एक तरफा पनपता प्यार घातक है

एक तरफा पनपता प्यार घातक है

सुरेश बचपन से ही अपने सहपाठी राकेश की छोटी बहन रेणु को पसन्द करता आया था। जवानी की दहलीज पर कदम रखने के साथ वह रेणु से प्यार करने लगा मगर रेणु पर अपने प्यार का इजहार नहीं कर सका। इन सब बातों से बेखबर रेणु अपने भाई के दोस्त को भाई मानकर हंस-बोल लेती थी।

एक दिन सुरेश ने हिम्मत कर अकेले में रेणु से अपने प्यार का इजहार किया। रेणु ने उसकी बात हंस कर टाल दी। इस पर सुरेश का हौसला बढ़ गया। एक बार फिर रेणु से अकेले मिलने पर प्यार का इजहार किया। इस बार रेणु सख्त लहजे में बोली, सुरेश! अपने भईया का दोस्त मानकर तुमसे हंस बोल लेती हूं। इसका मतलब यह नहीं, मैं तुमसे प्यार करती हूं।

रेणु का जवाब सुनकर सुरेश चुपचाप घर लौट आया और भयंकर रूप से बेचैन हो उठा। आखिरकार उसने एक निर्णय ले लिया। रात्रि में चुपचाप जब रेणु घर में अकेली थी, उसकी हत्या कर डाली। रेणु की हत्या के जुर्म में सुरेश को उम्रकैद हो गई और उधर रेणु को इसका खामियाजा अपना जीवनदान करके चुकाना पड़ा।

यही तथ्य युवतियों पर भी लागू होता है। उन्हें अपने युवक मित्र का सरल स्वभाव, आकर्षक चेहरा, व्यक्तित्व, व्यवहार कुशलता से प्रभावित होकर अपने ही दिल में युवक मित्र के प्रति एकतरफा प्यार का भाव उत्पन्न कर, अपने जीवन साथी के रूप में पसंद करने लगती हैं। यही नहीं, उस पर अपना एकाधिकार समझ कर मन ही मन उसे पति मानकर मान-सम्मान देने लगती हैं। ऐसे में जब खुलासा होने पर युवक मित्र उसकी इच्छा जानने के पश्चात विवाह करने से इंकार कर दे, तो युवती अजीबो-गरीब मानसिक यन्त्रणा के दौर से गुजरती हुई अपने युवक मित्र के प्रति दुव्र्यवहार करने से भी नहीं चूकती।

वर्तमान परिवेश में सहशिक्षा, ऑफिसों में कार्यरत युवा सहपाठी या सहकर्मी में आपस में मिलना-जुलना, हंसना, बोलना, पार्कों में घूमना, पिक्चर देखना मॉल्स में घूमना आम समझा जाता है पर यह आवश्यक नहीं है कि वे एक दूसरे से प्रेमी-प्रेमिका वाला प्यार भी करते हैं। सिर्फ वे एक अच्छे मित्र के रूप में एक-दूसरे की जरूरत महसूस करते हैं। क्या उनके बीच मोहब्बत के अलावा कोई दूसरा रिश्ता नहीं हो सकता?

युवक-युवतियों को अपनी पवित्र मित्रता के बीच प्रेमी-प्रेमिका वाला प्यार नहीं लाना चाहिए। मित्र से प्यार करने के बारे में सोचने से मित्रता खत्म हो जाती है और एकतरफा पनपता प्यार होने के कारण मित्रता पनप नहीं पाती। अक्सर ऐसा होता है।

युवा वर्ग महज एक लगाव और आत्मीयता को प्रेम समझने की भूल कर बैठते हैं। अगर समय रहते दिल में उठ रही बात को निकाला नहीं जाता, तो युवक-युवती की दोस्ती का भी वही हश्र हो सकता है जो सुरेश और रेणु का हुआ।

- इकबाल अहमद पंछी

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