आधुनिक नारी के लिए सुविधाजनक हैं पश्चिमी परिधान

आधुनिक नारी के लिए सुविधाजनक हैं पश्चिमी परिधान

आज के युग की महिलाओं में और 3० साल पहले की महिलाओं में बहुत अंतर देखा गया है। अब महिलाएं चारदीवारी में बंद न होकर पढ़ लिख कर बाहरी समाज में पुरूषों की बराबरी करती हैं। अब वे कपड़ों में भी पुरूषों के परिधान पैन्ट कमीज, जीन्स टॉप पहनना पसंद करती हैं जिनमें वे अधिक चुस्त लगती हैं। उन परिधानों में वह स्वयं को अधिक फ्री महसूस करती हैं।

स्वछन्दता का अनुभव:- भारतीय परिधान उनको अधिक शोभनीय लगते हैं जिनकी गरिमा वे समारोहों में पहनकर बनाए रखना चाहती हैं। हर रोज की भागदौड़ भरी जिंदगी में वे स्वयं को स्वच्छन्द महसूस करती हैं। पश्चिमी परिधानों में आपको अधिक कपड़ों का संग्रह इक_ा करके नहीं रखना पड़ता।

यदि आपके पास काली पैंट है तो उसके साथ आप कई रंगों की टाप या टी शर्ट पहन सकती हैं। जीन के साथ भी ऐसा चल जाता है जिन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में पहन कर स्वयं को सिरदर्द से बचा सकती हैं। यदि आप स्कर्ट वगैरह पहनती हैं तो उन टॉप्स को स्कर्ट के साथ भी प्रयोग में ला सकती हैं। पश्चिमी परिधानों के साथ मैचिंग आभूषणों, पर्स और जूतों की अधिक आवश्यकता नहीं पड़ती।

समय की बचत:- पश्चिमी परिधान पहनने में अधिक सुविधाजनक होते हैं। कम समय में आप आसानी से तैयार हो जाते हैं। सूटों के साथ दुपट्टे ढूंढने में, साड़ी को बांधने और संभालने में अधिक मेहनत की जरूरत पड़ती है और समय भी अधिक लगता है।

शरीर की बनावट के अनुकूल:- पश्चिमी परिधान पतले लोगों की शोभा बढ़ाते हैं। यदि आपकी टांगें भारी हैं और स्वयं पतली हैं तो पश्चिमी परिधान आप पर खूब फबेंगे। ठीक सेहत वाले लोग भी इसमें अधिक मोटे नहीं लगते। वे लम्बी टाइट टॉप पहन सकते हैं। आप इस पोशाक में अपने आप को उतना आरामदेह महसूस करेंगे जितना सलवार कुरते में।

इस पोशाक का यह सबसे बड़ा सुख है कि एक बार आप इन पोशाकों को पहनने के आदी बन जाने पर अपनी फिगर के लिए भी सचेत हो जाएंगे क्योंकि मोटे होने पर जींस और ट्राउजर की कमर में फालतू कपड़ा नहीं होता, जिसे आप खुलवा कर प्रयोग कर सकें। इस प्रकार स्वयं को उन कपड़ों में फिट रखने का प्रयास करेंगे।

पति पत्नी का एक नाप होने पर टी शर्टस का उपयोग दोनों मिलकर कर सकते हैं जिससे धन की भी बचत होगी और अल्मारी में भी भीड़ कम रहेगी। युवा बेटी और युवा बेटे के कुछ परिधान भी मिल जुल कर प्रयोग में ला सकते हैं।

पश्चिमी परिधान के साथ जूतों की अधिक विभिन्नता की भी आवश्यकता नहीं होती। सर्दियों में बंद जूते प्रत्येक ट्राउजर और जीन्स पर चल जाते हैं। गर्मियों में थोड़ी ऊंची एड़ी के सैंडिल पहन सकते हैं।

- नीतू गुप्ता

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