प्रौढ़ावस्था को भी खुशहाल बना सकती हैं आप

प्रौढ़ावस्था को भी खुशहाल बना सकती हैं आप

भारत में प्राय: प्रौढ़ वय की महिलाएं थकी और अस्वस्थ दिखाई देती हैं। उनके पास परिवार के लिए तो समय होता है पर अपने लिए समय नहीं होता। अपने पहनावे से बेखबर पति और बच्चों की सेवा में महिलाएं असमय ही बूढ़ी हो जाती हैं। ऐसा विशेष रूप से मध्यमवर्गीय परिवारों में देखने में आता है, जहां अल्पशिक्षित घरेलू महिलाएं परिवार की सेवा को ही अपने जीवन का उद्देश्य मानती हैं।
प्रौढ़ावस्था में सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी तनाव काफी बढ़ जाते हैं जिसको आप अपनी मजबूत इच्छाशक्ति से जीत सकती हैं और अपनी प्रौढ़ावस्था को खुशहाल बना सकती हैं।
आप अपनी प्रौढ़ावस्था को खुशहाल बना सकती हैं, अपने व्यक्तित्व की ओर ध्यान देकर। यह याद रखें कि आपकी आयु उतनी ही होगी जितना आप अनुभव करती हैं। यदि आप अपने को युवा समझें, उन्हीं की तरह पहनावा रखें और चुस्ती अनुभव करें तो न केवल आप युवा दिखेंगी बल्कि वैसा ही अनुभव भी करेंगी।
दूसरी ओर यदि आप यह सोचें कि अब तो जवानी निकल गई है, बुढ़ापा आ गया है, अब क्या मेरे खाने-पहनने की उम्र है तो आप समय पूर्व ही वृद्ध लगेंगी। कुछ बातों पर ध्यान देकर आप अपने व्यक्तित्व को युवा और आकर्षक बनाये रख सकती हैं और युवा अनुभव कर सकती हैं:-
- प्रौढ़ावस्था में रजोनिवृत्ति के कारण महिलाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हर महिला को यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि यह एक प्राकृतिक चक्र है जो जरूरी है। यदि आप को इस दौरान काफी परेशानी हो रही हो तो महिला डाक्टर से शीघ्र सम्पर्क करें और घर के लोगों से अपनी परेशानी के बारे में विचार-विमर्श करें।
- शरीर का कमजोरी महसूस करना और जल्दी थकान अनुभव करना कुछ हद तक तो प्राकृतिक है, उम्र के साथ। यदि अधिक थकान और कमजोरी महसूस हो तो डाक्टर को दिखा कर उचित विटामिन और ताकत की दवाइयां ले सकती हैं।
- खुद को प्रसन्न रखें। हल्का संगीत सुनें।
- मन को भाने वाले अच्छे वस्त्र पहनें जिसमें आप चुस्त दिखाई दे सकें। वस्त्रों से मेल खाते मोतियों के, नगों के, सोने-चांदी के आभूषण पहनें।
- आप अपनी रूचियों को और निखार सकती हैं क्योंकि अब आपके पास पहले से अधिक समय है।
- काम की व्यस्तता के साथ-साथ अपने व्यक्तित्व को निखारने का भी पूरा ध्यान रखें।
- अपना कुछ समय भगवान की पूजा-पाठ के लिए भी रखें।
- अपने सगे-संबंधियों से बीच-बीच में आवश्यकतानुसार मिलने जा सकती हैं और सुविधानुसार उन्हें अपने घर भी बुला सकती हैं।
- कभी-कभी रसोई बच्चों के हवाले कर आप अपने शेष काम, जो काफी दिनों से रूके हैं, उन्हें पूरा कर सकती हैं। फिल्म देखने या खरीदारी करने अपने पति या सहेली के साथ जा सकती हैं।
- सुबह-शाम सैर के लिए निकल जायें जिससे स्वास्थ्य भी बेहतर होगा और आप तरोताजा महसूस करेंगी।
- घर पर यदि नौकर या नौकरानी मदद करने के लिए हैं तो आप सप्ताह में एक दिन समाज सेवा के लिए रखें।
- अपने अनुभवों से आप दूसरे जरूरतमंद लोगों की मदद कर सकती हैं।
- टी.वी. पर अच्छे कार्यक्रम देखकर अपना मनोरंजन कर सकती हैं।
- कभी-कभी ब्यूटी पार्लर में जा कर अपनी सुंदरता को और निखार सकती हैं। समय पर अपने केशों को डाई करवाती रहें, जिससे आप अपनी उम्र से छोटी दिखाई दे सकती हैं।
- अपनी दोस्ती जवान लोगों से भी रखें जिससे आप युवा अनुभव करेंगी।
इस प्रकार प्रौढ़ावस्था को प्रकृति की देन मानकर आप अपनी समझदारी से इसे खुशहाल बना सकती हैं।
- सुनीता गाबा

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