मत बनिये पत्नी के बॉस

मत बनिये पत्नी के बॉस

प्रत्येक युवक युवती जब शादी के पवित्र बंधन में बंधते हैं तो एक सफल वैवाहिक जीवन जीने की कामना करते हैं। सफलतापूर्वक निर्वाह करना ही सुखी दांपत्य की कुंजी है। एक पार्टनर दूसरे को सुखी और खुश रखने का अरमान लिए नये गृहस्थ जीवन में प्रवेश करता है।
कभी-कभी थोड़ी सी गलतफहमी और शक सब सपनों को चकनाचूर कर देता है और गृहस्थ जीवन की नाव बीच मंझधार डगमगाने लगती है। इन सब बातों से गृहस्थ जीवन को बचाने के लिये पति पत्नी दोनों में धैर्य और समझ का होना बहुत आवश्यक होता है। तभी इस नाजुक रिश्ते को टूटने से बचाया जा सकता है।
पति पत्नी को अपने अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को पूरा करने की समझ भी होनी चाहिए। पत्नी तभी अपने साथी से रूठती है जब उसे यह अहसास हो जाता है कि उसकी उपेक्षा की जा रही है।
पत्नी दिन भर परिवार की भलाई के लिए काम करती है और पति उसे प्रशंसा की बजाय थोड़ी सी गलती पर डांट फटकार दे तो उसका कोमल हृदय टूट जाता है। पति उसको मनाने में अपनी तौहीन समझता है। ऐसे में पति पत्नी एक दूसरे से दूर होते चले जाते हैं।
पति अगर पत्नी का बास न बन कर उसका मित्र और सच्चा हमदर्द बन कर रहे तो शायद आपसी मनमुटाव बहुत कम होगा क्योंकि पति पत्नी एक ही गाड़ी के दो पहिए के समान होते हैं। उनमें कोई बड़ा या छोटा नहीं होता। बड़ा छोटा होने पर गाड़ी डगमगाने लगती है।
पत्नी को प्रसन्न रखना हर पति का मुख्य कर्तव्य होता है। वह अपने घर परिवार से दूर आ कर पति के पास रहती है। पति ही उसका सबसे नजदीकी मित्र होता है, यह सोचकर पत्नी की हर खुशी का ध्यान पति को रखना चाहिए। पति को यह भी ध्यान देना चाहिए कि किन बातों से पत्नी को खुशी मिलती है और कौन सी बातें उसे चोट पहुंचाती हैं।
पुरूष महिलाओं की कुछ आदतों की परिवार, मित्रजनों और सगे संबंधियों के बीच ऐसे हंसी उड़ा देते हैं कि उन्हें इस बात का बोध नहीं हो पाता कि पत्नी को इन बातों से कितनी मानसिक पीड़ा पहुंचती है। पत्नी के कुछ कहने पर उसे मजाक में कही गई बात कहकर भुलाने को कह देते हैं और पुन: दोहराते रहते हैं और कभी-कभी जब उसके सब्र की सीमा टूट जाती है और वह बदला लेने की प्रवृत्ति मन में पाल लेती है।
पत्नी घर के सभी कामों को खुशी-खुशी करने के लिए तैयार रहती है, बस उसे पति का पूरा प्यार और सहयोग मिलता रहे। जहां उसे पति के प्यार से वंचित किया गया तो यह उसकी सहनशक्ति से बाहर हो जाता है। महिलाओं का हृदय बहुत कोमल होता है। वे जल्दी मान भी जाती हैं और जल्दी रूठती भी हैं। पति को जब यह अहसास होने लगे कि पत्नी नाराज होने लगी है तो उसे मनाने में अहं को आड़े न आने दें। पति की थोड़ी सी समझदारी पत्नी को उसके और करीब ले आती है और पत्नी हमेशा पति की प्रेयसी बन कर रह सकती है।
पति को चाहिए कि वह अपनी पत्नी के मन में यह कूट-कूटकर भर दे कि वह पत्नी को दिलोजान से चाहता है। उसके साथ ही उसका जीवन रस से भरा हुआ है।
पति को पत्नी की हर बात का जवाब हमेशा प्यार से देना चाहिए। उसके किए कामों की प्रशंसा करनी चाहिए। कभी-कभी उसकी सुन्दरता, डेऊस व केश विन्यास के तरीके की प्रशंसा करते रहना चाहिए जिससे पत्नी यह महसूस करती रहे कि पति उसके कामों पर नजर रखता है। पति को बीच बीच में स्पर्श से भी जताना चाहिए कि वह उसके करीब है।
पत्नी को बेवकूफ समझ कर उससे किसी भी बात पर राय न लेना पति की गलती है। आपको उसकी राय पसंद नहीं भी आई तो उसे प्यार से अपनी बात स्पष्ट करने की कोशिश करें न कि उसे नासमझ और बेवकूफ मानें। पत्नी कुछ कम पढ़ी लिखी है तो उसे बार-बार यह अहसास न करायें कि उस में दिमाग की कमी है बल्कि उसे विश्वास दिलायें कि आप उसके साथ हैं।
पत्नी को आशावान बनायें। उसकी नकारात्मक सोच को सकारात्मक बनाने में पूरी मदद करें। मां, बहन, भाभी या किसी मित्र के बहकावे में आकर पत्नी का तिरस्कार न करें। ऐसा होने पर पत्नी के सपने तो टूटेंगे ही, साथ ही आपके दांपत्य में न भरने वाली दरार पड़ जाएगी।
पत्नी को सच्चा प्यार देकर उसे सच्चा साथी स्वीकार करें। गलती तो हर इंसान से होती है। उसे मौका देखकर प्यार से समझाएं। शायद वह आपकी अधिक कद्र करेगी।
- नीतू गुप्ता

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