इश्क के चक्कर में पथभ्रष्ट होती युवा पीढ़ी

इश्क के चक्कर में पथभ्रष्ट होती युवा पीढ़ी

हिंदी फिल्मों में दिखाई जाने वाली प्रेम कहानियों ने आज की युवा पीढ़ी के दिलोदिमाग पर अच्छा खासा प्रभाव जमा लिया है। यही वजह है कि आज कॉलेज तो कॉलेज, स्कूलों में पढऩे वाले कम उम्र के लड़के-लड़कियां तक अपने हम उम्र विपरीतलिंगी सहपाठियों से इश्क फरमाने लगे हैं।
यह इश्क का भूत हमारी युवा पीढ़ी पर इस कदर हावी हो गया है और उनकी मानसिकता ऐसी बन गयी है कि उन्हें लगने लगा है कि उन्हें भी अपने विपरीतलिंगी से प्यार फरमाना ही चाहिए। उन्हें भी एक ऐसा विपरीतलिंगी चाहिए जो उनकी बांहों में झूले, उनके होंठों को चूमे, गालों पर चुम्बन करे और बाहों में भींच कर उसे अलौकिक सुख से सराबोर कर दे।
विपरीत लिंगी को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए युवक-युवतियों द्वारा तरह-तरह की फिल्मी तरकीबें भी खूब प्रयोग में लाई जा रही हैं। लड़कियां अश्लील से अश्लील और उत्तेजक कपड़े पहनने लगी हैं ताकि उनका मनमीत उससे प्रभावित हो और उनकी तरफ खिंचा चला आये। यही नहीं, सड़कों पर, कॉलेजों में सर्वत्र फिल्मी अभिनेत्रियों के स्टाइल में कमर लचका-लचका कर चलती हैं और फिल्मी अंदाज में बातें भी करती हैं। शरीर के उन अंगों, जिन्हें ढक कर, छुपाकर और चुराकर रखना हमारे भारतीय समाज की मान्यता है, को बड़ी ही अश्लीलता से गर्व के साथ प्रदर्शन करती हैं।
इस मामले में युवक भी पीछे नहीं हैं। वे भी तरह-तरह की फिल्मी तरकीबें इस्तेमाल कर रहे हैं। फिल्मी अभिनेताओं के अंदाज में चलना फिरना, मटकना, बाइक चलाना, सीटी बजाना, बाहें उठाकर अंगड़ाई लेना, इतरा इतरा कर बालों पर हाथ फेरना, अश्लील कमेंटस देना आदि-आदि जितना संभव हो, सब कुछ कर रहे हैं। उन्हें यहां तक ध्यान नहीं रहता कि वे स्कूल कॉलेज में पढऩे आये हैं न कि इश्क फरमाने।
आये दिन इस प्यार के चक्कर के परिणामस्वरूप ही हमारे समाज में कई प्रकार की विकृतियां आ गयी हैं। लड़कियां प्यार में बहक कर कुंआरी मां बन रही हैं जिसके परिणामस्वरूप उन्हें आत्महत्या का दामन थामना पड़ रहा है। इस प्यार के चक्कर में पड़कर ही लड़कियां कोठे तक पहुंचकर जी रही हैं, कालगर्ल बन रही हैं, बलात्कार की शिकार हो रही हैं। युवक लड़की के बाप-भाई के हाथों से मौत के मुंह में जा रहे हैं।
यही नहीं, लड़के-लड़कियों के मां-बाप भाई-बहन तक सबको कई प्रकार की शारीरिक मानसिक प्रताडऩा को झेलना पड़ रहा है। परीक्षा में असफल होने के बाद जब युवा को गलती का एहसास होता है कि प्रेम के चक्कर में उसने अपना बहुमूल्य समय खो दिया और आज परीक्षा में असफल हो गया और तब उन्हें अपने मां-बाप के सपनों का ख्याल आता है। नतीजन उन्हें पश्चाताप होता है और वे आत्महत्या का रास्ता तक अख्तियार कर लेते हैं।
सोचने वाली बात है कि युवक व युवतियां जो समय प्रेम के चक्कर में उलझे रहने में बड़ी ही तन्मयता से गंवा रहे हैं, काश! उन बहुमूल्य क्षणों का उपयोग अपनी पढ़ाई में लगाते तो कितना अच्छा होता? आज का युग कितना भी प्रतिस्पर्धा और प्रतियोगिता का क्यों न हो, उन युवक-युवतियों को मनोवांछित नौकरी अथवा मनोवांछित सफलता प्राप्त करने से कौन रोक सकता है जो अपने बहुमूल्य समय का सदुपयोग अपनी पढ़ाई में कर रहे हैं।
वास्तव में यह बहुमूल्य समय पढ़ाई के लिए है। इसे पढ़ाई में लगाया जाये, परीक्षा में अच्छे अंक लाने में लाया जाये। प्यार और इश्क फरमाने के लिए तो सारी उम्र पड़ी है पर यह बहुमूल्य समय जिसमें आप इश्क फरमा रहे हैं, एक बार हाथ से निकल गया तो फिर वापस लौटकर नहीं आयेगा और इन बहुमूल्य क्षणों की महत्ता युवाओं को तब ज्ञात होगी, जब यह समय काफी पीछे छूट चुका होगा और सामने अंधकारमय भविष्य और आंखों में पश्चाताप के आंसू शेष होंगे। तब लाख सिर पीटकर भी कुछ नहीं किया जा सकता।
आपके कॉलेज में, स्कूल में कुछ ऐसे भी छात्र होंगे जो अपना सारा समय पढ़ाई में लगाते हैं क्योंकि वे समय की महत्ता को समझते हैं पर आप अपना समय लगा रहे हैं-इश्क फरमाने में। जरा सोचिए, आने वाले कल में आप अपने को सफल बनायेंगे या वह? वह अपनी मंजिल पायेगा या आप? निस्संदेह ही वह!
युवा पीढ़ी को चाहिए कि वे इस प्यार-प्यार के चक्कर में न पड़ें। उसके लिए तो सारी उम्र पड़ी है। पहले अपने आपको कामयाब बनायें। फिर देखें, आपके सामने एक से बढ़कर एक हसीं चेहरों की लाइन लग जायेगी जिनकी आंखों में प्यार का अथाह सागर लहरा रहा होगा।
जरूरत इस बात की है कि आप प्रेम के मकडज़ाल में फंसकर, अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें और स्वयं को सफल बनायें। पहले पढ़ाई करें, सफलता पायें, फिर प्यार फरमायें और तब देखें जिंदगी कितनी रंगीन है।
- प्रेम कुमार

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