घर से क्यों भागती हैं लड़कियां

घर से क्यों भागती हैं लड़कियां

भारतीय समाज में लड़कियों का घर से भाग जाना बहुत ही कलंकित कार्य माना जाता है। लड़की अगर एक रात भी अपने घर से बाहर बिता दे तो उसे उसके माता पिता तक स्वीकार नहीं कर पाते। ऐसे में लड़कियां या तो आत्महत्या कर लेती हैं या फिर मजबूरन उन्हें गलत रास्ते अपनाने पड़ते हैं।

देखा गया है कि घर से भागने वाली लड़कियों में अधिकतर लड़कियां वे होती हैं जिन पर निगरानी की जाती है और जरूरत से ज्यादा प्रतिबंध लगाए जाते हैं। ऐसे हालात में उन्हें समझाने वाला, उन्हें प्यार करने वाला कोई भी नहीं होता। ऐसे में अगर उन्हें कोई ऐसा व्यक्ति मिल जाता है जो उन्हें थोड़ा सा भी प्यार दे देता है तो लड़कियां उसको अपना सब कुछ समझ लेने की भूल कर बैठती हैं। उसकी कही हर बात को वे सच समझने लगती हैं। उसके एक इशारे पर अपना घर तक छोड़ कर भाग जाती हैं।

देखा जाता है कि हमारे यहां लड़के व लड़कियों के पालन-पोषण में बहुत फर्क किया जाता है। जो माता पिता अपने लड़कों को हर तरह की छूट देते हैं वही लड़कियों को कैद में रखते हैं। लड़कियां अपने आपको उपेक्षित महसूस करती हैं और उनमें हीन-भावना उत्पन्न होने लगती है। उनमें अपने परिवार के प्रति बहुत गुस्सा आने लगता है और अपने पैरों पर खड़े होने की चाह में ऐसी लड़कियां अक्सर घर से भाग जाने की गलती कर बैठती हैं।

एक तरफ सुख सुविधाओं से सम्पन्न घरों की लड़कियां माता-पिता के प्यार से वंचित होकर अपने जीवन से ऊब जाती हैं व घर छोड़ कर भाग जाती हैं, वहीं गरीब परिवारों की लड़किया सम्पन्न जीवन का सपना अपनी आंखों में संजोए हुए अपना घर छोड़ देती हैं। अक्सर देखा गया है कि ऐसी लड़कियों को समाज के कुछ घिनौने व्यक्ति बहला-फुसलाकर वेश्यावृत्ति तक के लिए मजबूर कर देते हैं।

मध्यमवर्गीय परिवारों में आज भी अपने आचार-विचार और रीति-रिवाज को सहेज कर रखा जाता है और इसी कारण लड़कियों पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं। ऐसे में लड़कियां उन प्रतिबंधों को तोडऩे के लिए घरों से भाग जाती हैं।

दूसरा कारण यह भी देखा गया है कि मध्यवर्गीय परिवारों में अभिभावक को एक सामाजिक भय बना रहता है कि यदि उनकी लड़की से कुछ गलत कदम उठ गया तो समाज क्या कहेगा। इसलिए भी वे अपनी लड़कियों पर कठोर नियंत्रण रखते हैं और जब विचारों का आपस में टकराव होने लगता है तो लड़कियां घर छोड़ कर भागने पर विवश हो जाती हैं।

झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाली लड़कियों पर उनकी माताएं काफी जुल्म ढाती हैं। बचपन से ही उनसे उनकी सामथ्र्य से ज्यादा काम कराए जाते हैं जब वे थोड़ी बड़ी होकर दूसरों के घरों में काम करने जाती हैं तो उन्हें टेलीविजन आदि से बहुत कुछ पता चलता है। वे यह सोचने पर मजबूर हो जाती हैं कि अगर वे घर से भाग जाएं जो ज्यादा अच्छे तरीके से जी सकती हैं। शारीरिक क्षमता से अधिक काम और आराम की जिंदगी बिताने की इच्छा मौका मिलते ही उन्हें भागने को प्रेरित करती है।

- हरमिन्दर कौर

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