क्या आपकी शादी नहीं हो पा रही है?

क्या आपकी शादी नहीं हो पा रही है?

जब आप युवा हो जाती हैं, आप शादी के अर्थ को अच्छी तरह समझ लेती हैं। वस्तुत: शादी एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है, बहुत बड़ा समर्पण है। आपके माता-पिता आपकी शादी की चिंता में इतने ज्यादा डूबे रहते हैं कि वे अनेक बार आपकी कमजोरियों व खूबियों से अलग हटकर वर मिलते ही आपकी शादी तय कर देना चाहते हैं।

वे मात्र लड़के के खानदान व उसकी जेब पर नजर रखते हैं। उसके ख्यालात, मानसिकता, गुण-अवगुण पर ध्यान नहीं देते। इस क्र म में न जाने कितनी बार आपको वर पक्ष के सामने सज-धज कर आना पड़ता है।

इस तरह आपकी छवि धूमिल होने लगती है। बार-बार वर-पक्ष के सामने पेश की गई लड़की पर संकुचित समाज की नजरें बड़ी जल्द पड़ती हैं। फिर आप उस फ्लाप फिल्म की तरह बन पड़ती हैं, जिसकी जगहंसाई हुआ करती है।

सही मायने में परम्परा के नाम पर आपके साथ यह सब कुछ होता है। माता-पिता आप पर ज्यादा से ज्यादा सज-संवर कर लड़के के सामने आने के लिए दबाव डालते हैं, अच्छी-खासी राशि भी खर्च कर बैठते हैं लेकिन जब आपका रिश्ता तय नहीं हो पाता, आप तो मायूस होती ही हैं, साथ-साथ आपके माता-पिता भी मायूस होते हैं। अनेक बार तो माता-पिता आपको बोझ समझकर कोसने भी लगते हैं, आपकी कमजोरी को लेकर लोगों के सामने खुल जाने में उन्हें देरी नहीं लगती। एक तरह की कुंठा उन्हें घेर लेती है।

ऐसी स्थिति में आप खुद को दुनियां की सबसे बद्नसीब लड़की समझने लगती हैं। और तो और, आत्महत्या तक की बात मन में ले आती हैं। आप जानती हैं कि आपमें बहुत सारे गुण हैं। मगर आपको अपनाने वाले की तलाश उलझन में डाल देती है। सच्चाई तो यह है कि आप गुणवती हैं तो आपको धैर्य से काम लेना चाहिए। विवाह योग्य कन्या की दृष्टि से आपको इन बातों को ध्यान में रखना आवश्यक है।

- उतावले माता-पिता को समझाएं। उनसे अपनी शादी के बारे में खुलकर बातचीत करें। अपनी दृढ़ इच्छा निर्भीक होकर बता दें। उनकी सलाह सही हो तो स्वागत करें।

- आप यह तय कर लें कि दहेज लोलुपों से बच कर रहना है क्योंकि आज जो व्यक्ति दहेज के बलबूते पर ही रिश्ता जोडऩा चाहता है, कल दहेज की और मांग कर आपकी जान का दुश्मन बन सकता है।

- एक मायने में समझौतावादी जरूर बनें। आचरण, स्वास्थ्य व आत्मनिर्भरता वर का मापदंड होने चाहिएं लेकिन परीकथा की नायिका बन ऊंचे सपने देखना वक्त के हिसाब से गलत भी हो सकता है। यह भी जरूरी नहीं कि दौलत वाला अच्छे आचरण का ही हो।

- आप अपनी शिक्षा-उम्र, स्वास्थ्य इन सब को लेकर झूठ बोलने का मन न बनाएं। ऐसा करके ज्यादा समय तक किसी के दिल पर राज नहीं किया जा सकता। अगर घर में कोई गलत जानकारी देने का निर्णय करे तो आप विरोध करें।

- माता-पिता, भाई-बहन आदि के प्रति अपनी जिम्मेदारी को साथ रखें। वर-पक्ष को अपनी स्थिति बता दें। बदले हुए परिवेश में लड़की से भी अपेक्षाएं की जाने लगी हैं।

- यह सोचकर न चलें कि माता-पिता सब बेचकर भी पैसा जुटाने को बाध्य हैं और आप जी भरकर मस्ती उड़ाने को स्वतंत्र हैं, खरीदारी व फैशन के नाम पर, वर-पक्ष को आकर्षित करने के लिए।

- आप आत्मनिर्भर हैं तो आप यह मानकर चलें कि विवाहोपरान्त घर चलाने में आपकी भी भागीदारी होगी। आप कम कमाऊ लड़के को भी तरजीह दे सकती हैं।

- आप शारीरिक व मानसिक रूप से पति व घर परिवार को संभालने के काबिल आत्मविश्वास जुटाकर ही बन सकती हैं।

- अपनी विशेष आकांक्षाएं, कैरियर, शौक इत्यादि की जानकारी सामने वाले को जरूर दें, क्योंकि ऐसे में ही आगे चलकर सामंजस्य बैठेगा।

- आर. सूर्य कुमारी

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