बिखरी लटों में सिमटा व्यक्तित्व

बिखरी लटों में सिमटा व्यक्तित्व

शरीर शास्त्री बालों को त्वचा का रक्षा-कवच मानते हैं जो शरीर को प्राकृतिक आघातों (सर्दी गर्मी) से बचाते हैं। सौन्दर्यशास्त्री बालों को सुन्दरता का चिन्ह मानते हैं। उनकी नजर में नायिका के कमर से नीचे लटकती-झूलती वेणी प्रिय-मिलन का आमंत्रण देती प्रतीत होती है जिसे 'ये रेशमी जुल्फें' 'तेरी जुल्फों की छांव में आदि कहकर नायक अपना सर्वस्व अर्पित करने को तैयार हो जाता है-यहां तक कि अपनी जान भी किन्तु यही रेशमी जुल्फें प्रिय-वियोग में जब उलझ-पुलझ जाती हैं तो कांटे सी प्रतीत होती हैं-नागिन बनकर नायिका को ही काट खाना चाहती हैं। सचमुच, क्या कोई कह सकता है कि इन संवरी-बिखरी लटों के पीछे व्यक्ति का व्यक्तित्व छिपा होता है? शरीर आकृतिविज्ञानी इन लटों को ऐसा ही मानते हैं। उनके अनुसार विभिन्न प्रकार के बाल विभिन्न गुण-अवगुण को प्रतिबिंबित करते हैं। आइये, इन जुल्फों में छिपे अपने व्यक्तित्व को हम भी खोजें।

बालों की सघनता के आधार पर:- मनुष्य के जिस अंग के बाल जितने सघन होते हैं उनके वे अंग उतने ही मजबूत माने जाते हैं। माथे के घने बाल विकसित मस्तिष्क के, दाढ़ी-मूंछ के सघन बाल ओज, पौरूष व दृढ़ता के, छाती के सघन बाल मजबूत हृदय तथा दर्दीली छाती के द्योतक हैं। इसी तरह गुप्तांगों के समीप बालों की अधिकता तीव्र कामुकता दर्शाती है।

- इसके विपरीत कम दाढ़ी-मूंछ वालों में बहादुरी, उत्साह एवं पौरूष का अभाव पाया जाता है। जिनकी छाती पर कम बाल हों, वे हृदयहीन माने जाते हैं। यही कारण है कि पुराने लोग मूंछ और छाती के बालों से रहित व्यक्ति को अशुभ मानते थे। नपुंसक के गुप्तांगों पर कम बाल देखे जाते हैं।

कड़ेपन के आधार पर:- जिस व्यक्ति के सिर, शरीर तथा अन्य अंगों पर कड़े-रुखे, टेढ़े-मेढ़े, मोटे तथा बड़े बाल होंगे वह क्रूरकर्मी व कठोर हृदयी होगा। नेपोलियन, सीजर, सिकंदर आदि के बाल कड़े व मोटे थे। पुराणों में जगह-जगह पर असुरों को रुखा एवं कड़ा चित्रित किया गया है।

- मुलायम, चिकने व कोमल बाल मानसिक उन्नति, विचारशीलता व चतुरता के तो कड़े मोटे, कंटीले बाल शूरता, झगड़ालू, व अक्ड़पन को प्रकट करते हैं।

रंग के आधार पर:-भौगोलिक आबोहवा के प्रभाव के कारण पृथ्वी पर आमतौर से सुनहरे, कत्थई, लाल, भूरे, काले और मटमैले बाल वाले लोग पाए जाते हैं किन्तु एक ही आबोहवा वाले लोगों के बालों में रंग की भिन्नता की उपस्थिति उसकी चारित्रिक भिन्नता दर्शाती है।

काला रंग:- . काले बाल यदि एकदम सीधे और लंबे हों तो समझना चाहिए कि व्यक्ति निराशा, दुख व चिंता से पीडि़त तथा उदास रहने वाला होगा।

- काले घुंघराले बलखाते बाल मनमौजी, प्रेमी स्वभाव, उपकारी, विश्वासी व हंसोड़ प्रकृति के द्योतक हैं। कवियों ने शायद इसीलिए ऐसे बालों की तुलना श्याम मेघों से की है।

- हल्के काले रंग के बालों वाले मनुष्य चंचल, कपोल-कल्पना करने वाले, भावुक व असंतोषी प्रकृति के होते हैं। इसी रंग के बाल यदि मुलायम, पतले व छोटे हों तो व्यक्ति विनोदी व खुशमिजाज तथा परिवारप्रिय होगा। यही रंगवाले बाल यदि कड़े व मोटे हों तो लापरवाही व अहंकारी प्रकृति बतलाएगा।

भूरा रंग:- लालिमा प्रधान भूरे रंग वाले बाल बहादुरी, दृढ़ता तथा अहंकार के सूचक हैं। यह रंग पशु-प्रकृति का सूचक है जो भले-बुरे किसी दिशा में गमन करने को उद्यत होते हैं।

सुनहरा रंग:- बिल्कुल सुनहले बाल मृदुलता, विलासप्रियता व विनोदप्रियता के सूचक हैं।

- सुनहरे बाल यदि कालापन व लालिमायुक्त हों तो व्यक्ति मानसिक शक्ति का धनी होगा व लिखने-पढऩे, बोलने के साथ-साथ कवि प्रकृति वाला होगा।

- बिल्कुल लाल रंग के बालों वाले (जो अत्यल्प हैं) क्रोधी व झगड़ालू प्रकृति के तथा जीवटता के धनी होंगे। वे कल्पना जगत में भी अपनी उड़ान भरने के योग्य होते हैं।

- विभिन्न रंग व ढंग से मिश्रित बाल वाले व्यक्ति बहु-आयामी प्रकृति के होंगे।

बालों के आदि एवं अन्त स्थान के आधार पर:- माथे पर बहुत आगे तक उगे बाल का जीवन बाधाओं से भरा होता है किन्तु ये बाधाएं ही उन्हें जीवटता प्रदान करती है।

- बहुत ऊंचाई तक माथे का बाल रहित होना समझदार व्यक्ति का प्रतीक है।

- जिनके बाल कानों की जड़ों से मिले हों वे आत्मविश्वासी व बात के धनी होते हैं। इसी तरह जिनके बाल गर्दन पर बहुत दूर तक उगे हों, वे मानसिक रूप से प्रौढ़ माने जाते हैं

दाढ़ी मूंछों के बाल के आधार पर:- बहुत बड़ी व काली मूंछों वाले मनुष्य लड़ाकू, बहादुर, स्वाभिमानी व क्रूरकर्मी होते हैं। रौद्र स्वभाव वाले योद्धाओं के चित्र में उनकी मूंछें बड़ी बनाई जाती हैं। यमराज की मूंछ से ही भयंकरता टपकती है।

अन्य आधार पर:- गंजे सिर वाले अक्सर अल्पबुद्धि वाले होते हैं।

- सिर के अगले भाग में बालों को कम देखकर यह निष्कर्ष निकाला जाता है कि व्यक्ति अधिक मानसिक परिश्रम करने वाला है-चाहे वह चिंताग्रस्त ही क्यों न रहता हो?

- जिनके बालों की जड़ों में सफेद-सफेद भूसी सी (खूरंट) अधिक जमी रहे है उन्हें गर्म मिजाजी, तेज स्वभाव, कठोर प्रकृतिवाला व चिन्ताशील समझना जाना चाहिए।

- समय से पहले बालों का झडऩा व पकना किसी न किसी प्रकार के रोग की निशानी है।

- विपिन कुमार

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