कैसे पहने नारी साड़ी?

कैसे पहने नारी साड़ी?

साड़ी को प्राय: सर्वाधिक सुसंस्कृत तथा शालीन पहनावा माना जाता है। गांव की गोरी हो या फिर शहर की अलबेली नारी, साडिय़ों के मोहजाल से कोई नहीं बच पायी है क्योंकि परंपरागत तथा कलात्मक साडिय़ों ने भारतीय नारी की अलग ही पहचान बनायी है जिन्हें पहनकर नारी का रूप और निखर उठता है।

सलीके से, स्थान तथा मौसम के अनुकूल पहनी गई साड़ी भले ही कीमती न हो मगर नारी के सौन्दर्य को दोगुना बढ़ा देती है। अतएव महिलाओं को साड़ी हमेशा अपने शरीर के गठन तथा उम्र को ध्यान में रखकर ही पहननी चाहिए। साड़ी पहनते समय निम्नांकित बातों का ध्यान अवश्य ही रखना चाहिए।

- साड़ी का चयन मौसम, समय तथा अवसर के अनुकूल ही करना चाहिए। साड़ी के चयन के साथ-साथ अगर ब्लाउज के चयन में भी सूझ-बूझ का परिचय दिया जाए तो इससे साड़ी में और भी निखार आता है।

- साड़ी के साथ हमेशा मैचिंग ब्लाउज ही पहनना चाहिए। अगर मैचिंग न हो तो कंट्रास्ट पहनें। वैसे भी आजकल साड़ी के साथ कंट्रास्ट कलर के ब्लाउज का ही चलन है। अगर आपको कंट्रास्ट कलर पसन्द है तो जरूर पहनें किन्तु बेमेल कलर का ब्लाउज न पहनें। यह साड़ी की शोभा को कम कर देता है।

- हल्की व बारीक साडिय़ों के नीचे गंदा तथा उड़ा हुआ या बेमेल कलर का पेटीकोट न पहनें। इससे साड़ी भद्दी दिखाई देगी। पेटीकोट की डोरी (नाड़े) को अधिक कसकर न बांधें, क्योंकि इससे कमर पर काला निशान पड़ सकता है।

- यदि आप शाम को किसी पार्टी में जा रही हों या फिर शॉपिंग के लिए जा रही हों तो उल्टे पल्ले की साड़ी बांधें या विभिन्न तहर के पल्ले की साड़ी बांधें। इसके लिए आकर्षक पल्ले वाली साड़ी का चयन करना होगा।

- सीधे पल्ले की साड़ी सभी का मन मोह लेती है। यदि हल्के प्रिंट की साड़ी सीधा पल्ला लेकर पहनी जाए तो वह खूबसूरती को और भी बढ़ा देगी।

- कंधे पर पल्ले वाली साड़ी पहनने के लिए साड़ी बांधकर लहराता पल्ला कंधे पर डालें। ऐसा करके आप न जाने कितनों का दिल चुरा लेंगी। शालीनता का परिचय आवश्यक है।

- साड़ी पहनते समय कम से कम पिनों का प्रयोग करें। जरा-सा भी खिंचने पर पल्ले व प्लेटों के फटने का भय बना रहता है।

- साड़ी पहनकर उस पर तीखे परफ्यूम का सीधा छिड़काव न करें क्योंकि इससे साड़ी की जरी, कढ़ाई, रंग व प्रिंट खराब हो सकते हैं। परफ्यूम को कनपटी, गले के नीचे, कलाइयों पर लगाया जा सकता है।

- लम्बे कद की महिलाओं को बड़े प्रिंट की या आड़ी धारी की तथा छोटे कद की महिलाओं को छोटे प्रिंट की तथा लंबी धारी वाली साड़ी पहननी चाहिए।

- छोटे कद की महिला एक ही रंग की साड़ी ब्लाउज पहने तो अच्छा है। बड़े बेलबूटे, छोटे बार्डर तथा आड़ी धारियों वाली साड़ी उन्हें हरगिज नहीं पहननी चाहिए। इससे उनका कद और भी छोटा लगेगा। लंबे कद की महिलाओं पर चौड़े बार्डर की तथा साड़ी के विपरीत रंग का ब्लाउज अधिक जंचता है।

- भारी शरीर वाली महिलाओं को बड़े प्रिंट, आड़ी धारियों वाली, जार्जेट, शिफान तथा कलफ लगी साड़ी नहीं पहननी चाहिए। उन्हें छोटे पिंट तथा लंबी धारियों वाली साड़ी पहननी चाहिए। भारी शरीर वाली महिलाओं को नाभि दर्शना साड़ी तथा ढीलाढाला पेटीकोट न पहनकर कुछ टाइट फिटिंग वाला पेटीकोट ही पहनना चाहिए।

- दुबले-पतले शरीर वाली महिला अगर सूती, आरगेंजा, कॉटन सिल्क, डोरिया या वायल की साड़ी पहने तथा ढ़ीलाढ़ाला पेटीकोट पहने तो उसका दुबलापन काफी हद तक छिप जाता है।

- गोरी महिला पर हल्के तथा गहरे दोनों ही रंग खिलते हैं किन्तु सांवली महिला को हल्के रंग की ही साड़ी पहननी चाहिए। बहुत पतली महिला को गहरे रंग की साड़ी अधिक जंचती है।

- प्रौढ़ तथा वृद्ध महिलाओं को गहरे तथा चटक रंग की साड़ी नहीं पहननी चाहिए। किसी भी अवसर पर उन्हें सादी साड़ी ही पहननी चाहिए।

- हमेशा अपने व्यक्तित्व से मेल खाते रंगों का ही चुनाव करना चाहिए।

- आरती रानी

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