नौकरी पेशा महिला का जीवन आसान नहीं

नौकरी पेशा महिला का जीवन आसान नहीं

लड़कियां पढ़ाई में आजकल लड़कों से बाजी मार रही हैं। उनके लिए नौकरी पाना भी आसान है। कई बार वे पति से अधिक कमा रही होती हैं। नौकरी से उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है। आर्थिक स्वतंत्रता कभी-कभी उन्हें मगरूर बना देती है। यह सही है कि उन्हें अपने पर ज्यादती नहीं होने देनी चाहिए। ऐसे में उन्हें मुकाबला करने का पूरा हक है लेकिन अगर वे अपनी कमाई को लेकर घमंड करती हैं और अपने को घर में सब से सुपीरियर समझने लगती हैं तो घर में कलह होनी शुरू हो जाती है जिसका कोई अंत नहीं होता।
दांपत्य में सुख, शांति व सामंजस्य बना रहे, इसलिए स्त्री को विनम्रता अपनाकर चलना चाहिए। इसी से वह पुरूष के दिल पर राज कर रानी बनकर रह सकती है? झूठी अकड़, अहंकार और हर समय बराबरी के दावे के साथ नहीं। आज घरेलू औरतों में से भी विनम्रता का गुण लुप्त होता जा रहा है। नौकरीपेशा औरतों को तो खैर एक कठोर मुद्रा का मुखौटा ओढऩा पड़ता है।
जिंदगी की भागदौड़, जीने की जद्दो जहद, कार्य बोझ इन सब के चलते कुछ रूखापन स्त्रियों में आ जाना स्वाभाविक सी बात है। अपनी मजबूरी को समझते हुए उसे इससे संघर्ष करते हुए अपनी संवेदनशीलता बरकरार रखनी होगी क्योंकि इसी पर टिका है उसका और परिवार का सुख।
यहां पति को भी अपनी जिम्मेदारी का अहसास होना जरूरी है। अब वो पारंपरिक पतियों की तरह पत्नी को बैठकर आर्डर नहीं कर सकते क्योंकि वो भी उतनी ही मेहनत करती हैं। शरीर उसका भी थकता है। उसे पति से प्यार और सहानुभूति चाहिए, तभी तो वह दुगनी ऊर्जा और उत्साह से घर बाहर दोनों मोर्चों पर मुस्तैदी से कार्य कर पाएगी।
ऐसे कपल्स के बच्चे भी बहुत जल्दी आत्मनिर्भर बन जाते हैं। उन्हें जितना संभव हो, ज्यादा से ज्यादा वक्त दें। उनकी समस्याओं को समझ पाना उनमें दोस्ताना व्यवहार रख उन्हें गाइड करने से कामकाजी मांओं के लिए और भी ज्यादा जरुरी है क्योंकि जो वक्त वे उन्हें न देकर ऑफिस, मीटिंग आदि में गुजारती हैं, उसका मुआवज़ा भी उन्हें ही देना है।
इसके साथ ही अपनी सेहत और रख रखाव की ओर भी उन्हें पूरा ध्यान देना है। नौकरीपेशा महिला का जीवन आसान नहीं। उसकी कर्मठता हर रोज नई चुनौतियों का सामना करती है। शायद यही उसकी नियति है और यही जीने का ढंग।
- उषा जैन 'शीरीं'

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