माता-पिता बच्चों के पहले गाइड

माता-पिता बच्चों के पहले गाइड

बच्चे का आने वाला कल उसके सुंदर, संतुलित आज पर ही निर्भर करता है, जिसके लिए जरूरी है माता-पिता द्वारा बच्चे के शारीरिक, मानसिक विकास के साथ- साथ कुछ खास बातों का भी ख्याल रखा जाए। बच्चे के प्रयासों की तारीफ करें, उसके जन्मजात गुणों की नहीं।

सकारात्मक योगदान: 2011 में कनाडा की कॉनकोर्डिया यूनिवर्सिटी में किए गए रिसर्च के मुताबिक ऐसे बच्चों में, जिनके माता-पिता उनकी परवरिश में सकारात्मक योगदान दे रहे हैं और पॉजिटिव पेरैंटिंग स्किल्स का प्रयोग कर रहे हैं, व्यवहारिक समस्याएं कम दिखीं और इंटेलिजेंस टेस्ट में उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया।

बच्चा टीवी देखने में ज्यादा दिलचस्पी लेने लगे तो उसके टीवी देखने का समय निर्धारित करें। उसे कुछ खास चैनल्स और अच्छे कार्यक्रम ही देखने दें। दो साल तक के बच्चों को तो टीवी के आगे बैठने भी न दें। बच्चों को तनाव से बचाएं। स्ट्रैस हारमोन उनके कोमल मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा कर उनकी याददाश्त, सीखने की क्षमता और एकाग्रता को बाधित कर सकता है।

चीखें-चिल्लाएं नहीं: बच्चों पर कभी चीखें-चिल्लाएं नहीं क्योंकि डांट खाने और बेइज्जत होने पर वे बात मानने के बजाय और भी ज्यादा बेपरवाह बन जाएंगे। बच्चे को कोई बात प्यार से समझाएं। उसे सुधरने और अपनी परेशानियां शेयर करने का मौका दें। पेरेंट्स बच्चों के रोल मॉडल होते हैं। अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ अच्छा रिश्ता बनाकर आप अपने बच्चे को यह सिखा सकते हैं कि दूसरों के साथ मधुर संबंध कैसे बनाए जाएं। बच्चे के साथ कम्युनिकेशन बनाकर रखें। वह कभी किसी उलझन में हो तो उसे सही रास्ता दिखाएं।

संतुलित आहार: बच्चे को स्मार्ट और हैल्दी बनाने के लिए जरूरी है कि उसे पौष्टिक और संतुलित भोजन दिया जाए। बच्चे को पर्याप्त पोषण की जरूरत बचपन से ही होती है। थोड़ा बड़ा होने पर उसे प्रोटीन रिच डाइट (अंडे, दूध, मछली, सोयाबीन) दें, जो बच्चे की कार्यशीलता, एकाग्रता और सोचने की शक्ति बढ़ाती है, हड्डियां मजबूत बनाती है। बच्चे के मानसिक विकास के लिए दूध बहुत जरूरी है। उसे रोजाना एक गिलास दूध पीने की आदत डालें।

- नरेन्द्र देवांगन

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