साली आधी घरवाली नहीं

साली आधी घरवाली नहीं

वाकई ससुराल में मजा तब ही आता है जब आपकी कोई प्यारी सी नटखट और शरारती 'साली' हो और अगर ससुराल में साली नहीं, तब तो ससुराल में रखा क्या है?

पिछले साल की बात है। आनंद की शादी होने वाली थी। तब एक दिन बातों ही बातों में उसके एक दोस्त संदेश ने पूछ लिया, 'क्यों आनन्द, ससुराल में साली वाली है कि नहीं?

'है यार, आनन्द हंसते हुए गर्व से फूलकर बोला, 'बहार ही बहार है। एक दो नहीं तीन-तीन सालियां हैंं।'

' बेटा तब तो तेरे मजे हैं संदेश ने अपनी प्रतिक्रि या दी।

'और नहीं तो क्या। इसमें भी तेरे को संदेह है क्या? आनंद का स्वर खुशी में भीगा हुआ था।

'हां, हां मजे तो हैं ही तेरे,' अभी तक आनन्द और संदेश की बातें सुनता रीतेश बोला और पूछ लिया,'पर ये भी तो बता तेरी बीवी के जीजा कितने हैं?'

इस पर आनन्द कुछ याद करते हुए बोला, 'एक, हां एक। एक तो मेरी वाली से बड़ी है।'

'तब तो तेरी बीवी से खूब मजे लिये होंगे उसके जीजा ने?' रीतेश ने उसे चिढ़ाने के लिए पूछा।

पर आनंद ने कुछ जवाब नहीं दिया। एकाएक उसके चेहरे पर तैर रहे खुशी के भाव लुप्त से हो गये।

ऐसा ही होता है। लोग अपनी सालियों से तो खूब मजे करते हैं पर वहीं बात स्वयं उनके ऊपर आ टपके या उनकी अपनी बीवी पर लागू कर दी जाय तो चेहरे की रौनक भाग खड़ी होती है।

लोग अपनी सालियों के साथ तो खूब चक्कर-चलाने और तरह-तरह की शरारतें करने में आनन्द लेते हैं पर वहीं अपनी बीवी को उसके जीजा के साथ थोड़ी सी मामूली सी, शरारत करते देख लें, या फिर घर आये जीजा की खातिरदारी बीवी थोड़ी ढंग से कर देंं या फिर कुछ ज्यादा हंसने बोलने लगे तो उखड़ पड़ते हैं और निश्छल, निष्कपट और पवित्र हंसी मजाक के कई अशोभनीय अर्थ निकालने लगते हैं।

दूसरी तरफ कई लोग तो इतने चरित्रहीन और रसिक प्रवृत्ति के होते हैं कि 'साली आधी घर वाली' को चरितार्थ करते हुए न केवल साली से अश्लील हरकतें करते हैं बल्कि उन्हें बहला - फुसलाकर या अन्य किसी तरीके से फांसकर शारीरिक संबंध तक बना लेते हैं जो सरासर गलत है।

जीजा-साली का रिश्ता चुलबुला जरूर होता है जिसमें हल्की फुल्की शरारत निस्संदेह ही चल सकती है पर हद कतई पार नहीं करें। मर्यादा की सीमा को पार करना कदापि उचित नहीं। मर्यादा के उल्लंघन के बाद इंसान न केवल सामने वाला (साली) की नजर में गिर जाता है बल्कि स्वयं के लिए भी और अपने दांपत्य जीवन के लिए खतरा पैदा कर लेता है।

'साली आधी घरवाली' को कभी चरितार्थ न करें। जरा हटकर सोचें। बीवी की बहन भी बहन ही होती है। रिश्ते में मधुरता घोलने के लिए हंसी मजाक निश्चित रूप से करें पर सीमा के बाहर कतई न जायें। अपनी साली के मार्गदर्शक बनें, आदर्श बनें, फिर देखें, उसके द्वारा आप ताउम्र इज्जत पायेंगे। याद रखें, इज्जत वह अमूल्य निधि है जिसे खोकर इंसान दो कौड़ी का भी नहीं रहता।

- प्रेम कुमार

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