लड़कियां कब शादी से मुंह मोड़ती हैं?

लड़कियां कब शादी से मुंह मोड़ती हैं?

हमारे वर्तमान भारतीय समाज में ऐसी कई लड़कियां हैं जो विवाह को युद्धस्थल मान कर उससे अपने को दूर रखना चाहती है। इसके लिए उनके वे मां-बाप ही पूर्णत: दोषी हैं जो बच्चों के सामने बात बात पर झगडते हैं, आपस में दोषारोपण करते हैं और परिवार को रणभूमि में परिवर्तित कर डालते हैं। जो बच्चे ऐसे वातावरण में पलकर बड़े होते हैं उनके मन में विवाह के प्रति विकर्षण ही तो उत्पन्न हो सकता है।

कुछ तलाकशुदा महिलाएं ऐसी हैं जो सदा अपने बच्चों के सामने अपने बिछड़े पति की क्रूरता का बढ़ा चढ़ा बखान करती रहती हैं, भले ही अधिक क्रूरता उसने स्वयं बरती हो। यहां भी यद्यपि बच्चे अपने-मां-बाप के झगड़े अपनी आंखों से नहीं देख पाते तो भी माता का विस्तृत वर्णन उनके मन में बीती बातों का ऐसा अतिरंजित चित्र खींच देता है कि विवाह की कल्पना मात्र से बच्चे घबराने लगते हैं।

कुछ मां-बाप ऐसे होते हैं जो अपनी लड़की के लिए उत्तम से उत्तम वर की तलाश में रहते हैं। लड़का एक दम सुन्दर हो, सुशील हो, सुशिक्षित हो, उच्च पद पर हो, स्वस्थ हो, कुलीन हो और इतनी सारी शर्ते लगा देते है कि कोई भी लड़का उनकी शर्तो के अनुरूप नहीं मिलता। लड़की ऐसे लड़के के साथ भी शादी करने के लिए सहमत है जो सामान्य शिक्षा प्राप्त हो और सामान्य वेतन पाता हो, चाहे वह देखने में ज्यादा सुन्दर न हो। मां-बाप मानें, तब न? जब हर प्रस्ताव को ठुकराते-ठुकराते लड़की चालीस की आयु सीमा पार कर जाती है तब वह इतनी तंग आ जाती है, इतनी हताश हो जाती है कि वह अपना निर्णय सुना देती है अब मैं शादी नहीं करूंगी। इस बुढ़ापे में शादी किस काम की है।

कहीं-कहीं मां-बाप और लड़की बस इतना ही चाहते हैं कि कोई कामकाजी सच्चरित्र लड़का मिल जाए। हां, दहेज देने के लिए उनके पास न पैसा है, न सोना है पर जो भी कामकाजी लड़का प्रस्ताव लेकर आता है वह इतना दहेज चाहता है कि बात वहीं समाप्त हो जाती है। जो लड़का कामकाजी नहीं, उसके साथ शादी करके उसका भी भार जीवन भर क्यों वहन करती रहे लड़की? इस प्रकार के सोच विचार में समय बीतता जाता है। लड़की के बाल पकने लगते हैं।

कुछ लड़कियां ऐसी भी हैं जिन के कंधे पर परिवार का सारा बोझ आ जाता है। मान लीजिए किसी लड़की के पिता का देहान्त हो चुका है। लड़की को पिताजी ने अच्छी शिक्षा दिलाई थी जिस के कारण उसे अच्छा रोजगार मिल गया है।

उसकी माताजी है, तीन छोटे भाई हैं। किराए के मकान में रह रहे हैं। घर का सारा खर्च उसी को संभालना है। छोटे भाइयों की पढ़ाई जब तक पूरी हो जाती है, तब तक उसकी आयु चालीस के करीब हो जाती है। अब क्या शादी?

- के.जी. बालकृष्ण पिल्ले

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