माता अपने बच्चों के रोने के अर्थ को समझे

माता अपने बच्चों के रोने के अर्थ को समझे

बच्चा अपने रोने-चीखने से आपको यह बताने की कोशिश कर रहा होता है कि या तो उसे कोई चीज चाहिए या कही कुछ गड़बड़ी है। अपने शैशवकाल के पहले कुछ हफ्तों और महीनों के दौरान शिशु का आपसे संपर्क स्थापित करने का मुख्य तरीका रोना ही होता है।
लगभग 4 महीने की उम्र से बच्चे ज्यादा रोते दिखाई दिए जिनके रोने पर पहले ध्यान नहीं दिया जाता था। बच्चे के रोने के विभिन्न संभावित कारणों में से कुछ ये भी हो सकते हैं
भूख - यह सबसे आम कारण है जिसे आहार देकर आसानी से दूर किया जा सकता है।
दर्द - शायद उसके पेट में हवा भर गई है। उसे उठा कर कंधे पर रखें तथा पीठ थपथपाएं। या शायद अपने भूल से उसे नैपी की पिन चुभो दी है, या हो सकता है उसे बहुत गर्मी या बहुत सर्दी लग रही हो।
वह गीला तो नहीं हो गया - उसकी नैपी देखें। कई बच्चों को गीली या खराब हुई नैपी से परेशानी होती है जिससे वे रोकर आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहते हैं।
एक कारण यह भी - बच्चे जब रोते हैं तो जो उसे प्रेम से लिपटाता है आपके परिवार में, वे रोकर उसे खोजते हैं। एक सर्वे में यह नतीजा निकला है कि परिवार में जब बच्चा रोता है वो हर कोई उसे लेकर रोना बंद कराना चाहता है पर बच्चा इतना समझदार होता है कि वह उसी के पास जा कर रोना बंद कर देता है जिसे वह पसंद करता है।
- जे.के. शास्त्री

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