वर की पहले योग्यता, फिर संपन्नता देखिए

वर की पहले योग्यता, फिर संपन्नता देखिए

विवाह गुड्डे-गुडिय़ों का खेल नहीं बल्कि जीवन का एक संजीदा फैसला होता है इसीलिए बेटी के लिए वर खोजें तो उसे धन के नहीं बल्कि गुणों के हिसाब से परखिए। कहीं ऐसा न हो कि जरा-सी लापरवाही बेटी के पूरे जीवन के लिए जहां अभिशाप बन जाए, वहीं आपके लिए भी मानसिक परेशानी का कारण बने।
हमारी पड़ोसन रंजना की शादी सैनिक अधिकारी से हुई क्योंकि रंजना ने मम्मी से कह रखा था कि मैं यदि शादी करूंगी तो सैनिक अधिकारी से ही। मध्यवर्गीय रंजना के पिता ने सब कुछ बेचकर रंजना की शादी सैनिक अधिकारी से कर दी।
आज हालत यह है कि रंजना के मायके से आई हर चीज उनके नौकर को खाने के लिए दे दी जाती है। घर के लोग मुंह भी नहीं लगाते। ऐसे में रंजना यह भी नहीं कह सकती कि यह साड़ी या मिठाई मुझे दे दीजिए, मैं पहनूंगी या खाऊंगी। मम्मी-पापा ने कितने चाव और कितनी दिक्कत से खरीदी होगी।
अगर सभी दृष्टिकोणों से सोचा जाए तो पति-पत्नी को भावनात्मक रूप से जुडऩा चाहिए जो सुख-दुख में भी विलग होने से बचें पर आज के समाज में ऐसा नहीं हो पाता।
लड़की एवं उनके परिवार वर की चमक-दमक देखकर ही निर्णय लेते हैं कि लड़का हमारी गुडिय़ा के योग्य पति है या नहीं। न उन्हें वर के स्वास्थ्य का ध्यान रहता है, न भावनात्मक रूप से तालमेल का कोई संबंध जिसका परिणाम आज के पत्र-पत्रिकाओं में पढऩे को मिलता है।
वर्तमान समय में जीने के लिए धन आवश्यक है क्योंकि धन के अभाव में मौज-मस्ती या फैशन की वस्तु नहीं खरीदी जा सकती पर यह याद रहे कि यह क्षणभंगुर ही है। जब इसका नशा उतरता है तो हम भावनात्मक रूप से जुडऩा चाहते हैं पर तब तक हम बहुत देर कर चुके होते हैं और वास्तविकता से कोसों दूर होते हैं।
बेटी खुद अपना विवाह तय करे तो बेटी की नजर में यह भी डालें कि क्या तुम्हारे मम्मी-पापा उस समाज में अपना स्थान बना सकते हैं जहां तुम खुद शादी कर रही हो। ऐसी स्थिति में बेटी भी सोच विचार कर ही अपने वर को तलाश करेगी।
'हमारी बेटी सबसे अच्छी है, इसे साधारण पति नहीं, विशेष पति ही चाहिए', ऐसी मानसिकता निश्चय ही गलत साथी का चयन करा सकती है इसलिए वर की पद गरिमा की ओर नहीं, बल्कि उसके व्यक्तित्व और योग्यता की ओर ध्यान दीजिए। वर पक्ष की भौतिक समृद्धि के सपने सजाने की बजाय उसके मानसिक स्तर और आत्मीय गुणों को परखिए।
यदि आपने सही परख की तो साधारण घर में भी आपकी बेटी महारानी बनकर रहेगी, वहीं आपको भी सुख-दुख में सोच देने वाला संबंधी मिलेगा जो जीवन के हर मोड़, हर कदम पर आपके साथ रहेगा।
चमक दमक की चकाचौंध से हटकर रिश्ते वहीं जोड़ें, जहां आपकी बेटी भी खुश और आप भी खुश रहें।
- दिलीप कुमार झा

Share it
Top