आसान नहीं पारिवारिक व दोस्ताना रिश्तों में तालमेल

आसान नहीं पारिवारिक व दोस्ताना रिश्तों में तालमेल

हर इंसान के लिए पारिवारिक व दोस्ताना, दोनों ही तरह के रिश्तों की अपनी-अपनी अहमियत होती है, अत: इन रिश्तों को निभाना भी उसके लिए आवश्यक होता है। वैसे यह कठिन अवश्य है पर असंभव नहीं क्योंकि दोनों रिश्तों में समान संतुलन हो तो फिर इन्हें निभाने में कोई मुश्किल पेश नहीं आती। अब यह आप पर निर्भर करता है कि आप यह संतुलन कैसे बनाते हैं।

यदि आप प्राथमिकता को आधार मानकर इन रिश्तों को निभाना चाहेंगे तो न तो अपने फ्रेंड सर्किल से आपका रिश्ता टिका रह सकेगा और न ही आपके परिवारजन आपसे संतुष्ट रह पाएंगे क्योंकि जब परिवारजन व फ्रेंड सर्किल दोनों ही आपकी जरूरत हैं तो फिर किसी एक को प्राथमिकता देने का सवाल ही नहीं उठता। आपको यह देखना होगा कि किस समय, किसको आपकी अधिक जरूरत है-परिवारजनों को अथवा दोस्तों को। दोनों में से जिसका काम अधिक महत्त्वपूर्ण व जरूरी हो, उसी को प्राथमिकता दें। ऐसी स्थिति में रिश्तों को नहीं, हालात को अहमियत दें। अगर आपके ऐसा करने से दूसरा पक्ष आपसे नाराज़ होता है तो आपको उसकी भी उपेक्षा नहीं करनी क्योंकि यह जरूरी तो नहीं कि हर कोई आपकी भावनाओं व समस्याओं को समझ ही लें। आपको सदैव यह याद रखना होगा कि कच्चे धागे से बुने ये रिश्ते बहुत संभाल कर रखने पड़ते हैं। थोड़ी सी भी चूक होने पर सब तहस-नहस हो सकता है, इसलिए हालात चाहे जैसे भी हों, आपको धैर्य से काम लेना ही होगा।

ध्यान रहे कि अच्छा परिवार व अच्छे दोस्त भाग्य से ही मिलते हैं व आपको दोनों की जरूरत है इसलिए धैर्य से काम लेते हुए दोनों रिश्तों को बचाने का हर संभव प्रयास करें।

शिकायत का मौका न दें:- यह सदैव ध्यान में रखें कि दोनों पक्ष ही आपके लिए अति महत्त्वपूर्ण हैं। एक तरफ आपका परिवार है, जहां से आपने अपनी जिंदगी की शुरूआत की व दूसरी ओर आपके दोस्त हैं जो हर सुख-दुख में आपका साथ देते हैं, जिन पर आप भरोसा कर सकते हैं व अपने मन की हर वो बात जो किसी और से नहीं कह सकते, वह उनके साथ बिना किसी हिचकिचाहट के बांट लेते हैं। इन दोनों ही पक्षों की नाराजग़ी आप बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे, अत: दोनों को ही कभी शिकायत का मौका न दें।

यदि कभी कोई पक्ष किसी गलतफहमी का शिकार हो जाए तो सूझबूझ से काम लेते हुए उसकी गलतफहमी को दूर करने का प्रयास करें। ऐसा करते वक्त आपको अत्यंत सावधान रहना होगा ताकि आपके जीवन के दोनों अभिन्न अंग सदैव आपके साथ जुड़े रहें।

- भाषणा बांसल

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