बिना खर्च की औषधि है उपवास

बिना खर्च की औषधि है उपवास

आज की दौडऩे-भागने वाली जिंदगी, व्यस्त दिनचर्या ने औरों से आगे बढऩे में लीन मानव के शरीर को अनेक रोगों का घर बना रखा है। यद्यपि पहले की अपेक्षा चिकित्सा विज्ञान ने आज दिन दूनी-रात-चौगुनी उन्नति कर ली है किन्तु फिर भी रोगों की संख्या कम होने के बजाय बढ़ती ही जा रही है।

दरअसल बीमारियों का मानव-शरीर पर हमला बोलने का मुख्य कारण उसका अनियमित खान-पान है। आज का बाजार फास्ट फूड से भरा हुआ है जो न तो पौष्टिक होता है और न ही स्वास्थ्यवर्द्धक। मानव ने क्षुधा शांत करने व स्वाद के चक्कर में साधारण एवं संतुलित भोजन करने की अपेक्षा ऐसे भोजन को ज्यादा तवज्जों दे रखी है। फलत: उसके निरन्तर सेवन से वह हर समय किसी न किसी गंभीर रोग से जकड़ा रहता है।

आज के युग में रोगों से बचने एवं अपने खान-पान को नियमित एवं संतुलित रखने का सर्वोत्तम उपाय 'उपवास' है। आयुर्वेद के प्रसिद्ध ग्रंथ 'चरक संहिता' से लेकर आज के विभिन्न चिकित्सीय शोधों ने भी उपवास के अनेक लाभ बताए हैं। सामान्यत: उपवास का अर्थ भोजन के त्याग से है किन्तु वास्तविक अर्थ किसी उद्देश्य आदि की पूर्ति हेतु एक निश्चित ईश्वर के प्रति आस्था प्रकट करने या रोगादि से मुक्ति पाना भी हो सकता है।

भारत एक धार्मिक देश है इसलिए यहां की संस्कृति में उपवास का अपना एक धार्मिक महत्त्व भी है। भारतीय मनीषियों ने शौर्य-बल प्राप्त करने, ईश्वर के प्रति अपनी आस्था प्रकट करने, धर्म को चरम पर पहुंचाने आदि कार्यों में उपवास का सदैव सहारा लिया है। शायद इसी कारण भारतीय मनीषी व साधु-संत लोग दीर्घायु एवं निरोगी रहते थे।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो पुरूषों की अपेक्षा महिलाएं उपवास रखने के कारण ज्यादा स्वस्थ रहती हैं।

उपवास की सलाह क्यों:- चरक संहिता से लेकर आज के शरीर विज्ञानी भी मानते हैं कि उपवास का चिकित्सीय महत्त्व भी है। उनका मानना है कि सप्ताह में कम से कम एक बार उपवास रखने से पाचन-तंत्र दुरूस्त रहता है। दरअसल भोजन को पचाने में पाचन-तंत्र को काफी मेहनत करती पड़ती है। इस कारण उसे आराम करने का समय नहीं मिल पाता और पाचन क्रि या मंद पडऩे लगती है। इससे भोजन सही ढंग से नहीं पच पाता। फलत: अनेक व्याधियां जैसे कब्ज, अम्लपित्त, गैस बनना, मधुमेह, मोटापा आदि अन्य जन्म लेने लगती हैं। इन सबसे छुटकारा पाने के लिए शरीर विज्ञानी सप्ताह में एक बार उपवास रखने की सलाह देते हैं।

उपवास से लाभ:- उपवास रखने से प्राप्त होने वाले लाभों को दो भागों में बांट सकते हैं जिनका तन व मन दोनों पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।

धार्मिक दृष्टिकोण से लाभ:- यदि पूर्ण विधि-विधान एवं निष्ठापूर्वक उपवास रखा जाए तो आरोग्यता तो बढ़ती ही है,आत्मबल व संकल्पशक्ति में भी वृद्धि होती है। मन में सात्विक एवं सकारात्मक विचार आते हैं। फलत: व्यक्ति अनेक मानसिक व्याधियों जैसे तनाव, अवसाद, हीनता आदि से मुक्त रहता है। सोचने-समझने की शक्ति व एकाग्रता बढ़ती है। निरूक्त नामक ग्रंथ में उपवास को 'सत्कर्म' एवं 'सत्संकल्प' की संज्ञा दी गयी है। कई विद्वानों ने इसे तपस्या का अंग एवं सुखी जीवन का रहस्य भी बताया है।

इसके अलावा उपवास के दिन व्यक्ति प्राय: गंभीरतापूर्वक नियम-धर्म से चलता है। वह इस दिन हल्का-फुल्का, सादा, कम तल-भुना, फल, मिष्ठान आदि भोजन के रूप में लेता है। गाली-गलौज, क्रोध व मद्यपान आदि से दूर रहता है। कम बोलता है व हर समय ईश-भक्ति में लगा रहता है।

इसके पीछे एक धार्मिक आस्था यह भी होती है कि यदि नियम-धर्म से न चला जाए तो ईश्वर नाराज हो सकते हैं। अत: उपवास से व्यक्ति अनुशासित एवं खानपान के प्रति जागरूक अवश्य बन सकता है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से लाभ:- वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो उपवास रोगों के लिए महौषधि है। इससे पाचनतंत्र दुरूस्त रहता है। फलत: भोजन का पाचन ढंग से हो जाता है। शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थों का निष्कासन आसानी से हो जाता है।

यही नहीं, अनुसंधानियों का यह भी कहना है कि दुर्बलता, रक्तअल्पता, भूख न लगना, सांस फूलना, आमाशय के कैंसर आदि व्याधियां तो दूर होती हैं, विभिन्न उदर रोग जैसे कब्ज, आंव, संग्रहणी, बवासीर आदि से भी मुक्ति मिलती है। ह्नदय की धमनियां लंबे समय तक स्वस्थ रहती हैं क्योंकि हर सप्ताह उपवास रखने से कोलेस्ट्राल की मात्रा घटने लगती है जो धमनियों के लिए लाभदायक है।

उपवास से मोटापा भी नियंत्रण में रहता है। वजन कम रहने से शरीर का आकार आकर्षक एवं सुडौल रहता है। चेहरे पर असमय उभरी झुर्रियां, दाग-धब्बे आदि दूर रहते हैं। चमक एवं सुंदरता बढ़ती है। काया निरोगी रहती है।

सावधानियां:- एक-दो दिन का उपवास तो ठीक है किन्तु अधिक दिनों का उपवास चिकित्सक की देख-रेख में रखें।

- रोगी, वृद्ध, बालक, बीमारी से दुबले, गर्भवती व स्तनपान कराने वाली स्त्रियों को लंबे समय तक उपवास नहीं करवाना चाहिए।

- उपवास के दौरान दूध, मौसमी फल, मट्ठा, हरी सब्जियां, सलाद आदि हल्के एवं सन्तुलित भोजन ही लें। भारी व देर से पचने वाले भोजन से दूर रहें। उपवास के बाद ठूंस-ठूंस के न खाएं नहीं तो उपवास से होने वाले लाभों से आपको शीघ्र ही वंचित होना पड़ेगा।

अंत में कहा जा सकता है कि उपवास के ढेरों लाभ हैं। यह हमारे भोजन को नियमित एवं संतुलित तो रखता ही है, दिनचर्या का निर्धारण भी करता है। एक बार बाल गंगाधर तिलक जी ने कहा था कि शरीर को रोगी एवं निर्बल रखने के समान कोई दूसरा पाप नहीं है। उपवास से आप इस पाप से मुक्ति पा सकते हैं।

- आकाश अग्रवाल

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