आत्मीय क्षणों में दूर करें पारिवारिक कलह

आत्मीय क्षणों में दूर करें पारिवारिक कलह

सच पूछा जाए तो पति-पत्नी के संबंध कभी सुनहरे सपनों का दिलकश संसार होते हैं तो शिकवे-शिकायतों के महल भी और ऐसे समय पति-पत्नी संयुक्त रूप से निर्णय भी नहीं ले पाते और जरा-जरा सी बात पर गृह-कलह के पाश में बंध जाते हैं।

वैसे यह आजीवन चलने वाली सहज प्रक्रि या है जिसमें उतार-चढ़ाव तो आते रहते हैं। बस! दोनों के मन में एक दूसरे के प्रति दुर्भावना न आने पाए। तभी परिवार की गाड़ी को आसानी से चलाया जा सकता है। प्राय: देखने को मिलता है कि वैवाहिक संबंधों में भी कई बार बेवजह पति-पत्नी के बीच अहं भाव आ जाता है व बातचीत तक बंद हो जाती है, जो बिलकुल भी व्यवहारिक नहीं है। तो फिर ऐसी स्थिति में क्या करें?

पति-पत्नी का रिश्ता जहां स्थाई और अटूट होता है, वहीं वह बहुत नाजुक भी होता है। यह माना कि पारिवारिक जीवन में बहुत सी बातें होती हैं, जहां ऊंच-नीच चलती ही रहती है। ऐसी स्थिति में अच्छा यही है कि भावनात्मक रूप से जुड़े रहें व एक-दूसरे की बात का 'बुरा' न मानें।

भावनात्मक रूप से जुड़े पति-पत्नी अन्य की अपेक्षा अपने पति अथवा पत्नी की भावनाओं का ज्यादा ख्याल रखते हैं, पति को क्या पसंद है। क्या नहीं, पत्नी को खास तौर पर ध्यान देना चाहिए, चाहे वह पहनने, खाने, घूमने या फिर कोई अन्य बात ही क्यों न हो।

बात-बात में खीझना, एक दूसरे की भावनाओं की उपेक्षा करना, ऐसे कार्य जिससे जीवन साथी को चिढ़ है, नापसन्दगी है, उचित नहीं है। वैवाहिक जीवन में सामंजस्य स्थापित करना बेहद जरूरी है न कि टकराव का रास्ता अपनाना। वैवाहिक जीवन में हर पल एक दूसरे के प्यार की आवश्यकता होती है, जिससे आत्मीय संबंध प्रगाढ़ होते हैं।

जब भी पति-पत्नी के बीच इस तरह के क्षण आयें तो उस समय दिल का खुलापन, मधुर शालीन व्यवहार, व नम्रता से काम लेना चाहिए। यही ऐसे व्यवहार हैं जो आजीवन पति-पत्नी को खुशहाल बना सकते हैं। पारिवारिक कलह से बचने का सुगम उपाय यही है कि छोटी-मोटी बातों को नजर अंदाज कर आपसी सूझ-बूझ से कार्य कर सदाशयता का परिचय दें।

आपसी तनाव व रूठने के बाद एक दूसरे को मनाने का अपना अलग ही मजा है। जरूरी हो तो एक दूसरे से 'सॉरीÓ कहने में भी कोई हर्ज नहीं है। इस उधेड़बुन में नहीं पडऩा चाहिए कि पहल कौन करे।

यह पति-पत्नी में नोक-झोंक ही तो है जो जीवन में सीखने का अवसर देती है। हमें हमारी कमियों और गलती का आभास भी आपसी टकराव व नोंक-झोंक के बाद ही होता है, अत: पति-पत्नी को चाहिए कि वे एक दूसरे की भावनाओं की कद्र करें जिससे जीवन का भरपूर आनन्द उठाया जाये व एक-दूजे के चहेते बने रहें।

- चेतन चौहान

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