युवा दंपतियों में विकर्षण क्यों?

युवा दंपतियों में विकर्षण क्यों?

विवाहित जीवन में यौन-संबंधों का उतना ही महत्त्व है जितना शरीर के लिए भोजन का। जिस तरह शरीर बिना भोजन के अधिक दिनों तक जीवित नहीं रह सकता, ठीक उसी प्रकार यौन विहीन विवाहित जीवन नीरस व बेमजा हो जाता है।
मानव के जीवन में या विवाहित जीवन में यौन कार्य का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह मधुर संबंध दो भिन्न लिंगियों में अनूठा आकर्षण उत्पन्न करता है। यौन संबंधों के सही संपादन से दंपतियों को पूर्णता प्राप्त होती है और इसकी कोमल अनुभूति एक-दूसरे को बांधे रखती है।
लेकिन यौन संबंध विवाहित जीवन का आकर्षण होने पर भी कई युवा दंपतियों में अचानक ऐसा प्रभाव उत्पन्न हो जाता है कि वे एक दूसरे से दूर रहने में ही आत्मिक सुख का अनुभव करने लगते हैं। पत्नी थकावट का बहाना करके पति की यौन इच्छा को टालने लगती है या बच्चों को सुलाने का बहाना करके पति को तन्हा छोड़ देती है या पति से बेबात झगड़ा कर दूर रहने का प्रयास करती है।
दूसरी ओर पति पत्नी से कटने के लिए दफ्तर से सीधे घर न आकर अपने यार-दोस्तों के साथ मौज-मस्ती करता है और देर रात घर को लौटता है और थकान का बहाना कर अलग सोने का प्रयत्न करता है। यह स्थिति विवाहित दंपतियों के लिए कतई अच्छी नहीं कही जा सकती।
कभी-कभी विवाहित पुरूषों के जीवन में ऐसे क्षण आ जाते हैं कि वे अपनी पत्नी से कटे-कटे रहने लगते हैं। जिस पत्नी को कभी वे अपनी आंखों से ओझल नहीं होने देते थे, वही पति पत्नी के सेक्स निमंत्रण को ठुकरा देता है। ऐसे दंपति जो सेक्स के प्रति ज्यादा उत्सुक रहते हैं, वे ही अचानक कहने लगते हैं कि अब उन्हें यौन कार्य के
संपादन में जरा भी दिलचस्पी नहीं रह गई है। आखिर क्यों होता है ऐसा। क्यों अचानक दंपतियों के मन में सेक्स व यौन संबंधों के प्रति विरक्ति पैदा हो जाती है।
यौन संबंधों के प्रति विकर्षण पैदा होने से उसका बुरा असर विवाहित जीवन पर आवश्यक रूप से पड़ता है। ऐसी परिस्थिति में पति-पत्नी के जीवन में एक दूरी सी बन जाती है। यह विकर्षण धीरे-धीरे दोनों को ठण्डा बना देता है।
अक्सर पतियों को यह शिकायत रहती है कि 'मेरी पत्नी के व्यवहार में अचानक परिवर्तन आ गया है। यौन संबंध बनाने की इच्छा होने पर वह बहुत नाज-नखरे करती है। इन दिनों प्राय: वह मेरी यौन इच्छा को साफ ठुकरा देती है या बिस्तर में मेरे साथ बेजान-सी पड़ी रहती है। उसकी ऐसी हरकतों से मेरे मन में उसके और सेक्स के प्रति दिलचस्पी खत्म होती जा रही है। जाहिर है कि पत्नी का गैर जिम्मेदाराना व्यवहार पति को दिन-ब दिन नपुंसकता की ओर धकेल देता है। हमारा समाज पुरूष प्रधान समाज है और यहां पुरूषों के संरक्षण में ही नारी का समुचित विकास होता है। ऐसी भावना से ग्रस्त पुरूष समाज अपने सेक्स संबंधों को निभाने में, अपनी पत्नी के रूखे व कठोर व्यवहार को सहन नहीं कर पाता। उसके 'अहं' को चोट लगती है और वह अपनी रूखी पत्नी से कटने लगता है। अक्सर देखने में आता है कि इस तरह जो पति अपनी पत्नी का स्पर्श पाकर भी उत्तेजित नहीं होते, घर से बाहर अन्य युवती से यौन संबंध बनाकर युवती को तो पूर्ण संतुष्टि प्रदान करते ही हैं, स्वयं भी पूर्ण काम तृप्ति का आनंद प्राप्त करते हैं।
प्रकृति ने युवक-युवती को एक-दूसरे का पूरक बनाकर भेजा है। फिर भी यौन के मामले में युवक ही युवती पर हावी रहता है। वह चाहता है कि उसकी सहचरी उसकी इच्छाओं के अनुरूप चले, उसके अनुकूल कार्य करे, लेकिन उसके ऐसा न करने से पुरूष के अहं को चोट पहुंचना स्वाभाविक ही है। यौन-संबंधों का मानव जीवन में एक अलग ही महत्त्व है। जब दो विपरीत लिंगी एक कमरे में एक साथ अकेले हों तो मन स्वाभाविक रूप से सेक्स संबंधों की कामना करने लगता है। ऐसी स्थिति में जब एक का व्यवहार असहयोगात्मक रहा तो वातावरण तनावपूर्ण हो जाना स्वाभाविक है।
बहुत सी पत्नियों में अपने पति के हर अच्छे या बुरे काम में मीन मेख निकालने की आदत होती है। कई पत्नियां ऐसी भी होती हैं जो यौन संबंधों का पूरा आनंद उठाती हैं पर कभी अपने पति पर यह जाहिर नहीं करती कि वे तृप्त हुई हैं और अतृप्त रह जाने का नाटक करके अपने पति को हीन भावना से ग्रस्त बना देती हैं। यौन संबंध बनाते समय पुरूष अपनी पत्नी को समर्पिता के रूप में देखना चाहता है। वह ऐसी पत्नी को कदापि सहन नहीं कर पाता जो उसकी बगल में लेटकर उसकी क्रियाओं की आलोचना करें, उसकी बुराइयां गिनाएं या उसकी यौन इच्छा को भूखे भेडिय़े की आदत कहकर उसके उत्साह, उमंग और उत्तेजना को समाप्त करने की कोशिश करें। सहवास के क्षण ऐसे होते हैं जब पति अपनी पत्नी के प्रति काफी उदार होता है। यदि उसे अपनी पत्नी का पूर्ण सहयोग मिले तो वह केवल अपनी ही यौन तृष्टि पर कायम न रहकर अपनी पत्नी को भी पूर्ण यौन सुख प्रदान करता है और वैवाहिक संबंधों को ईमानदारीपूर्वक निभाता है। निष्कर्षत: युवतियों को सफल यौन संबंध कायम कर रखने में अपना भरपूर सहयोग देना चाहिए। अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारीपूर्वक निभाने का प्रयत्न करना चाहिए। सहवास के दौरान अपने पति के साथ कैसे वे पूर्ण सहयोग दे सकती हैं इसका उन्हें पूर्ण ज्ञान अवश्य होना चाहिए। सेक्स को अपनी जरूरत समझकर पति की इच्छाओं को पूरी करने वाली पत्नियों के पति में कभी भी ठंडापन नहीं आ सकता।
-डी.के. रोबिन

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