चालीस के बाद कैसे दिखें युवा

चालीस के बाद कैसे दिखें युवा

अच्छा स्वास्थ्य हमारे अच्छे आहार विहार का दर्पण होता है। हमारे गलत पथ्यापथ्य के कारण ही शरीर बेडौल हो जाता है, तोंद बढ़ जाती है, गला पफ्फी हो जाता है, सिर के बाल कम हो जाते हैं, चमड़ी पर झुर्रियां पड़ जाती हैं। इसी को तो वृद्धावस्था कहते हैं। जिन्दगी की सक्रि यता आपके व्यक्तित्व को निखारती है। कुछ सावधानी व जागरूकता हमारे स्वास्थ्य की रक्षा कर सकते हैं।

. प्रात: जल्दी उठ कर भ्रमण करें। पेट साफ रखें। पैदल चलें।

. तनाव से दूर रहने का प्रयास करें। आशावादी रहें।

. थोड़ा खाएं, अच्छा खाएं, अधिक जिएं।

. पानी ज्यादा पिएं। लस्सी म_ा, जूस, सूप ज्यादा पिएं। वसायुक्त आहार, तले परांठे कम खाएं।

. नशा नाश करता है। कोई भी नशा मत करें।

. मन में जीवन जीने का उत्साह, परिवार का हंसमुख वातावरण, चुस्त जीवन शैली, संकल्प में महाशक्ति होती है। अच्छे विचार और दीर्घ जीवन जीने की आरजू दीर्घजीवी बनाती है।

. रेशेदार भोजन लें, धूप सेवन करें। गर्म जल से स्नान करें। व्यस्त जीवन शैली रखें। रचनात्मक कार्यों में लगे रहें।

. अपनी हाबीज डवल्प करें। नया सीखें। अच्छी किताबें पढ़ें।

. आपका पहनावा अच्छा साफ-सुथरा आपके मन के मुताबिक हो। हेयरस्टाइल ठीक हो। प्रति दिन शेव करें। यदि युवती हैं तो अपने कपड़े सलीके से ही पहनें। चेहरे के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।

. सप्ताह में एक दिन सिर की मालिश और तेल से बदन की मसाज जरूर करें। रक्त का संचार ठीक रहता है।

. आपकी बातचीत करने का ढंग आपके अच्छे व्यक्तित्व, स्वस्थ मन और अच्छे संस्कार होने का परिचायक है। थोड़ा, नपा तुला और ठीक बोलें।

. समय को व्यर्थ बातों में, व्यर्थ चुगली निंदा, ईष्र्या में मत बिताएं। चिंता त्यागे अधिक जिएं।

. हंसे, प्रसन्न रहें। मनोरंजन के लिए वक्त निकालें। हंसमुख स्वभाव वाले बीमार कम होते हैं, उनकी रोग प्रतिरक्षक शक्ति बढ़ जाती है। वे दीर्घजीवी होते हैं।

. एंटी आक्सीडेंट युक्त पोषण लें। च्वयनप्राश, आंवला आपके जीवन का कायाकल्प कर देगा। प्रतिदिन सेवन करें। लहसुन का प्रयोग प्रतिदिन करें।

. पंद्रह दिन में एक बार उपवास करें। शरीर को भी आराम करने दें। आंतरिक अंगों को भी रीचार्ज होने का समय दें।

. सदा अपने आपको उमंग व उत्साह से भरा रखें। अच्छा संगीत सुनें। शास्त्रीय संगीत से जुड़ें। प्रकृति की गोद में रहें। हरी सब्जियां, ताजे फल, ताजा गर्म भोजन लें। चित्त को चिंता मुक्त रखने की कला जानें। मेडिटेशन करें।

ञ्चविजेन्द्र कोहली गुरूदासपुरी

Share it
Top