शीत ऋतु में आवश्यक है त्वचा की देखभाल

शीत ऋतु में आवश्यक है त्वचा की देखभाल

सर्दी के आते ही त्वचा संबंधी अनेक समस्याओं का आगमन भी होने लग जाता है। थोड़ी-सी सावधानी व देखभाल से त्वचा की परेशानियों से बचा जा सकता हैं। ठंड के मौसम में विशेष रूप से त्वचा को शुष्क होने से बचाना चाहिए। इसके लिए आवश्यक सफाई एवं देखभाल बहुत ही जरूरी हैं।
आज की महिलाएं घर की चारदीवारी में कैद होकर नहीं रहतीं बल्कि उन्हें किसी न किसी काम से प्रतिदिन घर से बाहर निकलना ही पड़ता है। परिणाम स्वरूप उनकी त्वचा पर धूल व मिट्टी अवश्य ही जमती है। इसके लिए आवश्यक है कि प्रतिदिन शरीर को स्नान करते समय रगड़-रगड़ कर साफ किया जाए।
पर्यावरण व प्रदूषण के प्रभाव को समाप्त करने के लिए हर्बल क्लीजिंग मिल्क से नियमित रूप से त्वचा की सफाई करते रहना चाहिए। उसके बाद फेस वाश से चेहरे को धोना चाहिए। इस सब कामों के लिए गुनगुने पानी का होना अति आवश्यक है। अत्यधिक गर्म या अत्यंत ठंडे पानी के प्रयोग से बचना नितान्त आवश्यक है। इससे त्वचा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
त्वचा की सफाई करने के बाद मॉश्चराइजर लगाकर हौले-हौले त्वचा की मसाज करें। इससे त्वचा की नमी बरकरार रहती है। यह त्वचा की नमी का पोषक होता है। इससे त्वचा कोमल, कांतिमय तथा लावण्यमयी बनी रहती है।
चेहरे को सुन्दर व कोमल बनाये रखने के लिए तुलसी की पत्तियों को थोड़ी-सी हल्दी मिलाकर पीस लीजिए। इस मिश्रण को प्रतिदिन सुबह-शाम दो बार चेहरे पर लगाएं तथा आधा घंटा लगा रहने दें। इसके बाद गुनगुने पानी से धो लीजिए। आपके चेहरे की रौनक बढ़ती चली जाएगी।
रात में सोते समय नाइट क्रीम का उपयोग अवश्य करें। इसमें विटामिन भरपूर मात्र में पाये जाते हैं। इस क्रीम का उपयोग झुर्रियों तथा बढ़ती उम्र के प्रभाव को भी रोकने में सहायक सि होता है। इस क्रीम को बनाने के लिए डेढ़ चम्मच बादाम का तेल लीजिए और उसमें 30 ग्राम लेनोलिन मिलाकर खूब अच्छी तरह फेंट लीजिए। इसको शरीर की सम्पूर्ण त्वचा पर लगाकर कोमल बनाये रखा जा सकता है।
घरेलू पैक बनाकर सप्ताह में कम से कम एक बार त्वचा की सफाई अवश्य करनी चाहिए। इसके लिये चोकर, जई का आटा, दूध और 2-3 बूद नींबू का रस लेकर सबको मिला लीजिए। इसको त्वचा पर नियमित रूप से लगाते रहने पर त्वचा बेहतर हो जाती है। यह मिश्रण त्वचा के रोमछिद्रों को साफ करता है तथा अन्दर छिपे धूल-मिट्टी तक को बाहर निकालने में सहायता होता है। इस मिश्रण के प्रयोग से त्वचा की मृत कोशिकाएं भी त्वचा से अलग हो जाती हैं। मृत कोशिकाएं पपड़ी के समान होती हैं। इसी कारण वे बेजान-सी दिखाई देती हैं।
त्वचा की कांति को बनाये रखने के लिए घरेलू फेस मास्क लगाना चाहिए। इसके लिये मुल्तानी मिट्टी में जईं के आटे तथा शहद को मिलाकर ताजी क्रीम के समान पेस्ट बना लीजिए। इस मास्क का प्रयोग सप्ताह में एक बार अवश्य करना चाहिए। सोने से पहले आंखों पर आई-कान्टूर क्रीम अवश्य लगा लीजिए।
जाड़े के मौसम में घरेलू काम करते समय जब भी आप अपने हाथों को धोएं तो धोने के बाद हैंडक्रीम अवश्य लगा लें। इससे हाथों की त्वचा मुलायम व नम बनी रहती है। हाथ धुलने के बाद इसका नियमत: उपयोग हो सके, इसके लिए इस क्रीम को बाथरूम एवं किचन में अवश्य रख लें।
सप्ताह में एक बार मेनीक्योर अवश्य करना चाहिए। इससे नाखूनों की सफाई हो जाती है। हाथों की मालिश करने के लिए मलाई में नींबू का रस मिलाकर उसका उपयोग कीजिए। जाड़े के मौसम में गुलाब जल में ग्लिसरीन एवं नींबू का रस मिलाकर हाथों पर लगाने से हाथ मुलायम बने रहते हैं।
फटे हुए हाथों पर अधिक पोषण प्रदान करने वाली क्रीमों को लगाइये। झुर्रियों के उपचार के लिए गरम तौलिया उपचार श्रेयस्कर होता है। इससे त्वचा को भाप मिलती है और बन्द रोमछिद्र खुल जाते हैं। इसके बाद जैतून के तेल में ताजा नींबू का रस मिलाकर उसे रोज चेहरे पर लगाइये। इसे चेहरे पर एक घंटा लगा रहने दीजिए, फिर चेहरे को पानी से धो डालिए।
जैतून और बादाम का तेल तथा बॉडी आयल का मिश्रण शरीर के लिये सर्वोत्तम होता है। पूरे शरीर की त्वचा पर से मृत कोशिकाएं हटाने के लिये बॉडी स्क्रब से शरीर को रगड़कर साफ कर लें। इससे त्वचा मुलायम बनेगी।
जाड़े के मौसम में होंठ रूखे हो जाते हैं तथा फटने लगते हैं। होंठों की सुरक्षा के लिए दिन भर में 4-5 बार लिपस्टिक या लिप ग्लास का प्रयोग अवश्य ही करना चाहिए। ताजी क्रीम, शहद या किसी भी पौष्टिक क्रीम से होंठों की हल्की-हल्की मालिश अवश्य करते रहना चाहिए।
जाड़े के मौसम में स्त्रियों को अपने स्तनों की सुरक्षा का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। इस मौसम में स्तन चरचराहट युक्त होकर शिथिल हो जाते हैं। शहद में माजूफल को घिसकर वक्षस्थल पर लेप करते रहना फायदेमन्द होता है। स्नान करने से पहले स्तनों पर जैतून का तेल (आलिव ऑयल) या बादाम रोगन को भैंस के दूध में फेंटकर वक्षस्थल पर मालिश करते रहना चाहिए।
- पूनम दिनकर

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