वर्किंग कपल्स का है जमाना

वर्किंग कपल्स का है जमाना

आज की जरूरत है पति पत्नी दोनों का कमाऊ होना। डबल इनकम से स्टैंडर्ड तो बढिय़ा होता जाता है लेकिन इसके साथ जीवन में मुश्किलें और जटिलताएं भी कम नहीं होती, खासकर उस सूरत में जब पति पत्नी अलग-अलग शहरों में जॉब कर रहे हों। कभी वे वीकएंड पर मिलते हैं, कभी महीने या फिर महीनों में। ऐसे में जब उनमें इंटरएक्शन ही नहीं हो पाता तो वे कैसे एक दूसरे को समझ सकते हैं, कैसे उनमें प्यार बढ़ सकता है? जगह के फासले दिलों में भी फासले पैदा कर देते हैं।
वे एक दूसरे के मन, उनकी साइकोलॉजी व माइंडसेट से अनभिज्ञ अपनी ही आशाओं व अपेक्षाओं के घेरे में कैद होकर रह जाते हैं। ऐसे में जब एक साथी उन्हें पूर्ण नहीं कर पाता है तो दूसरे साथी के अंतर में क्षोभ पलने लगता है। वो इसे अपनी तौहीन समझ डिप्रेस्ड रहने लगता है या फिर किसी दूसरे की बांहों में खुशियां तलाशने लगता है।
प्यार बढ़ाने के लिए साथ रहना और लगातार इंटरएक्ट करना जरूरी है। आज ज्यादातर शादियां समझौतों पर टिकी हैं। लांग डिस्टेंस मैरिज चलती रहे, इसके लिये दोनों पार्टनर्स में परिपक्वता और समझदारी की जरूरत है। उन्हें अपने से परे साथी की मुश्किलों व प्रॉब्लम्स को भी समझना पड़ेगा।
समाधान
जब भी मिलें, एक दूसरे को क्वालिटी टाइम दें। साथ गुजारे खूबसूरत पल प्यार का अहसास जगाये रखेंगे।
फोन द्वारा-निरंतर संपर्क बनाये रखें।
छुट्टियां एडवांस में प्लान कर लें ताकि आप समय का भरपूर फायदा उठा सकें।
सैक्स विवाह का आधारस्तंभ है। आज के लाइफ स्टाइल में कपल्स को सैक्स के लिये फुर्सत ही नहीं मिल पाती है। शरीर की अपनी डिमांड्स जब पूरी नहीं हो पाती तो कई तरह की मन और शरीर से जुड़ी प्रॉब्लम्स होने लगती हैं।
अपनी शारीरिक जरूरत की अनदेखी न करें। इसे खूबसूरतों अहसास मानकर चलें।
पार्टनर से संकोच झिझक कैसी? उनसे इस विषय पर खुलकर बात करें। उनकी इच्छाओं को जानें, अपनी उन्हें बताएं और दोनों को जो सूट करे, वक्त तय करें।
ज्यादा वक्त न भी मिलें तो भी जितना मिले, उसे भरपूर एंजाय करें। उन्हें ऐसे यादगार पल बनायें जो दूरी होने पर भी यादों से ही आपको खुशी से सराबोर करते रहें।
अपनी सैक्स अपील की ओर सचेत रहें। जो बातें इसकी एंटी होती हैं, उनसे बचें। गुस्से में भी कर्कश स्वर में न बोलें। सुबह उठते ही अपने को शीशे में देखने की आदत डाल लें। अपने लुक्स की ओर लापरवाही न बरतें। रंग रूप कुदरत से विरासत में मिलता है। उसे संवारना हमारे अपने हाथ है। ग्रेस, डिसेंसी व अच्छे मैनर्स सैक्स अपील बढ़ाते हैं। तनाव से बचें। न टेंशन दें, न टेंशन लें।
विवाहोपरांत फैमिली बढ़ाना हर कपल का सपना होता है लेकिन पत्नी भी जब वर्किंग हो तो बच्चे की देखरेख की समस्या सामने आती है, इसलिए वे बच्चा प्लान नहीं कर पाते। जो बच्चे की अहमियत समझ बच्चे को जन्म देते हैं, उन्हें इस बात को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि बच्चे की ठीक से परवरिश हो, यह उनकी प्राथमिकता है, जॉब नहीं।
समाधान
बच्चा किसी भी तरह से निगलेक्ट न हो, यह सोचकर ही बच्चे को संसार में लाएं। बच्चे के साथ अन्याय गुनाह नहीं बल्कि पाप समझा जाना चाहिए।
बच्चा जब कुछ बड़ा हो जाए तभी आप जॉब के लिए सोचें। आजकल बड़ी-बड़ी कंपनियां 'वेलकम बैक मॉम' अभियान चलाए उनका अनुभव देखते हुए उन्हें सहर्ष काम पर रख रही हैं। इसके अलावा होम फ्रैंडली ऑफिस का चलन भी है आजकल।
विवाहेत्तर संबंध आज तलाक का अहम कारण हैं। ऑफिसों में उनका पनपना एक आम नेचरल बात है। पति के दूर रहने पर साथ-साथ कई घंटे प्रतिदिन काम करते हुए किसी कलीग के साथ रोमांस कोई शॉकिंग मैटर नहीं। तनाव दूर करने, जीवन में ऊब से बचने को एडवेंचर की तलाश ही उन्हें ऐसे अफेयर्स की ओर ले जाती है।
साइकोलॉजिस्ट्स की मानें तो ऑफिस, वर्क प्लेसेज आदि में ऐसे फ्लिंग्स जीवन में रस घोलते हैं। ऊर्जा का संचार कर जीवन जीवंतता से भर देते हैं लेकिन आगे चलकर इनका क्या परिणाम होता है या हो सकता है?
समाधान
इट्स लाइक ड्रग एडिक्शन, थोड़ी देर का मज़ा लेकिन जीवन भर के लिए अभिशाप। बोरियत दूर करने का यह उपाय बर्बादी का कारण बन जाता है।
ऐसे रोमांस मन के दायरे तक ही सीमित रखें और उसे केवल वक्ती खुमार मानकर चलें।
शादी का मजा दोनों की एक दूसरे के प्रति वफादारी में ही है।
कम्युनिकेशन लगातार बना रहे ताकि पार्टनर को बहकने का मौका न मिले। उनके प्रति सेंसिटिव बनें। उनकी प्रॉब्लम शेयर करें।
अंत में मगर अहम मैटर है आर्थिक मुद्दे। बीबी का जॉब करना आज स्टैंडर्ड मेंटेन करने और महंगाई से निपटने के लिए जरूरी हो गया है। कभी-कभी दोनों में से किसी एक का या दोनों का खर्चीला होना घर का बजट बिगाड़ देता है। पैसे की तंगी घर में क्लेश पैदा कर देती है। उस पर दुनियां भर के जरूरी खर्च। उधार की जिंदगी अपने साथ असुरक्षा लिए होती है।
बजट समझदारी से बनायें और उसके दायरे में चलें। इसमें दोनों की इन्वॉल्वमेंट हो। आपस में क्लीन डीलिंग्स रहें। कोई दुराव छुपाव न हो, तभी रिश्ता स्मूथ चलेगा। खर्च प्रायर्टी देखकर तय करें। जरूरतें असीम हैं और पैसा सीमित, यह जानते हुए एडजस्टमेंट करके चलें।
- उषा जैन शीरीं

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