विज्ञापनों के जरिए उजड़ता स्वास्थ्य-सौंदर्य

विज्ञापनों के जरिए उजड़ता स्वास्थ्य-सौंदर्य

स्वास्थ्य, सौंदर्य और व्यक्तित्व को आकर्षक बनाने के लिए बाजार आजकल विविध उत्पादों से भरे पड़े हैं। आज से 25-30 वर्ष पूर्व जितने प्रकार के श्रृंगार प्रसाधन, साबुन, क्रीम, आदि मिलते थे, उनसे सौ गुना अधिक चीजें इन दिनों बाजार में भरी पड़ी हैं परंतु स्वास्थ्य, सौंदर्य और सुगढ़ता की दृष्टि से औसत स्थिति पिछड़ी ही है।

बीमारियों के लिए नए-नए इलाज खोजे जा रहे हैं पर नई-नई बीमारियां बढ़ती ही जा रही हैं। सुंदरता निखारने के लिए साबुन, तेल, सुंगधित पदार्थ, विटामिन शैंपू आदि तरह-तरह के उत्पाद उपलब्ध हैं लेकिन स्वास्थ्य जिस तरह लडख़ड़ाया है, उससे सारे उपाय बाहरी चमक ही दर्शाते हैं। क्षीण होती काया और चुकती जा रही जीवनशक्ति के कारण व्यक्तित्व खोखला ही होता जा रहा है।

सुंदरता के संबंध में कई मानदंड इन दिनों स्थापित हो चले हैं। प्रदर्शनप्रियता के लिए शरीर को जबर्दस्ती छरहरा और दुबला-पतला रखने के लिए तरह-तरह के उपाय किए जा रहे हैं। इन दिनों डाइटिंग से लेकर वजन कम करने के लिए भांति-भांति के रस रसायनों का प्रयोग, कष्टकर व्यायाम और शरीर को कमजोर कर देने वाली नाममात्र की खुराक का फैशन चल पड़ा है। इस कारण तीस वर्ष की उम्र पार करने के बाद प्राय: युवतियों को सिर चकराने, जल्दी थक जाने और खून की कमी होने, नींद नहीं आने जैसी शिकायतें होने लगती हैं।

शरीर को धर्म साधना का मुख्य आधार कहा गया है। जिन्हें धर्म साधना में कोई रूचि नहीं, उन्हें भी यह तो मानना ही पड़ेगा कि लौकिक उद्देश्यों जैसे यश, वैभव, सफलता और सत्ता पाने के लिए शरीर का स्वस्थ-समर्थ होना जरूरी है, न केवल जरूरी बल्कि अनिवार्य है। किसी भी दृष्टि से कमजोर और रूग्ण शरीर अपने उद्देश्य तक नहीं पहुंचाता। उसकी उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए।

वास्तव में बाजार में आने वाले नए-नए साधनों और फार्मूलों का उपयोग करने वाले लोग शरीर की उपेक्षा नहीं करते। वे उपभोक्ता सामग्री बनाने वाली कंपनियों के मकडज़ाल में उलझकर रह जाते हैं। स्वास्थ्य, सौंदर्य और प्रभावोत्पादक व्यक्तित्व किन्हीं उत्पादनों या रेडिमेड चीजों से प्राप्त नहीं होता।

इस तथ्य को अपने मन-मस्तिष्क में बिठा लेना चाहिए कि संतुलित आहार-विहार और नैसर्गिक, सहज स्वाभाविक जीवनचर्या ही शरीर को बलिष्ठ, समर्थ और सक्षम रखती है। उसके लिए विज्ञापनों के मायाजाल में फंसना अपना स्वास्थ्य और सौंदर्य नष्ट करना ही है।

जितना हो सके प्रयास करें कि विज्ञापनों में बताए जा रहे उत्पादों के बारे में सही व उचित जानकारी प्राप्त करें। किसी भी उत्पाद को शरीर व चेहरे पर इस्तेमाल करना स्वास्थ्य को गंभीर क्षति पहुंचा सकता है।

- उमेश कुमार साहू

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