स्वच्छंदता और बढ़ते महिला अपराध

स्वच्छंदता और बढ़ते महिला अपराध

भारत में तेजी से बढ़ते पश्चिमीकरण और टीवी चैनलों पर स्वच्छंद कार्यक्र मों के बढ़ते प्रभाव के कारण किशोरावस्था एवं युवावस्था में पहुंचते-पहुंचते लड़कियों के मन में खूबसूरत व स्मार्ट दिखने की तमन्ना जाग उठती है।

आज मध्यमवर्गीय परिवार की लड़कियां खुले आसमान में आजाद पंछी की तरह उडऩा चाहती हैं। किसी प्रकार की बंदिशें उन्हें पसंद नहीं। अपनी जिंदगी के सारे फैसले वे खुद लेना चाहती हैं। आत्मविश्वास से भरी ये लड़कियां अति आत्म विश्वास से लबरेज होने के कारण कई बार गलत फैसले ले लेती हैं और कई बार माता-पिता भी स्वछंदता के नाम पर उन्हें पूरी छूट दे देते हैं जो कभी-कभी उनके लिए घातक सिद्ध हो जाती है।

वैसे आज की किशोरियों में बॉयफ्रैंड बनाना, देर रात तक डिस्कोथेक, पार्टियों में शामिल होकर पेज 3 की शोभा बढ़ाना, देर रात तक घूमना, पिक्चरें देखना, सिगरेट-शराब पीना और फैशन के नाम पर छोटे व तंग तथा भड़कीले कपड़े पहनना व उसी अनुसार मेकअप करना स्टेट्स सिंबल बनता जा रहा है। यौन कुंठा से कुंठित आज के युवा व अधेड़ इन्हीं बातों का फायदा उठाते हैं।

पश्चिमी मानसिकता की इन लड़कियों के लिए जमाना बदल चुका है पर भारत जैसे गरीब देश में महानगरों में तेजी से फैलते झोंपड़पट्टियों से लेकर सभ्य समाज के बिगड़ैल युवा रईसजादों के लिए लड़कियां आज भी एक उपभोग की वस्तु से ज्यादा कुछ भी नहीं हैं।

महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध के लिए अभी तक सिर्फ पुरूषों को ही दोषी ठहराया जाता है जो काफी हद तक सही भी है क्योंकि ये अपराध पुरूषों द्वारा ही किए जाते हैं लेकिन महिलाएं भी इसके लिए कम जिम्मेदार नहीं हैं।

कुछ साल पहले तक महिला शब्द का अर्थ एक सीधी-सादी, भोली भोली, ऊपर से नीचे तक कपड़ों में लिपटी और गंगाजल की तरह पवित्र युवती का होता था, तभी तो हमारे देश में महिलाओं को देवी का दर्जा दिया गया है लेकिन जब से भारत का पश्चिमीकरण हुआ है, लड़कियों ने तेजी से इनका अनुकरण करना शुरू कर दिया है। हालांकि इनकी संख्या आज भी केवल कुछ ही है पर तेजी से यह संख्या बढ़ रही है जिसके कारण समस्त नारी जाति की छवि धूमिल हो रही है।

आज समाज में फैशन की चमक दमक का असर मीडिया के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ बढ़ता ही जा रहा है। आजकल टीवी विज्ञापनों के जरिए उपभोक्ताओं को लुभाने के लिए बेधड़क नारी शरीर का इस्तेमाल हो रहा है, वहीं टीवी चैनलों पर दिखाए जाने वाले रीमिक्स एलबम वीडियो ने तो नग्नता को ही आधुनिकता की परिभाषा प्रदान कर दी है।

अब तो लड़कियां भी टीवी तथा फिल्में देखकर वैसे ही कपड़े पहनकर अपने आपको खुले विचारों वाली होने का दावा करती हैं, वहीं लड़कों को आकर्षित करने के लिए भड़कीले मेकअप का भी सहारा लेने लगी हैं लेकिन वे यह नहीं समझ पाती कि पुरूष समाज की मानसिकता अभी भी पुराने जमाने की ही है।

इसलिए इन तथाकथित अत्याधुनिकता का ढोंग करने वाली लड़कियों और युवतियों को अपने तथा अपने समाज के प्रति थोड़ा सजग होना चाहिए क्योंकि जिस तरह से उनके प्रति अपराधों में इजाफा हुआ है ऐसे में वे कभी भी इसकी चपेट में आ सकती हैं और आज भी भारतीय सभ्यता में महिलाओं की अस्मत लुटना सबकुछ लुटने के समान है। पुरूषों के पास तो खोने के लिए कुछ भी नहीं होता मगर लड़कियों का तो सब कुछ तबाह हो जाता है।

हालांकि ऐसा भी नहीं है कि औरतों के खिलाफ बढ़ते अपराध को रोकने के लिए सरकार कुछ नहीं कर रही। इसके लिए प्रशासन की ओर से विभिन्न उपाय किए जा रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा किया जा रहा है, वहीं लड़कियों को भी आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जा रहा है तथा सादे कपड़े में महिला पुलिस को भी विभिन्न सार्वजनिक जगहों व बस आदि में तैनात किया जा रहा है ताकि इस प्रकार की घटनाएं रोकी जा सके।

परन्तु इन तमाम सरकारी प्रयासों के बावजूद यदि आज की लड़कियां अपने आपको नहीं बदलती तथा सजगता व सतर्कता नहीं बरतेंगी तो पुलिस कहां-कहां पहुंच कर उनकी सुरक्षा करेगी, इसलिए जरूरत है लड़कियों एवं महिलाओं को कि वे खुद ही अपनी सुरक्षा के पर्याप्त उपाय करे तथा सार्वजनिक जीवन में सुंदर दिखने का प्रयास अवश्य करें पर अश्लील नहीं।

- सुधाश्री गुप्ता

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