गृृहिणी किसी प्रबंधक से कम नहीं

गृृहिणी किसी प्रबंधक से कम नहीं

टीवी पर एक कार्यक्र म आरंभ होने वाला था। 3 जोड़े बैठे हुए थे। महिलाओं से परिचय पूछा गया। एक ने बताया कि वह शिक्षिका है। दूसरी ने अपने को बैंक अधिकारी बताया। उन दोनों के चेहरों पर चमक थी। तीसरी ने दबे स्वर में कहा कि वह मात्र गृहिणी है। उसके हाव-भाव देखकर ऐसा लगा जैसे वह हीनभावना से ग्रस्त है।

अक्सर यह देखा जाता है कि जब भी किसी महिला से पूछा जाता है कि उसका व्यवसाय क्या है, तो गृहिणी कहने में उसे संकोच महसूस होता है पर क्या ऐसा होना चाहिए? क्या वास्तव में गृह संचालन का भार उस दायित्व से कम है जिसे एक महिला किसी कार्यालय में एक अधिकारी के रूप में, स्कूल में शिक्षिका या किसी संस्थान में एक कर्मचारी के रूप में वहन करती है?

सच तो यह है कि कामकाजी महिलाओं को तो अपने सीमित क्षेत्र में ही जिम्मेदारी संभालनी होती है पर गृहिणी को तो कई मोर्चों पर उत्तरदायित्व निभाना पड़ता है। उसे गृह प्रबंध में एक कार्यालय के प्रधान की, बच्चों की शिक्षा में शिक्षिका की और घर की अर्थव्यवस्था में वित्तीय सलाहकार की भूमिका अदा करनी पड़ती है। यदि वह इन दायित्वों को ठीक से न निभाए तो गृह व्यवस्था ही चरमरा जाए। इसका खमियाजा पूरे परिवार को उठाना पड़ता है। फिर यह कैसे कहा जा सकता है कि गृहिणी

की जिम्मेदारी दूसरे बाहर के कार्यों से हेय है?

एक बात और, कामकाजी महिला अपने बच्चों पर उचित ध्यान नहीं दे पाती। बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने, उनमें अच्छी आदतें डालने और जीवन संघर्ष में सफल होने की प्रेरणा एक गृहिणी ही दे सकती है जबकि कामकाजी महिला अपने ही काम में इतनी उलझी रहती है कि बच्चों की तरफ ध्यान कम ही दे पाती है। आमतौर पर कामकाजी महिलाओं के बच्चे नौकरों के भरोसे या शिशु सदनों में पलते हैं। प्रबंधक शब्द का ध्यान आते ही अनेक बातें ध्यान में आती हैं। इस शब्द के साथ सफलता का आभास होता है। हम उच्च स्तरीय प्रबंधकों को सुंदर भवनों में रहते, नई-नई गाडिय़ों में आते-जाते देखते हैं पर यदि किसी के घर में कुशल गृहिणी न हो तो उसकी कार्यक्षमता में ग्रहण लग जाए। प्रबंधक दिनभर में अनेक निर्णय लेते हैं और उन्हें चतुराईपूर्वक स्थिति के अनुसार कार्यान्वित करते हैं। समस्याओं से जूझते हुए हल निकालते हैं। हर कार्य में गड़बडिय़ां हो सकती हैं जिन्हें धैर्य व सूझबूझ से निबटाना होता है। समय का नियोजन कर उसके अनुसार काम करते हैं। कुशल प्रबंधक काम कराने के गुर जानता है। वह देखता है कि क्या संस्थान समय पर अपने वादे पूरे कर रहा है? वादे के अनुसार काम दिया जा रहा है या नहीं? कार्य का विकेंद्रीकरण कर दूसरों को अपने अधिकार क्षेत्र में सहयोगी बनाता है। वह जानता है कि कार्य किस तरह मातहतों में बांटे कि वह सुचारू रूप से होता चला जाए।

देखें कि गृहणियों का उपर्युक्त बातों से क्या संबंध है। परिवार में ऐसा व्यक्ति कौन है जो समय का प्रबंध करता है, निर्णय लेता है, समस्याएं हल करता है, दूसरों से काम लेता है व दूसरों को अपनी जिम्मेदारी में सहयोगी बनाता है? निस्संदेह एक कुशल गृहिणी ही तमाम उत्तरदायित्व वहन करती है। जिन महिलाओं ने गृह प्रबंध को अपना व्यवसाय बना लिया है, इस कसौटी पर खरी उतरती हैं। कहा गया है, 'बिन घरनी घर भूत का डेरा।' जरा किसी भी घर, जहां गृहिणी नहीं है, में जाकर देखिए, घोर अव्यवस्था दिखाई देगी। सारा घर भिनभिनाता नजर आएगा।

एक गृहिणी का महत्व प्रबंधक से कहीं अधिक होता है। यदि प्रबंधक अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाता तो कंपनी का नुकसान होता है। उसे निकालकर दूसरा व्यक्ति रखा जा सकता है पर यदि गृहिणी अपना दायित्व नहीं निभाती तो परिवार का विघटन होता है। बच्चों का लालन-पालन ठीक से नहीं होता। वे बिगड़ जाते हैं और आर्थिक संकट गहराता है। कार्यालय के प्रबंधक के बीमार पडऩे से कोई अंतर नहीं पड़ता। पर यदि गृहिणी बीमार पड़ जाए तो घर बिलबिला उठता है। उसी समय गृहिणी के कार्यों का महत्त्व परिवार वाले समझते हैं। उसे अपदस्थ करने का तो सवाल ही नहीं उठता।

हर गृहिणी को अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए सवेरे उठकर अनेक निर्णय लेने पड़ते हैं और यह सिलसिला दिनभर चलता रहता है। समस्याएं उठती हैं, उनसे निबटना होता है। महंगाई बढ़ रही है और परिवार त्रस्त हैं। अधिकांश मामलों में गृहणियों को ही तमाम आवश्यकताओं की पूर्ति करनी होती है। आखिर घर के बजट के लिए वही तो जिम्मेदार होता है। यदि कोई गृहिणी सही मायने में प्रबंधक है तो खरीदारी उचित दामों में करेगी। जो काम एक प्रबंधक अनेक सहायकों की मदद से करता है, वह गृहिणी स्वयं करती है। वह खुद ही व्यवस्था देखती है, प्रशासन देखती है, बाहरी तालमेल बैठाती है, बच्चों के झगड़े तय करती है व पड़ोसियों से मधुर संबंध रखती है।

प्रबंधक सफल व असफल होते हैं। सफल प्रबंधक के कार्यालय में व्यवस्था रहती है, समय पर काम होता है, कर्मचारी प्रसन्न रहते हैं। सारे काम सुचारू रूप से होते हैं पर एक अकुशल प्रबंधक के कार्यालय में अव्यवस्था रहती है, कोई काम समय से नहीं होता। जो गृहिणी अपने परिवार को बांधे रहती है, वहां हर काम समय से होता है। हर सदस्य प्रसन्न रहता है पर एक फूहड़ गृहिणी के घर में जगह-जगह मकड़ी के जाले, गंदगी व धूल ही दिखाई देती है।

जो महिला गृहिणी बनने का निर्णय लेती है, वह एक उत्तम व्यवसाय हाथ में लेती है। किसी भी प्रबंधक, अर्थ प्रबंधक या काम गृहिणी के कार्य से बड़ा नहीं होता। समय आ गया है कि लोग इस सच्चाई को समझें। सबसे बड़ी बात तो यह है कि गृहिणी अपने बच्चों का चरित्र निर्माण करती है। वह अपनी प्रतिभा का उपयोग पत्नी व मां के रूप में कर एक अहम भूमिका निभाती है। अत: अपने इस व्यवसाय के बारे में बताने में संकोच कैसा?

- नरेंद्र देवांगन

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