विवाह की वेदी पर भी निभाएं शिष्टाचार

विवाह की वेदी पर भी निभाएं शिष्टाचार

कामिनी अपने भाई साहिल की शादी के बाद घर लौटी तो उसके उदास चेहरे को देखकर उसके पति अंशुल, जो किसी कारणवश साहिल की शादी में शामिल नहीं हो पाए थे, को बेहद हैरानी हुई क्योंकि कामिनी का एक ही भाई था और वह उसकी शादी को लेकर बहुत अधिक उत्साहित थी। इसलिए जब अंशुल को उसके चेहरे पर प्रसन्नता की बजाय उदासी की झलक मिली तो उन्होंने कामिनी से इसका कारण पूछा।

वह रूआंसे स्वर में बोली,'क्या बताऊं अंशु, बस यूं समझो कि मैं नाहक ही शादी में गई। आप नहीं जा पाए तो अच्छा ही हुआ।'

'लेकिन बताओ तो सही, हुआ क्या?' अंशुल ने बेचैनी से पूछा। 'साहिल विवाह के मंडप में पहुंचते ही अपनी दुल्हन के साथ बातें करने में खो गया और उसने किसी को भी अहमियत नहीं दी। यही नहीं, उन दोनों ने ही खाने के वक्त किसी को अपने पास नहीं बैठने दिया। यहां तक कि जब मैं उन दोनों को चम्मच से खाना खिलाने लगी तो साहिल ने यह कहकर मेरा अपमान कर दिया कि दीदी, हम स्वयं खा लेंगे, बच्चे तो नहीं हैं। 'कुछ वर-वधू तो यह बिल्कुल ही भूल जाते हैं कि जो लोग इतना खर्च उठा कर व अनेक परेशानियां झेलकर सिर्फ उन्हें शुभकामनाएं देने के लिए ही इकटठे हुए हैं, उनके प्रति भी उनका कोई कर्तव्य बनता है। वे तो बस अपनी शादी के उन पलों को यादगार बनाने में लगे रहते हैं परंतु वे इतना नहीं समझ पाते कि ऐसा करके वे दोनों पक्ष के मित्रों व संबंधियों का अपमान कर रहे हैं। इस तरह मेहमानों के लिए शादी एक कड़वा अनुभव ही सिद्ध होती है। यदि आप चाहते हैं कि आपकी शादी सबके लिए एक सुखद अनुभव बनी रहे तो इसके लिए कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखें।

मर्यादा में रहें:- भारतीय संस्कृति में लाज-शर्म को औरत का गहना माना जाता है परंतु आज के आधुनिक समाज में शायद यह बात काफी लोगों को अटपटी सी लग सकती है लेकिन यह तो तय है कि दुल्हन थोड़ी-सी शरमाती व सकुचाती ही अच्छी लगती है। कहने का तात्पर्य यह नहीं कि आप घूंघट में लिपटी हुई, सहमी-सहमी सी रहें। वैसे भी ऐसे मौके पर मर्यादित आचरण आपके लिए अत्यंत आवश्क है। यह बात दुल्हा-दुल्हन दोनों पर ही लागू होती है। एक-दूसरे को कोहनी मारना, हाथों में हाथ लेना, आंखों से इशारे करना या फिर जोर-जोर से हंसना ऐसे समय में बिलकुल शोभा नहीं देता।

कई दुल्हा-दुल्हन ये सब हरकतें अन्य लोगों के सामने अपना प्यार प्रदर्शित करने के लिए करते हैं लेकिन ऐसे आचरण से उनकी खिल्ली ही उड़ती है। उन्हें यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि प्यार प्रदर्शित करने की वस्तु नहीं होती अत: वे अपनी शादी के दिन मर्यादा की सीमारेखा को पार न करें।

दूसरों के मजाक का बुरा न मानें:- विवाह का वक्त थोड़ी चुहलबाजी, छेड़छाड़, मजाक व मस्ती का होता है। ऐसे मौके पर दोस्त/सहेलियां तो क्या, बल्कि सभी छोटे-बड़े रिश्तेदार भी दुल्हा-दुल्हन दोनों के लिए यह आवश्यक है कि वे इस मस्ती भरे माहौल में सबके साथ खुशी से शामिल हों। हो सकता है, आपको किसी का मजाक बुरा लगे परंतु इसे अपने मन में ही रखें। न तो चेहरे पर गुस्से के भाव लाएं व न ही पलट कर जवाब दें क्योंकि आपके ऐसा करने पर काफी लोग आपसे नाराज हो जाएंगे। हंसी-खुशी के इस माहौल में अपनी सहनशक्ति बनाए रखें।

दोनों पक्ष के रिश्तेदारों को बराबर सम्मान दें:- विवाह में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपनी शादी के बाद आपको दोबारा कभी नहीं मिलते, इसीलिए शादी में सम्मिलित हर मेहमान का अभिवादन खुशी से स्वीकार करें व सभी को उचित सम्मान दें।

आप दोनों को ही चाहिए कि आप सिर्फ अपने-अपने रिश्तेदारों को ही नहीं बल्कि दोनों पक्ष के रिश्तेदारों को बराबर सम्मान दें।

खाने के वक्त भी दोनों पक्ष के मेहमान आपको अपने हाथों से खिलाना चाहते हैं तो ऐसे में आपको उनकी भावनाओं की कद्र करनी चाहिए अत: उन्हें मना न करें बल्कि उनके आग्रह पर आप एक-एक निवाला सभी के हाथों से खाएं।

चेहरे पर थकान के भाव न लाएं:- यह तो सभी जानते हैं कि विवाह के अवसर पर दुल्हा-दुल्हन काफी थक जाते हैं परंतु उन्हें यह भी याद रखना चाहिए कि उनकी शादी में सम्मिलित मेहमानों को भी कोई कम थकान नहीं होती। अत: थकान के कारण अपने खूबसूरत मुखड़े को रोनी सूरत में तब्दील न करें और साथ ही थकान का बहाना करके सबसे अलग होकर न रहें बल्कि सबके बीच रहकर इस शुभ अवसर का आनन्द लें व चेहरे पर खुशी बनाए रखें।

- भाषणा बांसल

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