दीर्घ जीवन की खोज में

दीर्घ जीवन की खोज में

जीवन एक कहानी है। यह लंबी नहीं परन्तु अच्छी, अनुकरणीय, विचारणीय हो। इस कहानी को 100 वर्ष लंबी बनाना आपके अपने हाथ में ही है।
लम्बे जीवन की इच्छा और जीने की आशा व दृढ़ विश्वास आपको दीर्घ जीवन दे सकते हैं। जीवन एक बाजी है। हार जीत ईश्वर के हाथ है। सफल जीवन जीना तो अपने हाथ में है।
यदि उचित भोजन, उचित व्यायाम किया जाए और चिंतामुक्त जीवन जिया जाए तो जीवन अवधि में वृद्धि की जा सकती हैं जीवन में रिस्क यानी एक्सीडेंट से प्रकृति बचा दे तो जीवन दीर्घ है।
मन से नफरत, ईष्र्या, वैमनस्य एवं दुर्विचार सदा के लिए निकाल दें तो जीवन सुखी व समृद्ध हो सकता है।
हमें सदा ध्यान रखना चाहिए कि हम मुंह से क्या निकालते हैं और क्यों मुंह में डालते हैं।
जीवन में संतुलन शरीर के प्रत्येक अंग को सुन्दर एवं आभायुक्त बना सकता है। जीवन शक्ति का अंत मृत्यु तक ले जाता हैं। जीवन शक्ति बनाए रखने के लिए संतुलित भोजन जिस में खनिज विटामिन एवं प्रोटीन वसा, कार्बोज हों
शरीर के हारमोन्ज का संतुलन भी शरीर को सुडौल बनाता है। पारिवारिक वातावरण ठीक हो तो तन्दुरूस्ती ठीक रहती है। सप्ताह में एक दिन उपवास करने से शरीर का समुचित विकास रहता हैं। ताजे जल को सूर्य किरणों से ऊर्जा मिलती है। इसमें नहाने से शरीर प्रकुल्लित रहता हैं
जहां तक संभव हो, मोटापे और कब्ज से बचने की चेष्टा करें। दीर्घ जीवन चुस्त होना चाहिए न कि चारपाई पर बीमार लेटे लेटे। बीमारी से बचना भी कला है। खान पान एवं शरीर और बाहर वाले वातावरण की स्वच्छता जरूरी है। श्रम भी जीवन के लिए जरूरी है।
यदि हम जिन्दा रहना चाहते हैं, जीवन की चाह है, तभी हम जीवित रहने की चेष्टा करते हैं। उमंग एवं साहस के बिना जीवन जीना मुश्किल है। यह प्रकृति का नियम है कि जो देर से जवान होगा, देर से ही वृद्ध होगा। जो मन दिमाग से जवान सोचेगा, जवान रहेगा, तन्दुरूस्त रहेगा। 80 प्रतिशत बीमारियां मात्र सोचने से हो जाती हैं।
स्वास्थ्य की उपेक्षा मत करें। काम बाद में, पहले सेहत ठीक रहनी अत्यंत जरूरी है। सूर्य किरणें स्वास्थ्य संदेश लिए होती हैं। घरों में प्रकाश एवं हवा का समुचित प्रबंध होना चाहिए।
प्रसन्न रहने की यथा संभव चेष्टा करनी चाहिए। हंसते रहो। दूध व फल जीवन रक्षक हैं। प्रतिदिन छ: गिलास पानी अवश्य पीना चाहिए। कम खाओ, संतुलित खाओ, ज्यादा खाने से मानव बीमार हो जाता हैं। कम खाने से तन्दुरूस्त रहता है।
यदि हम अपने भोजन में दूध फल, सब्जियों व अंकुरित अनाज की मात्रा बढ़ा दें तो स्वास्थ्य रत्न प्राप्त किया जा सकता है। दही और लस्सी आंतडिय़ों का विष निकाल देते हैं
शुद्ध वायु प्राणवायु है। इससे स्फूर्ति व तन्दुरूस्ती रहती है। वैज्ञानिकों का कथन है कि अविवाहित रहने से जीवन शक्ति घटती है और विवाह करने से जीवन शक्ति बढ़ती है। मानसिक रोग जैसे हिस्टीरिया, न्यूरेस्थेलिया, ब्रहमचारियों को ज्यादा होता है। नियमित शौच एवं मल पदार्थों का बाहर निकल जाना अच्छे स्वास्थ्य की निशानी है।
ईश्वर स्तुति से मन शान्त रहता है। मन्दिर मस्जिद गुरूद्वारे धर्म के नाम पर युद्ध जरूर कराते हैं परंतु मानसिक शांति के सागर हैं। हवन यज्ञ की शुद्ध प्राणवायु मिलती है। जैसे मशीन चलती घिस जाती है, उसी प्रकार शरीर भी घिसता है। इसको ठीक रखने के लिए कुछ आवश्यक चेष्टा जरूरी बन जाती है।
त्वचा खुश्क न हो। चेहरे पर झुर्रियां न हों। जुबान गुलाबी साफ हो। आंखों में चमक हो। कार्य करने की क्षमता हो। बाल काले चमकदार हों। खूब-नींद आती हो। पाचन क्रिया ठीक हो। पसीने में दुर्गन्ध न हो। पैर के तलवे गुलाबी हों। पेट गर्म और सिर ठण्डा रखें।
प्रात: उठने के बाद मन खुश रहे। तन में स्फूर्ति हो, नई उमंग हो, नई तरंग हो। हर दिन नया दिन लगे मानो यह दिन जीने का अंतिम दिन हो। इसे भरपूर खुश हो कर जी लेवें। बार-बार थूकने की आदत न हो।
व्यर्थ बातें, व्यर्थ सोच एवं मस्तिष्क, के व्यर्थ खर्च से बचें। चिंताओं से बचने का भरसक प्रयास करें। उत्तेजक मनोविकारों से बचें। दुर्भावनाओं से बचें क्योंकि भावनाओं का शरीर पर बहुत प्रभाव पड़ता है।
किसी अपने की मृत्यु पर मानसिक संतुलन बनाए रखें। ज्यादा शोक, ज्यादा हर्ष भी शरीर के लिए हानिकारक होता है। लाटरी निकलने पर हार्ट अटैक आम बात है। मृत्यु संदेश मिलने पर कई लोगों को पक्षाघात हो जाता है।
नशे वाली वस्तुओं का सेवन मत करें। यदि करना भी हो तो दवा के रूप में डॉक्टर की सलाह के बिना मत करें क्योंकि सभी नशे की दवाएं औषधि है। जहर भी कम औषधि है, अमृत भी ज्यादा लें तो ज़हर बन जाता है।
मन को उल्लासपूर्ण बातों से भरते रहें। मन को हीन क्षीण करने वाली बातें मत सोचें। निष्क्रियता से बचें।
दीर्घ जीवन की खोज आज से नहीं, युगों से जारी है। तपस्या की जाती है इसे प्राप्त करने को। व्यायाम और सक्षम जीवन दीर्घ जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
आपको अपने पर आत्म विश्वास जरूर होना चाहिए कि आप दीर्घजीवी होंगे। आप स्वस्थ हैं। यदि आप बीमार हैं तो आप स्वस्थ हो रहे हैं। संकल्प में शक्ति है। आप आत्म-प्रशिक्षण से युवा, चिर स्वस्थ, दीर्घजीवी बन सकते हैं।
मन में जीवन का उत्साह, काया में तरंग। नई जीवन शैली, चुस्त शरीर, सदा प्रसन्न रहना, आत्मविचार और आत्म विश्वास कि 'जीवेम शरद: शतम' तो निश्चय ही हमारा जीवन सुन्दर, स्वस्थ एवं शत वर्ष का होगा।
- विजेन्द्र कोहली

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