चाल को दर्शाती है चाल-ढाल

चाल को दर्शाती है चाल-ढाल

अक्सर देखा जाता है कि आमतौर पर लोग अपनी चाल के प्रति लापरवाही बरतते हैं लेकिन संतुलित व सधी हुई चाल, व्यक्तित्व को प्रभावी बनाने में सक्षम होती है। जिन महिलाओं की चाल चित्ताकर्षक होती है, उन्हें अक्सर हंसिनी-सी चाल की उपमा से नवाजा जाता हैं
हालांकि आकर्षक व संतुलित चाल के लिए पैर की अस्थियों की बनावट, तलुवे का आकार व व्यक्ति विशेष की निजी कोशिश की प्रमुख भूमिका होती है।
चाल से ही व्यक्ति विशेष के स्वभाव की भी जानकारी मिलती है, मसलन-नपे तुले कदम रखने वाले व्यक्ति का स्वभाव संतुलित व हिसाबी होता है। इन लोगों का प्राय: अपने स्वभाव पर पूरा नियंत्रण होता है। दबे पांव छोटे-छोटे डग वाले व्यक्ति हमेशा सोच समझ कर निर्णय लेने में दिलचस्पी रखते हैं। इनको मन की भावनाओं को गोपनीय रखने की कला आती है।
हमेशा नीची नजर कर के चलने वाले व्यक्ति वर्तमान में न जीकर प्राय: भूत भविष्य की चिंता में लीन रहते हैं। वे हमेशा अपने में खोये-खाये से रहते हैं।
आकाश की तरफ देखने वाले कल्पनाशील स्वभाव के होते हैं। हरदम दायां व बांया पैर घसीटने वाले चिड़चिड़े, दम्भी व अडिय़ल किस्म के होते हैं। ऐसे लोग दूसरों में फूट डालने या लडऩे-झगडऩे में दिलचस्पी रखते हैं।
लम्बे-लम्बे डग भरने वाले महत्त्वाकांक्षी व जल्दबाज होते हैं। अक्सर ऐसे लोग अत्यधिक स्वाभिमानी व परिश्रमी भी होते हैं। झूम झूम कर लचकती चाल चलने वाले मस्तमौला व लापरवाह किस्म के इंसान होते हैं। इन्हें प्राय: दूसरों के दुख सुख से कोई वास्ता नहीं होता परंतु ऐसे लोग हमदर्दी का ढोंग रचाने में माहिर होते हैं।
- पूर्णिमा मित्रा

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