नवजात शिशु की देखभाल

नवजात शिशु की देखभाल

'बच्चे को तीन महीने तक साबुन से नहीं नहलाना है, शरीर पर तेल नहीं लगाना है और आंखों में काजल नहीं डालना है', डॉ. सुधीर रचना के नवजात शिशु को अस्पताल से छुट्टी देने से पहले हिदायत देते हुए बोले थे। रचना को जरूरी बातें बताने के बाद वे रचना की सास से बोले थे, 'माताजी, आप विशेष रूप से ध्यान रखें। आपको बच्चे के पास नहीं जाना है। अगर आप चाहती हैं बच्चा दुबारा अस्पताल न आये तो आप बच्चे से दूर रहें।' रचना ने दस दिन पहले बच्चे को जन्म दिया था। जन्म के पांच दिन बाद ही रचना को अपने नवजात शिशु को बच्चों के डॉक्टर सुधीर के अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा था। बच्चे को इंफेक्शन हो गया था। उसकी हालत काफी नाजुक थी। पूरे पांच दिनों तक आई.सी.यू. में रखने के बाद रचना के नवजात शिशु की तबियत में सुधार हुआ था। रचना की सास को खांसी की शिकायत थी। उनका यह रोग पुराना था। खांसी ठीक नहीं होती थी। वह प्राय: खांसती रहती थी। डॉक्टर ने इसलिए उन्हें बच्चे से दूर रहने की सलाह दी थी। नवजात शिशु की देखभाल की विशेष जरूरत होती है। हमारे यहां अभी भी काफी अशिक्षा है। औरतें इस बात को नहीं समझती। नवजात शिशु को गंदगी से बचाने के साथ उस बात का भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि बच्चे को इंफेक्शन न हो जाये। औरतें समझती हैं कि बच्चे को साबुन से नहलाने, तेल लगाने या आंखों में काजल डालने से बच्चे को फायदा होता है। छोटे से बच्चे को साबुन से नहलाने पर कभी कभी साबुन बच्चे के मुंह, आंखों या नाक में चले जाने से फायदे की जगह नुकसान हो जाता है। इसी तरह काजल भी गंदे हाथों से आंखों में लगाया जाए तो बच्चे को नुकसान पहुंचाता है। नवजात शिशु को लाड प्यार करने के चक्कर में दादा-दादी, नाना-नानी या अन्य लोग बच्चों को चूमते हैं या बीमारी से ग्रस्त होने पर भी खिलाते हैं। ऐसा करने पर बच्चे को इंफेक्शन हो सकता है। नवजात शिशु की देखभाल में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
- किशन लाल शर्मा

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