क्या बहुएं ऐसे व्यवहार के लायक हैं?

क्या बहुएं ऐसे व्यवहार के लायक हैं?

शुभा की शादी को 3-4 महीने हुए हैं पर उसका चेहरा देखकर कोई भी अनुमान नहीं लगा सकता कि उसकी शादी अभी हुई होगी। उसके चेहरे पर हमेशा उदासी छाई रहती है।
परन्तु फिर भी उसे जाने क्या-क्या सुनना पड़ता है। कभी घर का कोई कार्य छूट जाए तो सबका यही सवाल होगा, 'शुभा, तुमने यह क्यों नहीं किया।'
वह कहीं घूमने की बात करती है तो उससे उम्मीद की जाती है कि वह घर का प्रत्येक कार्य निपटा कर ही जाए, लेकिन घर का काम निपटाते-निपटाते वह इस कदर थक जाती है कि कहीं जाने का मन ही नहीं होता।
यह स्थिति सिर्फ शुभा की ही नहीं बल्कि अधिकांश लड़कियों को शादी के बाद यही सब सहना पड़ता है।
सवाल यह उठता है कि आखिर बहुओं के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जाता है? इस बारे में श्रीमती किरण कहती हैं, 'सास-ससुर, यह सोचकर ऐसा व्यवहार करते हैं कि बहू उनसे दबकर रहे, उनके अधीन रहे लेकिन इससे क्या होता है कि बहू जब तक सहन करती है, तब तक तो सब ठीक चलता है परंतु वह कितना सहन करेगी।
धीरे-धीरे बहू के मन में ससुराल वालों के खिलाफ आक्रोश बढ़ता जाता है और एक दिन जब उसकी सहनशक्ति खत्म हो जाती है और वह सबकी बातों व तानों का जवाब देने लगती है तो उसे जाने कितनी उपाधियों से विभूषित किया जाता है।
यह वास्तविकता है कि अधिकांश लड़कियों के ससुरालजन यही चाहते हैं कि उनकी बहू उनसे दब कर रहे। इसके लिए वे शुरू से अपना दबदबा कायम रखने के लिए कई तरीके इस्तेमाल करते हैं।
वे उससे अधिक से अधिक काम लेते हैं। कहीं आने-जाने पर पाबन्दियां लगाते हैं व उसे पड़ोसियों से भी नहीं बोलने देते।
अधिकतर घरों में तो यह स्थिति होती है कि बहू अगर अपने पति को महत्त्व देती है, उसका ख्याल रखती है तो यह बात भी उन्हें खलती है।
आखिर लोग क्यों करते हैं ऐसा?
लोग यह क्यों नहीं सोचते कि उनकी बेटी को भी किसी की बहू बनना है। अगर उसके साथ भी ऐसा व्यवहार हो तो क्या उन्हें दुख नहीं होगा। फिर वे यह क्यों नहीं सोचते कि बहू भी किसी की बेटी है।
ससुरालजनों को चाहिए कि वे बहू को भी बेटी की तरह समझें। उसकी भावनाओं को समझते हुए उसे भरपूर प्यार दें।
हर किसी को अलग माहौल में ढलने में समय लगता है। उसे भी कुछ समय दें। उसे अगर कोई काम नहीं आता तो उसे अनाड़ी मत कहें और न ही उसे ताने दें बल्कि उसे प्यार से वह काम सिखाने की कोशिश करें।
बहू का शोषण करने की बजाय उससे सौहार्दपूर्ण व्यवहार करें। उस पर शासन करने की भावना को त्याग देना चाहिए।
अगर आप उपरोक्त बातों को ध्यान में रख कर बहू से व्यवहार करेंगे तो वह आपको भरपूर इज्जत व स्नेह देगी जिससे आपका घर-आंगन खुशियों से महकता रहेगा।
- भाषणा बांसल

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