रूटीन में तब्दीली बनाए जिंदगी रसीली

रूटीन में तब्दीली बनाए जिंदगी रसीली

सुबह होती है शाम होती है, जिंदगी यंही तमाम होती है। हर व्यक्ति कोल्हू के बैल की भांति अपने खूंटे से बंधे घर से दुकान, दुकान से घर, घर से ऑफिस, ऑफिस से घर चलता रहता है।

कहते हैं एक साइड पर तवे पर रोटी भी पड़ी पड़ी सड़ जाती है। उसे भी कभी उलट, कभी पलट करना पड़ता है। तालाब में रूका पानी बदलाव सड़ांध मारने लगता है। बहते पानी में कभी दुर्गन्ध नहीं पड़ती। हर व्यक्ति कुछ बदलाव चाहता है। कुएं का मेंढक भी चाहता है कि मैं बाहर आऊं। मैदानी लोग पहाड़ पर चेंज के लिए जाते हैं और पहाड़ी लोग ठण्ड से बचने के लिए मैदानी इलाकों में घूमने जाते हैं

लोग घर का खाना खा कर ऊब जाते हैं, फिर रेस्टारेंट जा कर खाकर कुछ नयापन अनुभव करते हैं। यदि आप जिंदगी को खूबसूरत बनाना चाहते हैं तो छोटी-छोटी बातों में खुशी ढूंढें।

आप प्रतिदिन, प्रति सप्ताह अपनी हाबीज डवल्प या रिवाइज करने का प्रयास करें। प्रतिदिन थोड़ा समय गार्डनिग या चित्रकारी, सृजनात्मक लेखन, कविता लिखने में समय लगाएं।

. यदि आप दफ्तर का काम करते हैं तो कभी-कभी किचन का काम करके चाय, टोस्ट, अण्डे बना कर परिवार वालों के लिए नई डिश बनाएं।

. जो काम भी आप करते हैं, वह शौक एवं आनंद से साथ करें। उसमें नवीनता लाएं। एक ही डिश अलग-अलग ढंगों से बनाएं।

. रविवार को सारा दिन हल्का भोजन करें। काम से ज्यादा आराम करें। संगीत सुनें। पसंद का टीवी देखें।

. हर समय कुछ नया करने के लिए तैयार रहें। अपने को बदलने की कोशिश में रहें। नया हेयर स्टाइल बनाएं।

. यह जिन्दगी अपनी है। अपना सफर कैसे काटना है, यह अपने आप निर्धारित करें। अपनी अपूर्ण हाबी ढूंढें और उसे डवल्प करें। उम्र का ध्यान छोड़ दें। जिम जाएं। गिटार या सितार सीखें।

. अपने आप को समय दें। अपने शरीर मन आत्मा को समय दें। पसंद का संगीत सुनें। अपने आपको खुश रखें।

. यह न सोचें कि आप न होंगे तो दुनियां न चलेगी। हर पल को भरपूर जीने की आदत डालें।

. निराश, मूर्ख, लड़ाई पसंद, झूठे, फरेबी मतलबी, लोगों से किनारा करें। तटस्थ रहें। टेंशन वाली बातें रिपीट न करें। टापिक ही न छेड़ें। जिन्दगी को जीने का अंदाज बदलते रहें।

. जो लोग अपने लिए मनोरंजन, कसरत, हंसने के लिए समय नहीं निकालते, वे अपने बीमार होने के लिए वक्त निकालने के लिए तैयार हो जाएं।

. आइये जीवन का रहस्य जानें। गम के पक्षियों को अपने सिर पर मत बैठने दें। यदि वे आकर मंडराने भी लगें तो उन्हें घोंसला मत बनाने दें। आनंद मग्न रहें। जिन्दगी जीने की कला सीखें। आर्ट आफ लिविग आपका कायाकल्प करके आपको दीर्घजीवी बनाएगा।

- विजेन्द्र कोहली गुरदासपुरी

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