बच्चे की तुलना करने से पहले सोचें

बच्चे की तुलना करने से पहले सोचें

शिक्षा जगत की मूल्यांकन पद्धति में बहुत सी खामियां हैं जिसकी वजह से प्रतिभावान विद्यार्थी को भी कम अंक मिलते हैं। कम अंक आने पर बच्चों के साथ सहानुभूति से पेश आएं, उसकी आलोचना करने में ही न लगे रहें।
अधिकतर माता-पिता ऐसा करते हैं। बच्चे के कम अंक आने पर वे मेहमानों, पड़ोसियों के समाने बच्चे की आलोचना करते हैं। वे अपने बच्चे के सामने उन बच्चों की तारीफ करते नहीं थकते हैं जो प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होते हैं।
माता-पिता का यह रवैया अनुचित है। यदि बच्चा लापरवाह है, पढ़ाई लिखाई में ध्यान नहीं देता है तो इस तरह के व्यवहार को उचित माना जा सकता है पर उन बच्चों से ऐसा बुरा बरताव नहीं करना चाहिए जो पढ़ाई-लिखाई में अच्छे होते हैं और अपनी पढ़ाई को जो गंभीरता से लेते हैं। हर माता-पिता को यह बात अच्छी तरह मालूम रहती है कि उसका बच्चा पढ़ाई में कैसा है। वह घर में पढ़ाई करता है या नहीं, साथ ही स्कूल में किस परिस्थिति में वह पढ़ाई करता है। इन सब बातों की जानकारी माता-पिता को होनी भी चाहिए।
बच्चे की अंक सूची में कम अंक देख कर एक दम से बच्चे के ऊपर बिगडऩे की अपेक्षा इस बात पर ध्यान दीजिए कि बच्चे के कम अंक क्यों आए। कोई आवश्यक नहीं है कि बच्चे की कम पढ़ाई या बच्चे की लापरवाही के कारण अंक कम आये हों। ऐसा भी हो सकता है कि बच्चे का पेपर अच्छा हुआ हो और उसे कम अंक मिले हों।
बच्चे की आलोचना या किसी बच्चे से उसकी तुलना के पूर्व हमारी परीक्षा पद्धति की ओर भी एक बार गौर करना आवश्यक हो जाता है। हमारी शिक्षा पद्धति या परीक्षा पद्धति में कई दोष भी हैं जिसकी वजह से एक प्रतिभावान विद्यार्थी अच्छा पेपर बनाकर भी अच्छे अंक से वंचित हो जाता है। जैसे:-
उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन अलग अलग शिक्षक करते हैं। इसमें कई शिक्षक दयालु किस्म के होते हैं, जो परीक्षार्थी को अच्छे अंक दे देते हैं। कुछ शिक्षक बहुत कठोर होते हैं जो कड़ाई से नंबर देते हैं।
मूल्यांकन थोक के भाव से होता है। मूल्यांकन करने वाला शिक्षक अधिक पारिश्रमिक लेने की चाह में अधिक से अधिक मूल्यांकन करने की कोशिश करता है। अपने इस प्रयास में वह उत्तर पुस्तिका को पढ़ कर समय बरबाद नहीं करना चाहता। इस तरह वह फटाफट अंक देते हुए आगे बढ़ जाता है।
कई मूल्यांकनकर्ता ऐसे भी होते हैं जो माडल उत्तर पुस्तिका में लिखे उत्तर के एक दम अनुरूप होने पर ही परीक्षार्थी को अंक देते हैं । यदि परीक्षार्थी उसी तरह का थोड़ा अलग उत्तर लिख देता है तो मूल्यांकन कर्ता उसे काट देता है। यहां पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि सभी शिक्षक शिक्षकीय कार्य के लायक नहीं होते जैसे-हवा का पर्यायवाची लिखने को आया है। माडल उत्तर पुस्तिका में वायु, पवन, समीर दिया है। एक छात्र मारूत लिख देता है तो माडल उत्तर पुस्तिका मिलाकर जांचने वाला मूल्यांकन कर्ता उसे गलत सिद्ध कर देता है। इस तरह उत्तर सही होते हुए भी उस परीक्षार्थी को अंक नहीं मिलते।
ऐसे बहुत से कारण हैं, जिसकी वजह से परीक्षार्थी को कभी-कभी कम अंक मिलते हैं पर मेरा मतलब यह नहीं है कि कम अंक प्राप्त करने वाले हर परीक्षार्थी के साथ ऐसा होता है। जो विद्यार्थी पढ़ाई में कमजोर हैं, जो पढ़ाई के प्रति लापरवाही बरतते हैं, उनके लिए उनकी लापरवाही का ही कारण है।
यदि परीक्षा में किसी बच्चे के कम अंक आते हैं तो एक दम से उसे दोषी ठहराते हुए उसकी आलोचना न करें। साथ ही उसके सामने अच्छे अंक पाने वाले किसी अन्य बच्चे की इतनी प्रशंसा न कर दें कि आपके बच्चे में हीन भावना बैठ जाए। यह मत भूलिए कि आपके बच्चे में भी प्रतिभा है, वह भी एक काबिल विद्यार्थी है।
- नरेंद्र देवांगन

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