परफेक्ट पति की तलाश

परफेक्ट पति की तलाश

आज समय की रफ्तार ने बहुत कुछ बदल दिया है। पुरूष हमेशा से ही सर्वगुण संपन्न और सौंदर्य से परिपूर्ण पत्नी की चाह करता आया है लेकिन आज युवतियां भी युवकों को सर्वगुण संपन्न देखना चाहती हैं।

दक्षिण भारतीय मनीष ने उत्तर भारत की रेणुका से शादी की है। दोनों के अच्छे संबंध हैं किंतु रेणुका के मन में पति के परफेक्ट प्रेजेंटेशन को लेकर एक जुनून हमेशा सवार रहता है जिस से मनीष झुंझला उठता है। मनीष का कहना है कि उसे 24 घंटे यही लगता है जैसे वह रेणुका के आफिस में काम कर रहे पुरूष सहकर्मियों के साथ किसी कंपीटिशन की रेस में भाग ले रहा हो। रेणुका ने उसे वह जैसा है, वैसा ही पसंद किया था लेकिन अब रेणुका पर उसे बदलने का भूत सवार हो गया है।

आखिर वह अब उसे क्यों बदलना चाहती है? रेणुका को पति से क्या शिकायतें हैं? प्रश्न के उत्तर में वह बोली कि मनीष का बढ़ता वजन उस में हीन भावना पैदा करता है। मनीष के मोटापे से उसे शर्म आती है। मोटापा उसकी स्मार्टनेस पर विपरीत प्रभाव डालता है। रेणुका चाहती है कि मनीष ट्रैक सूट पहन कर सुबह सैर के लिए जाए। हो सके तो जिम में जाकर अपने आप को फिट रखने की कोशिश करे जिस से उसे मनीष के मोटापे से शर्म महसूस न हो।

युवतियों की यह सोच कि पति अपने आप में कितना ही महत्त्वपूर्ण क्यों न हो, उनके सामने महज पति मात्र ही बन कर न रहे, ने ही परफेक्ट या आदर्श पतियों की मांग को बढ़ावा दिया है। आदर्श पति की चाहत में युवतियां ऐसा पुरूष तलाशती हैं जो स्थिर चित्त, दृढ़ विश्वासी, संतुलित, धैर्यवान होने के साथ-साथ टिकाऊ भी हो, जो स्टाइल से गले मिले और मौका मिलते ही गाल भी चूमे यानी संपूर्ण पति वह जो शादी में रोमांस को जीवित रखने के लिए काम करे और रोमांस को महज एक चोंचला कह कर किनारे न रख दें।

कैसा होना चाहिए परफेक्ट पति

परफेक्ट पति की सब से बड़ी खूबी यह होती है कि वह ऑफिस की एनर्जी को घर में भी कायम रखता है तथा जिस के लिए विवाह पत्नी के साथ बराबरी के हक की एक भावनात्मक व्यवस्था होती है।

वह घर और बच्चों की देखभाल का सारा बोझ पत्नी पर ही डालने में विश्वास नहीं रखता।

परफेक्ट पति के लिए कैरियर सब से पहले आता तो है पर घर भी उससे पीछे नहीं छूटता। ऐसे पति आफिस की मीटिंग और बच्चों के स्कूल की मीटिंग को बराबर अहमियत देते हैं।

युवा महिलाओं का मानना है कि संपूर्ण पति में मिलने वाले गुणों की लिस्ट बहुत लंबी है। परफेक्ट पति दांपत्य संबंधों को प्रेम, अधिकारों और कर्तव्यों का सुखद संतुलन मानते हैं।

परफेक्ट पति की श्रेणी में रखे जाने वाले पुरूष मात्र अच्छे व्यक्ति नहीं होते बल्कि वे प्रेम की कला में सिद्धहस्त होने के साथ-साथ कुशल प्रेमी भी होते हैं। प्यार के अलावा भी पत्नी को बहुत कुछ देने में विश्वास रखते हैं। ऐसे पुरूष का सान्निध्य महिला में भावनात्मक सुरक्षा का भाव भर देता है। उनकी वाक पटुता उन्हें हर जगह लोकप्रिय बनाए रखती है।

परफेक्ट पति में कई सारे मूड एक साथ काम करते हैं। वह घर में कोई भी काम करे पर इस बात को ध्यान अवश्य रखेगा कि पत्नी के लिए नए काम न खड़े कर दे।

वह टी.वी पर चाय का प्याला नहीं रखेगा।

टूथपेस्ट की ट्यूब खुली नहीं रखेगा।

परदों से हाथ नहीं पोंछेगा।

अगर मनपसंद शर्ट अलमारी में प्रेस की हुई नहीं मिलेगी तो नाराज नहीं होगा।

उसके लिए कभी तुम्हारे हिस्से का काम और मेरे हिस्से का काम जैसी कोई चीज नहीं होगी।

वह ड्राइंगरूम में बच्चों के बिखरे खिलौने उसी तरह प्यार से संभालेगा जिस तरह आफिस में अपनी फाइलों को संभालता है। परफेक्ट पति पत्नी को अपनी परिपूर्णता का एक प्रमुख अंग मानकर चलता है जिसके हर सुख दुख में पत्नी बड़ी सहजता से जुड़ा हुआ महसूस करती है।

परफेक्ट पति यह न समझे कि घर वह होता है जहां बच्चों की चिल्ल पों होती है या उनके होमवर्क को लेकर शोर मचता है या जहां दरवाजे पर दूधवाला, प्रेसवाला, पेपर और ब्रेडवाला घंटी बजाकर अपना बिल वसूलता है। घर वह होता है जहां पति कहे जाने वाले व्यक्ति की प्यार भरी बांहों में पत्नी बार-बार झूलते हुए अपने वजूद को उसके स्नेह से भरना चाहती है।

सामान्य पति भुलक्कड़ हो सकता है लेकिन परफेक्ट पति की याददाश्त कुछ अलग तरह की होती है। वह पत्नी की उम्र याद नहीं रखता, केवल उसका जन्मदिन याद रखता है।

युवतियों का मानना है कि परफेक्ट पति एक अच्छा दोस्त साबित होता है क्योंकि वह पत्नी का हर हाल में ख्याल रखता है।

वह आदमी जो पत्नी के दबे छिपे अधूरे सपनों को दिलोजान से पूरा करने की कोशिश करे, परफेक्ट पति की श्रेणी में रखा जा सकता है। वह पत्नी को सामान्य इंसान की नजर से देखने के साथ-साथ हमेशा 'हमÓ कहता है 'मैंÓ नहीं।

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार एक गूढ़ सिद्धांत है कि हर व्यक्ति सराहना पाने का इच्छुक रहता है। पति पत्नी के बीच दांपत्य रिश्ते में यही सराहनीय व्यवहार शादी को मुरझाने से बचाए रखता है। परफेक्ट पति अपनी पत्नी को अपने व्यवहार द्वारा सम्मान की अधिकारिणी बना देता है।

संपूर्ण पति वह सब कुछ है जो एक अच्छी पत्नी उसे बना सकती है मगर इसके लिए जरूरी है कि पत्नी भी अपनी भूमिका परफेक्ट पत्नी की तरह से निभाए। अगर पत्नी परफेक्ट पत्नी की भूमिका में सही नहीं उतरती तो फिर उसे यह भूलना पड़ेगा कि परफेक्ट पति अपनी भूमिका ईमानदारी से निभाएगा क्योंकि शरारतों में वह बच्चों को भी मात करता है।

-एम. कृष्णा राव 'राज'

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