यह कैसा प्यार है?

यह कैसा प्यार है?

सीमा बहुत ही महत्त्वाकांक्षी व जुझारू लड़की थी। पिता के देहांत के बाद तरूणा ने पढ़ाई करने के साथ-साथ नौकरी करने का फैसला किया जिसमें उसे और उसकी मां को आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े। इसके लिए उसे ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा क्योंकि उसकी एक होटल में रिसेप्शनिस्ट के पद पर नियुक्ति हो गई।

अनुज जब एक पार्टी अटेंड करने के लिए होटल आया तो सीमा की मनमोहक काया को देखकर मोहित हो गया। इसके बाद वह होटल में दिन में कई-कई बार आने लगा। अनुज के बार-बार आने और अपने को निहारते देख सीमा समझ गयी कि वह उसके लिए बार-बार होटल में आता है।

सीमा के दिल में अनुज के प्रति प्यार की भावनाएं उत्पन्न होने लगी थीं। यह बात अनुज भी जानता था। एक दिन जब अनुज ने सीमा से प्यार का इजहार किया तो सीमा ने भी उसको स्वीकृति दे दी। अब दोनों रोज मिलते और विचारों का आदान-प्रदान करते। अनुज को आभास हो गया था कि सीमा के ख्वाब बहुत ऊंचे हैं। अगर वह किसी उच्च पद पर आसीन हो गयी तो वह उसके हाथ से निकल जायेगी। अनुज के पिता टेलीफोन विभाग में तृतीय श्रेणी के कर्मचारी थे। निम्न श्रेणी के परिवार से होने के कारण वह सीमा को अपने घर कभी नहीं ले गया था। वह नहीं चाहता था कि उसका पारिवारिक स्तर सीमा देखे। सीमा को वश में रखने के लिए उसने किसी तरह से एक पुरानी कार खरीद ली। इसमें वह सीमा को बैठा कर खूब सैर कराता था। एक दिन सीमा की मां, सीमा के साथ अनुज के घर जा पहुंची। जब दोनों ने अनुज के घर को देखा तो वे समझ गयी कि उनको अनुज ने धोखे में रखा है। सीमा ने अब अनुज से मिलना छोड़ दिया।

एक दिन जब अनुज ने सीमा को दूसरे युवक के साथ प्यार जताते हुए देखा तो वह बर्दाश्त नहीं कर पाया। अगले दिन वह अपनी कार से सीमा के घर गया। वहां उसने सीमा को पीटा तो उसकी मां ने उसका विरोध किया तो उसने रिवाल्वर से सीमा की मां को मार दिया। उसके बाद उसने सीमा को भी गोली मार दी। इसके बाद अपने फंस जाने और सीमा को मार देने के अपराध बोध के कारण उसने अपने आपको भी गोली मार ली।

इस घटना से हमारे सामने एक सवाल उठ खड़ा होता है कि क्या प्यार में पागल होकर कोई इस तरह का कृत्य भी कर सकता है? जिसके जवाब में केवल इतना ही कहा जा सकता है कि आज का युवा वर्ग प्यार का मतलब ही भूल चुका है। वह प्यार में पड़कर अपने आपको लैला-मजनू या रोमियो-जूलियट समझने लगता है लेकिन उनकी भावनाओं को आत्मसात करना तो दूर, वहां तक पहुंच भी नहीं पाता।

प्यार की नींव विश्वास और त्याग पर रखी होती है। यह कोई निश्चित नहीं है कि आप प्यार का सफर तय करते हुए अपनी मंजिल को प्राप्त कर लें अर्थात आप जिससे प्यार करें, वह आपको मिल ही जाये। कभी परिस्थिति या मजबूरीवश या किसी अन्य कारण से ऐसा हो जाता है। आज के युवाओं को सच्चे प्रेम की भावनाओं से प्रेरित होना चाहिए व उनको आत्मसात करना चाहिए। यह सच्चे प्रेम की निशानी है।

- नितिन कुमार शर्मा

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