बच्चों के कारण पति की उपेक्षा न करें

बच्चों के कारण पति की उपेक्षा न करें

शादी के बाद आमतौर पर नवविवाहिताओं की जिंदगी सिर्फ पति के आगे-पीछे घूमती है। उनके खाने से लेकर पहनने के कपड़े तक निकालने का काम वे खुद करती हैं लेकिन बच्चे के जन्म के साथ ही उनकी प्राथमिकता बदल जाती है। फिर पति एक कप चाय के लिए तरसते रहते हैं। कभी पत्नी की निकटता चाहें तो जवाब मिलता है कि बिटिया जग जाएगी, बड़ी मुश्किल से सोई है, या बाप बन गए हैं, लेकिन अब भी आपको हर समय यही सूझता है।

पति मायूस हो जाते हैं। उन्हें बच्चे से जलन होने लगती है। कभी-कभी पत्नी की बेरूखी के कारण वे घर से बाहर ज्यादा समय बिताने लगते हैं। इस स्थिति में पत्नियों को यह परेशानी होती है कि घर और बच्चे की सारी जिम्मेदारी क्या उन्हीें की है? बच्चा पति का भी तो है! उन्हें समझना चाहिए कि इस स्थिति के लिए उत्तरदायी वे स्वयं हैं।

दिनभर की मेहनत के बाद घर आ कर पति अगर एक कप अच्छी चाय और आपके साथ कुछ पल बिताने की उम्मीद करे और पत्नी का सारा ध्यान बच्चे में लगा रहे तो पति का खीझना स्वाभाविक है। पति की शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक जरूरतें अपनी जगह हैं जिनको नकारा नहीं जा सकता।

अगर आपका सारा समय बच्चे की देखभाल में निकल जाता है तो अपने रुटीन में बदलाव लाएं। पति के दफ्तर से वापस आने से पहले बच्चे के जरूरी काम निबटा कर उसे सुला दें। अगर बच्चा खेल रहा हो तो पति के पास छोड़ दें। कभी-कभी बच्चे की नैपी बदलने या अन्य कामों में पति की मदद लें। अपने बच्चे के काम करने में उन्हें भी अच्छा लगेगा और आपको मदद भी मिलेगी। कोशिश करें कि अपने सोने से पहले उसे सुला दें ताकि आपको पति के साथ कुछ आत्मीय क्षण बिताने का मौका मिल सके।

बच्चे को पूरा समय देने का अर्थ यह नहीं है कि आप हर समय उसे गोद में लिए बैठी रहें। सुबह बच्चे को नहला-धुला कर पालने में लिटा कर अपने अन्य काम निपटा लें। जब बच्चा सो जाए तो आप भी कुछ देर आराम कर लें। इससे पति के आने पर आप थकान से चूर नहीं होंगी। यदि संभव हो तो छोटे-मोटे कामों के लिए महरी की मदद लें। परिवार में अन्य सदस्य हों तो शिशु को कुछ देर उनके पास छोड़ कर आप आराम कर सकती हैं या अन्य काम निपटा सकती हैं।

यह सोचना गलत है कि बाल-बच्चे हो जाने के बाद जिंदगी में पति या सेक्स की जरूरत नहीं रही। आनंददायक सेक्स संबंध सिर्फ पुरूषों के लिए ही नहीं, महिलाओं के लिए भी उतने ही जरूरी हैं। इससे जहां जिंदगी में ताजगी बनी रहती है, वहीं शारीरिक व मानसिक थकान भी दूर होती है। अगर आप अपनी और पति की शारीरिक जरूरतों को नकारती रहेंगी तो हो सकता है कि पति के कदम भटक जाएं।

बच्चे तो आपसी प्रेम को बढ़ाने का माध्यम होते हैं। जाने-अनजाने उनकी आड़ ले कर अपने संबंधों में तनाव न आने दें।

- कर्मवीर अनुरागी

Share it
Top