नाजुक है ननद भाभी का रिश्ता

नाजुक है ननद भाभी का रिश्ता

ननद-भाभी का रिश्ता एक बहुत ही नाजुक रिश्ता होता है। भाभी को एक प्यारी ननद और ननद को भाभी के रूप में एक प्यारी सहेली मिल जाए तो फिर कहना ही क्या लेकिन कभी-कभी नासमझ भाभी और नासमझ ननद के बीच गलतफहमियां अपना घर बना लेती हैं और इन प्यार भरे रिश्तों में खटास डाल देती हैं।

इन प्यार भरे नाजुक रिश्तों को प्यार भरा बनाए रखने के लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखना पड़ता है। ननद को हमेशा याद रखना चाहिए कि भाभी के कुछ अरमान और ख्वाहिशें होती हैं और साथ ही अपने पति पर अधिकार भी। यह कभी नहीं समझना चाहिए कि भाभी ने आकर भैया पर कब्जा कर लिया, अथवा भैया तो बस भाभी के होकर रह गए हैं।

इसी तरह भाभी का भी यह दायित्व बनता है कि वह अपनी ननद का खास ख्याल रखे। आज की ननद ही कल किसी की भाभी बनेगी।

जब वह अपनी भाभी को प्यार देगी, तभी प्यार पाने की हकदार होगी, इसलिए जरूरी है, आपस में प्यार को बनाकर रखना।

अगर कोई गलतफहमी या कोई ग़लती हो भी जाए तो इसके लिए आपस में समझदारी से उस गलतफहमी को दूर करना चाहिए।

ननद-भाभी के बीच थोड़ी सी छेडख़ानी इस माहौल को प्यार से भर देती है। अगर ननद या भाभी एक दूसरे को प्यार देंगी, तभी वे हमेशा खुश रह सकती हैं। यह तो सही हैं कि जहां दो बरतन होते हैं, कभी न कभी टकराते हैं, लेकिन समझदारी इस बात में है कि टकराहट की आवाज घर से बाहर न जाने पाए।

ननद और भाभी के बीच सहयोग की भावना होनी चाहिए। एक अच्छी भाभी या अच्छी ननद एक दूसरे की शिकायत कभी न करें क्योंकि कोई भी रिश्ता बन तो जल्दी जाता है पर टूटने में ज्यादा देर नहीं लगती।

- सिलास सिंह

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