नारी का उत्पीडऩ नारी द्वारा

नारी का उत्पीडऩ नारी द्वारा

नारी उत्पीडऩ का मतलब है औरत का शारीरिक, मानसिक शोषण करना। नारी उत्पीडऩ के समाचार हमें अखबारों में पढऩे को मिलते रहते हैं जैसे औरत के साथ बलात्कार करना, उसे गाली देना या छींटाकशी करना या छेड़छाड़ करना, दहेज कम लाने पर उसे मारना-पीटना या अन्य तरह से तंग करना और ऑफिस में बॉस द्वारा शारीरिक या मानसिक उत्पीडऩ करना।
औरत का उत्पीडऩ आदमी सदियों से करता आया है लेकिन हम यहां बात कर रहे हैं नारी द्वारा नारी के उत्पीडऩ की।
क्या नारी द्वारा भी नारी का उत्पीडऩ किया जाता है? इसका जवाब आपको नीचे के कुछ उदाहरणों से मिल जायेगा।
सरला की पड़ोसन राधा की बहू दीपा अमीर बाप की बेटी है। वह अपने साथ ढेर सारा दहेज लायी थी लेकिन सरला की बहू नेहा निम्न मध्यम वर्ग की है। वह अपने साथ कम दहेज लायी थी। इसी बात पर सरला अपनी बहू को अक्सर कोसती रहती है, दीपा को देख, कितना दहेज लायी है। एक तू है भिखारी बाप की औलाद जो खाली हाथ चली आयी है।
सुनीता की बहू रमा भी कम दहेज लायी है। सुनीता अपने बेटे से कहती रहती है इसे कलमुंही को तलाक दे दे। मैं तेरी दूसरी शादी करूंगी। चम्पा बड़ी निर्दयी सास है। उसकी बहू लता से काम में जरा भी गलती हो जाती है तो वह उसे जली कटी ही नहीं सुनाती, मार-पीट भी करती है।
कल्याणी एक स्कूल चलाती है। वह अपने स्कूल में ऐसी मजबूर और जरूरतमंद औरतों को टीचर रखती है जो हस्ताक्षर पूरे वेतन पर करें लेकिन वेतन आधा ही लें।
कमला औरतों की दलाल है। वह बहला फुसलाकर या भगाकर लाई गई औरतों को खरीदकर उनसे धंधा करवाती है। अगर कोई औरत इस काम को करने को तैयार नहीं होती तो उसे भूखा रखती है। मारती पिटती है और उसका बलात्कार भी करवाती है।
शारदा अपने भाई राकेश से अपनी भाभी रेखा की उल्टी सीधी शिकायत करके उसे पिटवाती है।
यहां मैंने सिर्फ कुछ उदाहरण दिये हैं। आपको ऐसे उदाहरण बहुत मिल जायेंगे।
औरत को जन्म देती है औरत। औरत को औरत से सहानुभूति होनी चाहिए। औरत को औरत के अच्छे व भले के लिए सोचना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।
आज औरत औरत का शोषण कर रही है। उसका शारीरिक मानसिक उत्पीडऩ कर रही है। उसे आर्थिक दृष्टि से हानि पहुंचाने का प्रयास कर रही है। यह गलत है। नारी को नारी के हित की बात सोचनी चाहिये। जब तक नारी नारी की हित रक्षक नहीं बनेगी, तब तक मर्द से कोई भी उम्मीद व्यर्थ है।
-किशन लाल शर्मा

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