का क्या उद्देश्य होगा? यह उद्देश्य हो सकता है कि बाजारीकरण और वैश्वीकरण के कुप्रभावों से हमारे जीवन मूल्यों में हो रही च्युति की ओर पाठकों दर्शकों का ध्यान आकृष्ट कर के ऐसी च्युति से बचने के उपायों पर सोचने के लिए प्रेरित किया जाए।
यह दुरूद्देश्य भी हो सकता है कि ऐसी सनसनीखेज खबरों के माध्यम से अपने ग्राहकों की कुत्सित मनोवृत्तियों को तृप्त करके ग्राहकों की संख्या बढ़ाई जाए। जो भी हो, इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि हमारे वर्तमान भारतीय समाज में यौन शोषण की घटनाएं दिन-दुगुनी और रात चौगुनी बढ़ रही हैं। रात का अंधकार दिन के प्रकाश की अपेक्षा ऐसे कुकर्मों के लिए अनुकूल आलंबन और उद्दीपन उपस्थित कर देता है।
इन प्रकरणों का विश्लेषण करने पर यह बताना कठिन हो जाता है कि ऐसी घटनाओं में शोषक कौन है और शोषित कौन। प्राय: यौन शोषण के हर प्रकरण को स्त्री-उत्पीडऩ के रूप में चित्रित किया जाता है और यही सिद्ध करने का प्रयत्न जाने अनजाने किया जाता है कि हर प्रकरण में पुरूष उत्पीड़क व शोषक हैं और स्त्री उत्पीडि़त और शोषित पर यह सामान्यीकरण क्या हर मामले में ठीक बैठता है? अपनी बात स्पष्ट करने के लिए हाल ही में आई कुछ खबरों की ओर इंगित करना चाहूंगा।
कॉलेज की एक अन्य छात्र को आबकारी विभाग के एक अधेड़ अफसर के साथ अवैध यौन संबंध की स्थिति में पुलिस द्वारा रंगे हाथों पकड़ लिया जाता है। पूछताछ कर पता चलता है कि अफसर ने लड़की को नवीनतम माडल का मोबाइल फोन और स्कूटर दे रखा है। जब कभी किसी होटल से मोबाइल पर अफसर का बुलावा आता है तब यह स्कूटर पर तुरन्त वहां पहुंच जाती है। यहां शोषित कौन? शोषक कौन?
एक लड़की जब ऐसे मामले में पकड़ी जाती है तो पुलिस को बताती है कि तीन चार वर्ष पूर्व एक मंत्री ने तीन बार उसके साथ अभद्र व्यवहार किया था, जब उस की आयु केवल सोलह वर्ष की थी। यह पूछने पर कि तुमने न्यायालय में इस को झूठा बयान क्यों बताया था, वह कहती है- अब तक मुझे मंत्री के बंधुजनों से माहवार चार हजार रूपए मिलते थे। अब वह रकम बंद कर दी गई है, इसलिए अब सच्ची बात बता रही हूं। यहां शोषक कौन? शोषित कौन?
- के.जी. बालकृष्ण पिल्लै

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