तलाक किसी समस्या का समाधान नहीं

तलाक किसी समस्या का समाधान नहीं

आज स्वयं को आधुनिक बताने वाले पति-पत्नी की नासमझी के कारण परिवार बिखर रहे हैं। बच्चे अपने आप को अभावग्रस्त यानी अपराधी मान रहे हैं। बड़ों का अनादर व अपनी मनमानी के कारण हल्का सा मनमुटाव भी उन्हें तलाक तक पहुंचा रहा है।

तलाक से ही बच्चे की सामाजिक प्रतिष्ठा का सवाल जुड़ा है। यदि वह मां के साथ रह रहा है तो उसे लम्बे समय तक सामाजिक प्रतिष्ठा पाने का इंतजार करना पड़ेगा। कारण, भले ही हम आधुनिक हैं, लेकिन आज भी तलाकशुदा महिला को समाज चरित्रहीन या अपराधी ही मान रहा है।

जरूरी नहीं कि तलाक का कारण हर बार आपसी सामंजस्य का अभाव या दहेज का अभाव ही हो। आज तलाक तक पहुंचने के कारण और भी हैं जैसे पति का जुआरी या शराबी होना, पत्नी का बदचलन होना, पति द्वारा पत्नी का शोषण या पत्नी द्वारा पति का शोषण लेकिन हर परिस्थिति में अन्याय उनकी सन्तान के साथ ही होता है।

परंपरागत समाज का दृढ़बंधन बेशक लोग अब कानूनी औपचारिकताओं के बाद ही तोड़ रहे हैं पर पति और पत्नी के अंतरंग संबंधों से जन्मी औलाद को बांटा नहीं जा सकता पर उसके दो टुकड़े करके एक पति और दूसरा पत्नी को अदालत दे रही है।

आज आधुनिकता का चक्र वात स्त्री पुरूष के धैर्य को सुखा रहा है। पहले बड़ेे से बड़े विवाद भी आपसी बातचीत या घर के किसी बड़े बूढ़े के हस्तक्षेप से आसानी से सुलझ जाते थे लेकिन बड़ों का अनादर व अपनी मनमानी के आगे हल्का सा मनमुटाव भी अब तलाक तक पहुंच रहा है।

इसलिए पति-पत्नी को अच्छी तरह सोच विचार कर लेने के बाद ही संबंध विच्छेद की कानूनी प्रक्रि या शुरू करनी चाहिए। अत: दूसरे के बहलाने फुसलाने या भड़काने अथवा आवेश में आकर तलाक जैसा गलत कदम नहीं उठाना चाहिए। तलाक सिर्फ महिला और पुरूष के लिए ही नहीं बल्कि उनकी संतान के लिए भी अभिशाप है। बिना सोचे-समझे आपकी एक छोटी सी भूल जिंदगी भर के लिए दुख दर्द का कारण बन सकती है।

ऐसा बहुत कम होता है कि तलाक के बाद पति और पत्नी पहले से ज्यादा खुश रहेंगे। इतना जरूर होता है कि दोनों आजाद हो जाते हैं लेकिन असली परीक्षा तो इसके बाद ही शुरू होती है। तलाक के बाद महिला अपने पीहर ही जाती है क्योंकि वो ही उसे पूर्ण सुरक्षित जगह लगती है लेकिन वहां पहले से ही विवाहित भाई हैं तो थोड़े समय बाद ही भाभियों को बुरी लगने लगेगी। अगर महिला अकेली रहना चाहेगी तो सौ झंझट हो जाएंगे।

इसलिए आज तलाक जैसे तूफान को रोकना है क्योंकि यह आधुनिक समाज को अपनी चपेट में ले रहा है। जब दंपति अपने मन से अहमभाव व आलसी मनमुटाव को निकाल देंगे, तब ही ऐसे तूफान से वैवाहिक संबंध बचेंगे।

- मधु मिश्रा

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