शराब महिलाओं के लिए बहुत खतरनाक

शराब महिलाओं के लिए बहुत खतरनाक

आम तौर पर जब शराब पीने की बात आती है, तो भारत समेत पूरी दुनिया की महिलाएं पुरुषों पर बात डाल देती हैं जबकि सच यह है कि अब महिलाएं भी बड़ी संख्या में इस लत की शिकार होने लगी हैं। हाल ही में आर्गनाइजेशन फार इकोनामिक कारपोरेशन एंड डेवलपमेंट द्वारा जारी एक ग्लोबल रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि भारत में शराब का सेवन पिछले 20 सालों में 55 प्रतिशत तक बढ़ा। शराब सेवन की दृष्टि से 40 देशों की सूची में भारत को तीसरा स्थान मिला है। महिलाओं में इस का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार पिछले 10 सालों में हमारे देश में शराब का सेवन करने वाली महिलाओं की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। 'वल्ड हेल्थ आर्गनाइजेशन' की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत में करीब 11 प्रतिशत महिलाएं शराब का सेवन करती हैं। आलम यह है कि आजकल शराब को भी कुछ महिलाएं स्टेटस और आजादी से जोड़ कर देखने लगी हैं। यदि उन्हें शराब पीने से रोका जाता है तो वे इसे रूढि़वादी सोच और महिलाओं के प्रति सोची-समझी साजिश का नाम दे कर हंगामे पर उतर आती हैं। शराब पी कर वे स्वयं को आजाद और आधुनिक महसूस करती हैं। शराब का सेवन पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए ही नुकसानदायक होता है। लेकिन महिलाओं की शारीरिक रचना के कारण शराब उन्हें पुरुषों की तुलना में अधिक नुकसान पहुंचाती है। महिलाएं शराब के प्रभावों के लिए अधिक संवेदनशील होती हैं। बराबर मात्रा में शराब लेने पर महिलाओं के खून में पुरुषों के मुकाबले उस का असर ज्यादा होता है। महिलाओं पर एक समान ड्रिंक लेने का प्रभाव पुरुषों के मुकाबले दोगुना ज्यादा होता है। इस के कई जैव वैज्ञानिक कारण हैं:-

शरीर में फैट- महिलाओं का वजन पुरुषों के मुकाबले कम होता है और पुरुष के समान वजन की एक महिला में पुरुष के मुकाबले कम पानी और ज्यादा फैटी टिशू होगा। चूंकि पानी शराब का घनत्व घटाता है, इसलिए महिलाओं के शरीर में शराब का घनत्व ज्यादा लंबे समय तक और अधिक मात्र में रहता है।

एंजाइम- महिलाओं में एंजाइम का स्तर कम होता है जो आमाशय और यकृत में शराब को मेटाबोलाइज कर सके। परिणाम स्वरूप महिलाओं के खून में शराब की मात्र ज्यादा हो जाती है।

हारमोन- मासिकचक्र के दौरान हारमोन के स्तर में बदलाव से महिलाओं द्वारा अल्कोहल मेटाबोलाइज करने का तरीका प्रभावित होता है।

मानसिक प्रभाव- शराब के सेवन से न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी बुरी तरह प्रभावित होता है, जिस का प्रभाव व्यक्ति के निजी और प्रोफेशनल जीवन पर पडऩे लगता है।

शारीरिक स्वास्थ्य पर असर

लिवर डिजीज- जो लोग लगातार अधिक मात्रा में शराब का सेवन करते हैं उन्हें लिवर की सूजन और लिवर सिरोसिस जैसी परेशानियों से जूझना पड़ता है। अगर इन का समय रहते उपचार न कराया जाए तो लिवर पूरी तरह खराब हो सकता है जो जीवन के लिए घातक होता है।

रक्तदाब बढऩा- शराब का सेवन रक्तदाब को बढ़ा देता है। महिलाओं में शराब के सेवन से होने वाले उच्च रक्तदाब का खतरा पुरुषों से दोगुना होता है।

थकान- अधिक मात्रा में शराब का सेवन करने से विटामिन बी12 की मात्रा कम हो जाती है जिस के कारण थकान होती है। चक्कर आना, भ्रमित होना जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

मोटापा- शराब शरीर में लैप्टिन के स्तर को कम कर देती है। यह भूख को नियंत्रित करने वाला हारमोन है। इस का स्तर कम होने से भूख अधिक लगती है जिस से कैलोरी का इनटेक अधिक होता है और मोटापा बढ़ता है। शराब के सेवन के बाद उन चीजों को खाने का मन करता है, जिन में कैलोरी की मात्रा अधिक होती है। इस से वजन बढऩे का खतरा और अधिक बढ़ जाता है।

प्रजनन क्षमता- शराब के सेवन से समयपूर्व मेनोपोज, बांझपन, गर्भपात आदि का खतरा बढ़ जाता है। जो महिलाएं नियमित शराब का सेवन करती हैं उन का मासिकचक्र गड़बड़ा जाता है। इस के सेवन से अंडोत्सर्ग पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। अंडों की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। जो महिलाएं गर्भावस्था के दौरान शराब का सेवन करती हैं उन के गर्भस्थ शिशु का स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। हमारे देश में पिछले 5 वर्षों में बांझपन की समस्या 2० से 3० प्रतिशत बढ़ गई है। इस के प्रमुख कारणों में शराब का लगातार बढ़ता सेवन भी एक है।

मानसिक स्वास्थ्य पर असर

अनिद्रा और अवसाद- शराब का सेवन करने से अनिद्रा की समस्या बढ़ जाती है जिस से मानसिक तनाव बढ़ता है। लगातार तनाव की स्थिति अवसाद में बदल जाती है। अगर अवसाद की स्थिति से बाहर आने का प्रयास न किया जाए और शराब का सेवन जारी रखा जाए तो व्यक्ति गहरे अवसाद में चला जाता है। गहरे अवसाद को आत्महत्या के सब से प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है।

मस्तिष्क का क्षतिग्रस्त हो जाना- शराब के कारण मस्तिष्क में विषाक्तता बढ़ती है जिसके कारण याददाश्त प्रभावित होती है और डिमेंशिया होने का खतरा बढ़ जाता है। शराब मस्तिष्क की कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त कर देती है। इस से मिरगी का खतरा बढ़ जाता है। महिलाओं में यह प्रभाव अधिक होता है। शराब मस्तिष्क की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं के पुनर्निर्माण की प्रक्रि या को भी धीमा करती है।

गर्भावस्था में कतई न करें सेवन- गर्भावस्था के दौरान शराब का सेवन बिलकुल नहीं करना चाहिए। जब गर्भवती महिला शराब पीती है तो प्लैसेंटा के द्वारा वह शिशु तक पहुंच जाती है। इस से गर्भस्थ शिशु के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर कई नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। चूंकि इस समय बच्चे का पाचनतंत्र विकसित हो रहा होता है, इसलिए यहां वयस्क शरीर की तुलना में शराब का ब्रेकडाउन अत्यधिक धीमा होता है और बच्चे के रक्त में शराब का स्तर काफी समय तक बना रहता है। गर्भावस्था के दौरान किसी भी समय कितनी भी मात्रा में शराब का सेवन गर्भस्थ शिशु को हानि पहुंचा सकता है खासकर पहली और दूसरी तिमाही में।

शराब से कैंसर का डर- इंटरनेशनल एजेंसी फार रिसर्च इन टू कैंसर (आईएआरसी, विश्व स्वास्थ्य संगठन का एक अंग) ने शराब को ग्रुप 1 कार्सिनोजेन के रूप में वर्गीकृत किया है। इस का मतलब है कि इस बात का ठोस प्रमाण है कि शराब से कैंसर होता है। शराब सिर, गरदन, आहारनली, यकृत, आंत, मलाशय व स्तन कैंसर का एक प्रमुख कारण है। शराब से अग्नाशय के कैंसर तथा कई अन्य तरह के कैंसर का खतरा बढ़ता है। इन में से प्रत्येक कैंसर में खतरा ली गई शराब की मात्रा के अनुसार बढ़ता है। यदि प्रयास किया जाए तो शराब की लत आसानी से छोड़ी जा सकती है। पूर्व सिने अभिनेत्री पूजा भट्ट ने स्वयं को इस लत से आजाद किया है। 47 साल की पूजा ने शराब का त्याग किया और फिर दोबारा इसे हाथ नहीं लगाया। इस संदर्भ में उन का कहना है कि उन के पिता महेश भट्ट के एक मैसेज ने उन्हें शराब छोडऩे को प्रेरित किया और वे इस पर पूरी तरह कायम हैं। वे जिंदगी को ज्यादा बेहतर ढंग से जीने के अपने फैसले से बहुत खुश हैं। वास्तव में यदि दृढ़निश्चय के साथ शराब छोडऩे का प्रयास किया जाए तो इस की लत से आजाद होना कतई कठिन नहीं है।

- सीतेश कुमार द्विवेदी

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