अनुचित है लड़की पर शादी थोपना

अनुचित है लड़की पर शादी थोपना

भारतीय समाज में परिपक्व सोच, आत्मनिर्भरता, उच्चशिक्षा, स्वतंत्र विचारोंन्मुख निर्भीक युवतियों का एक ऐसा वर्ग उभरकर सामने आ रहा है जो विवाह को मात्र जीवन की अनिवार्यता नहीं मानता अपितु उसे जीवन का एक महत्त्वपूर्ण पक्ष मानकर इस अहम मुद्दे पर विचार करने में यकीन करता है। ऐसी महिलाओं को चाहिए कि वे जीवन साथी का चुनाव स्वयं तो करें किंतु निर्णय को धरातल पर उतर कर ही करें।

युवतियां अगर स्वयं को शिक्षित व आर्थिक रूप से स्वतंत्र मानकर असाधारण समझने की भूल करती हैं तो उन्हें योग्य वर आजीवन नहीं मिल पाता जिसकी प्रमुख वजह है कि उन्हें हर व्यक्ति में कमी नजर आती है। ऐसी युवतियां स्वप्न लोक के राजकुमार की कल्पना कर उसे खोजती ही रहती हैं।

किसी भी पुरूष में एक साथ सभी गुणों का मिलना असंभव होता है। पुरूष हो या स्त्री, दोनों ही खूबियों और खामियों से मिलकर बने हैं। अपनी अपेक्षाओं को कुछ कम करके आंकने पर वर की कमी नहीं मिलेगी। अपने जीवनसाथी में अपनी पसंद के एक दो गुण ही देखकर संतुष्ट होकर समर्पण की भावना से सामजंस्य बिठाकर अपना जीवन बिताइये।

जिस व्यक्ति को आप अपने जीवनसाथी के रूप में चुनना चाहती हैं, पहले यह जान लें कि वह विवाह योग्य है या नहीं। विवाह के प्रति उसकी रूचि है अथवा नहीं। वह तलाकशुदा है, कई लड़कियों से संबंध रख चुका है। अगर ऐसा है तो संबंध तोडऩे के कारण जानिये। सार्वजनिक तौर पर बातचीत के दौरान नारी स्वतंत्रता पर उसके विचारों को जानिये। पत्नी से साझेदारी चाहता है या सेवानिष्ठ पत्नी की कामना करता है? आपके पति के रूप में सक्षम है या नहीं, भावनात्मक परिपक्वता, उच्च मानसिकता, मिलनसार स्वभाव और विश्वसनीय है अथवा नहीं। पुरूष के रूप की अपेक्षा गुणों को अधिक महत्त्व दीजिये।

यदि आपको लगता है कि जिसे आप पसंद कर रही हैं, वह विवाह के प्रति उदासीन भी नहीं है और आपमें रूचि भी नहीं रखता तो विवाह के प्रति उसका फैसला स्पष्ट रूप से जानने का प्रयास कीजिये। वह हर पल प्रेम का इजहार करता है तो वह विश्वसनीय नहीं है। उसे अपना जीवनसाथी कदापि न चुनें।

अगर कोई व्यक्ति आपकी आवश्यकताओं, समस्याओं व दुखों को समझते हुए उनमें आपके साथ रहता है, विशेष अवसरों पर आपके लिए समय निकालता है, अपने मित्रों से आपकी भेंट करवाता है और आपके प्रति अपनी इस भावना को सीधे न कहकर अन्य तरीकों से व्यक्त करता है तो समझिये वह व्यक्ति निष्ठावान है। आप उस पर पूरा भरोसा कर सकती हैं।

यदि कोई व्यक्ति आपकी कल्पना के जीवनसाथी के अनुरूप है किंतु मिलने पर वह शांत रहता है, सदैव औपचारिक बात करता है तो समझिये मामला ठीक नहीं है। जहां प्यार पनपता है वहां अधिकार की भावना भी बलवती होती है और दोनों के बीच नोक झोंक, टकराव मनुहार होना जरूरी होता है। ऐसे में पुरूष को सही समझने में मदद मिलती है। वह रूठने पर कैसे मनाता है? कितनी देर रूठा रह सकता है? मनाने की पहल करता है या नहीं? आदि बातें महत्त्वपूर्ण होती हैं अगर यह सब होता है तो समझिये सही मंजिल की तरफ बढ़ा जा रहा है।

कभी-कभी ऐसा भी होता है कि मनचाहा जीवनसाथी मिल जाता है किंतु वह विवाह की पहल नहीं करता। ऐसे में अगर युवती संकोच में ही पड़ी रही तो संभव है जीवन में इंतजार ही करती रह जाये। आपकी पहल करने पर वह कोई स्पष्ट जवाब नहीं देता अथवा अचानक मिलना कम कर देता है तो समझिये कारण नकारात्मक है और वहां से हट जाइये क्योंकि आज समाज में हो रहे बदलाव से पुरूष भी अछूता नहीं है। यदि पुरूष पहल से कतराये तो उसे छोडऩे में ही भलाई है क्योंकि ऐसे पुरूष नारी को बराबरी की भागीदारी नहीं दे सकते।

जीवनसाथी का चुनाव आप स्वयं अवश्य करें किंतु निर्णय सूझबूझ और बुद्धिमानी से ही लें। बड़ों की राय और आपकी पसंद मिलकर उत्तम जीवनसाथी का चुनाव आसान बना सकती है।

-रश्मि निगम

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