उफ यह जानलेवा गर्मी

उफ यह जानलेवा गर्मी

गर्मी का मौसम तो खत्म किया नहीं जा सकता, न ही तपती धूप खत्म करना मानव के वश में है किन्तु मनुष्य के हाथ में इतना तो ही है कि वह कुछ उपाय कर गर्मी से कुछ राहत तो पा ही सकता है। अपनी दिनचर्या, खानपान आदि में थोड़ा सा हेर-फेर करके गर्मी से निजात पायी जा सकती है।

सबसे पहली बात तो यह है कि कहीं आप देर तक सोने के आदी तो नहीं? यदि हां तो कम से कम गर्मी भर अपनी इस आदत को बदल डालिए। प्रात:काल जल्दी उठने की आदत डालिये क्योंकि देर तक सोने पर गर्मी अपना प्रकोप दिखाने से नहीं बाज आयेगी। देर तक सोने से चढ़ते सूर्य की गर्मी सीधे मस्तिष्क पर चढ़ जायेगी। इसका परिणाम यह होगा कि सारा दिन आप गर्मी से चिड़चिड़ाते रहेंगे और जल्दी सोकर उठने का असर यह होगा कि सारा दिन आप तरोताजा महसूस करेंगे। इतना ही नहीं, प्रात: काल ही ठंडे पानी से नहाकर आप खुद को तरोताजा रख सकते हैं वरना गर्मी और आलस्य आपस में मिलकर आपको बीमार अनुभव कराने लगेंगे।

दूसरी अहम् बात यह है कि चाय, काफी, आदि का सेवन बहुत कम करें। यदि इसके आदी न हों तो बिलकुल ही न करें। यदि आप चाय पीने की आदत से मजबूर हैं तो भी एक या दो कप से अधिक का सेवन न करें। इसके बदले नींबू पानी, फालसे, बेल आदि का शर्बत, फलों का रस आदि का सेवन करें। ये सेहत के लिए भी फायदेमंद हैं और गर्मी से राहत भी दिलाते हैं।

वैसे भी गर्मी में पानी का अधिक मात्र में प्रयोग करना चाहिए क्योंकि गर्मी से शरीर का पानी पसीने के रूप में एक बड़ी मात्र में बाहर निकल जाता है जिससे यदि उसकी पूर्ति न की जाए तो डी-हाइडे्रशन हो जाता है। बहुत लोगों को अधिक पानी पीने की आदत नहीं होती। उन्हें चाहिए कि वे पानी में ग्लूकोज, इलेक्ट्राल आदि डाल कर बार बार पानी पिएं। इससे पानी की पूर्ति होगी तथा अतिरिक्त शक्ति मिलेगी।

गर्मी में तला, भुना अधिक चिकनाई युक्त भोजन न केवल तकलीफदेह होता है बल्कि हजम भी नहीं होता। अपच, खट्टी डकारें आना शुरू हो जाती हैं। अत: इस मौसम में हल्का-फुल्का, चिकनाई रहित भोजन करना चाहिए। हरी सब्जियां, सलाद, साग, दही आदि स्वास्थ्यवर्धक होने के साथ हाजमा भी दुरूस्त रखते हैं।

यह तो थी खान पान की बात लेकिन एक महत्वपूर्ण तथ्य है वस्त्रों का चयन। गर्मियों में कपड़ों का चुनाव कैसे किया जाये। इस मौसम में हल्के-फुल्के वस्त्र ही उपयुक्त रहते हैं। हल्के रंगों के वस्त्र स्वयं को आराम देते हैं। साथ ही देखने वालों की आंखों में शीतलता भी प्रदान करते हैं। यदि अधिक चटक फटक, तड़क भड़क वाले कपड़े आप पहनेंगे तो स्वयं तो गर्मी से परेशान हो ही जाएंगे, साथ ही दूसरों की नजरों में उपहास का पात्र भी बनेंगे। गर्मी में सूती कपड़े पहनें, सिन्थेटिक नहीं। सिन्थेटिक कपड़ों से हवा आर पार नहीं होती। ये कपड़े पसीना सुखाने में भी असमर्थ होते हैं बल्कि ऐसे मौसम में तो विवाह, पार्टी आदि के समय भी हल्के फुल्के कपड़े गरिमा बढ़ाते हैं।

गर्मी के मौसम में सीधी धूप बहुत अधिक नुकसान पहुंचाती है। सबसे पहले तो कोशिश कीजिए कि धूप में निकलिये ही नहीं लेकिन यदि मजबूरीवश निकलना ही पड़े तो आंखों में धूप के चश्मे का प्रयोग अवश्य करें क्योंकि आंखों के नीचे की त्वचा अत्यधिक कोमल होती है। उस पर धूप का बहुत प्रभाव पड़ता है। सिर हमेशा ढका होना चाहिए। छतरी लेकर ही धूप में निकलें। इससे सिर पर सीधी धूप नहीं पड़ेगी और लू से उडऩे वाली धूल से भी छुटकारा मिलेगा।

गर्मी में कम से कम दो बार अवश्य नहाना चाहिए, सुबह सवेरे और दुबारा जब दिन भर के बाद घर लौटें तब। इससे दिन भर की थकावट और बदन की गन्दगी तो दूर होगी ही, साथ ही दिनभर की थकान के बाद ताजगी और तरावट मिलेगी जिससे रात में अच्छी नींद आयेगी।

यह सच है कि गर्मी का मौसम कष्टदायक होता है। फिर भी प्रकृति के इस नियम को स्वीकार करना ही पड़ेगा किन्तु प्रयासों द्वारा इस भीषण कष्टदायी गर्मी से निजात तो पा ही सकते हैं। इसके अलावा मस्तिष्क को शीतल व संतुलित रखें। चिड़चिड़ेपन, क्रोध से दूर रहें ताकि गर्मी का अहसास कम हो।

-रश्मि अस्थाना

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