सोच लें प्रेम करने से पहले

सोच लें प्रेम करने से पहले

हर तरह के प्रेम का उश्वम स्थल होता है हृदय। आप भी मनुष्य हैं, आपके पास भी मनुष्य हृदय है, अत: आपके मन में भी किसी के प्रति प्रेम जाग सकता है। यदि आप अपना प्रेम किसी युवक पर उड़ेलने जा रही हों या किसी युवक को जीवन साथी बनाने का निर्णय ले चुकी हों तो यह निश्चित रूप से आपके दृढ़ संकल्प, तीव्र इच्छा व धैर्य की ओर इंगित करता है। भावनात्मक रूप से किसी से जुडऩा बुरा नहीं होता। जीवन का एक मुख्य संस्कार विवाह बुरा नहीं होता किंतु एक अहम् निर्णय लेने से पूर्व कई बातों पर ध्यान देना आवश्यक है।

किसी युवक को मन में स्थान देने से पहले स्वयं को मानसिक रूप से या अन्य सभी तरह से तैयार करना जरूरी है। अगर आप नौकरीशुदा हैं या किसी तरह से स्वावलंबी हैं तो प्रेम अभिव्यक्त कर सकती हैं क्योंकि एक बेकार युवक को स्त्री-पुरूष समानता के युग में सहारा देना अच्छा होगा किंतु आप बेकार हैं और वह युवक भी तो अच्छा तो यही होगा कि आप अपने दिल पर पत्थर रख लें। अपनी भावना को दबा लें।

यह भी हो सकता है कि बेकार युवक तनाव कम करने, गम को छुपाने, वक्त गुजारने या मन बहलाने के वास्ते आपको साधन के रूप में इस्तेमाल कर रहा हो। यह पता करने का प्रयास अवश्य कीजिए कि कहीं वह आपकी नौकरी व संपन्नता को देख झूठा प्रेम प्रदर्शन तो नहीं कर रहा है? आगे चलकर कहीं दहेज-दौलत की मांग तो नहीं करेगा?

विवाह से पूर्व अपने प्रेम संबंधों को मात्र भावनात्मक संबंध तक ही सीमित रखें। अति विश्वास इस विविधता भरी एवं रंग बदलती दुनियां में महंगा पड़ सकता है। विषय सीमा से बाहर चला जाए तो आप आत्महत्या तक करने को विवश हो सकती हैं। इससे आपकी व आपके परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा दांव पर लग सकती है।

समय से पूर्व आप किसी युवक के प्रति इतना अधिक समर्पित हो जाएंगी तो उस युवक के मन में विश्वास के स्थान पर आपके नैतिक चरित्र के प्रति अविश्वास व संदेह पैदा हो सकता है। वह आपको अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करने से मुकर सकता है। इसका प्रभाव आपके भावी जीवन पर पड़ेगा।

यदि आपका मात्र भावनात्मक संबंध किसी दूसरे युवक से रहा हो, किसी कारणवश टूट गया हो तो इसकी सामान्य और ऊपरी जानकारी अब होने वाले भावी पति को देना न भूलें। समझदार व अच्छे व्यक्तित्व वाला युवक आपको समझ सकता है, आपकी सत्यवादिता पर गर्व कर सकता है। किसी को धोखे में रखकर विवाह रचाने से भविष्य में टक्कर संभव है।

आपके निर्णय को माता-पिता का समर्थन प्राप्त हो तो भी कानूनी रजिस्टर्ड विवाह की औपचारिकता अवश्य पूरी करें अन्यथा आगे चलकर बात नहीं बनी तो आप व आपके मायके वाले कठिन परिस्थिति में पड़ सकते हैं। यदि आप स्वतंत्र निर्णय ले रही हों तो फिल्मी अंदाज में पांच मिनट के समय में विवाह कर डालने की रस्म पूरी कर कर्तव्य की इतिश्री न समझें। रजिस्टर्ड विवाह को प्राथमिकता दें। इससे बहुत हद तक आपका भविष्य सुरक्षित होगा। यदि किसी कारणवश भविष्य में संबंध विच्छेद हो जाएं या तलाक की नौबत आ जाए तो कानून आपको सहयोग देगा। किसी को पति मानने या बनाने के समय इस आशय का प्रमाण पत्र अपने पास रखना सावधानी बरतना ही समझें।

आप जो कुछ सोच कर चलेंगी, वैसा ही सब कुछ होगा, यह जरुरी नहीं। विवाह के बाद कोई दुर्घटना घट सकती है, पति की मृत्यु हो सकती है। ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए स्वयं को हमेशा तत्पर रखें। भला तो यही होगा कि आप अपने मायके वालों को तथा ससुराल वालों को विश्वास में लेकर रहें। इससे मानसिक कष्ट को बांटने में सहयोग मिलेगा। विवाह के पहले चरण में ही जीवन बीमा करवाया जा सकता है, इससे बाद में अधिक मदद मिलेगी।

सबों से पृथक रहकर एक छोटी सी, प्यारी सी अपनी अलग दुनियां बसाने का सपना छोड़ दें। ऐसे सपने मात्र माया जगत में ही जंचते हैं। आप यह समझ लें कि यथार्थ और कल्पना में अंतर होता है।

धोखा खा कर रास्ते पर भटकती, कानून का दरवाजा खटखटाती महिलाएं क्षण भर में निर्णय ले चुकने का परिणाम ही भुगतती हैं। आपको एक शिक्षित, साक्षर, निपुण, चतुर, कामयाब व आत्मसम्मान संपन्न नारी बनना है या जल्दबाजी का शिकार हो जीवन का रंग खोना है-ये निर्णय आपको ही करने हैं।

- आर. सूर्य कुमारी

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